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    Bihar: कहां डिरेल हो गई Prashant Kishor की Jansuraj पार्टी? आंदोलन के बाद आश्रम का सहारा

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    Prashant Kishor News: तारीख 2 अक्टूबर 2024, बिहार की सियासत में नई पार्टी का उदय होता है। नाम रखा जाता है जनसुराज पार्टी। मोटरसाइकिल पर चक्कर काटने से लेकर पैंपलेट बांटने तक, सोशल मीडिया पर डिजिटल क्रांति करने से लेकर गांव-गांव, कस्बा-कस्बा घूम कर पार्टी प्रचार करने के बाद जनसुराज की स्थापना की जाती है। बिहार में जनसुराज चर्चाओं का विषय बन जाता है। जामिया और आईआईएमसी जैसे संस्थान से सैकड़ों पास आउट विद्यार्थियों की जनसुराज में मोटी रकम पर हायरिंग की जाती है ताकि पढ़े लिखे यंग माइंड से पार्टी के विस्तार की रणनीति को शक्ल दी जाए। प्रशांत किशोर जो खुद चुनावी दलों के लिए रणनीति बनाया करते थे, वो खुद अपने पार्टी की स्थापना करते हैं। दावा करते हैं कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगे, सरकार भी बनाएंगे…पदयात्रा की लहर के बाद बिहार उपचुनाव में पार्टी रूपी रॉकेट को चुनावी मैदान में लॉन्च करते हैं। चुनाव हार जाते हैं। फिर शुरू होता है बिहार में BPSC का आंदोलन प्रशांत पूरा हुजूम लेकर आंदोलन में पहुंच जाते हैं। सिर्फ़ पहुंचते ही नहीं। वहीं अनशन और धरना देने की बात भी करते हैं। तकिया, कंबल, टोपी लेकर पहुंचते हैं।

    इसी बीच कभी विद्यार्थी तो कभी मीडिया से तीखी नोंक-झोंका का वीडियो भी सामने आता है। करोड़ों की वैनिटी वैन का मुद्दा गर्माता है तो सियासत शुरू होती है। बच्चों पर चली लाठी को लेकर प्रशांत बिहार पुलिस को चेतावनी दे डालते हैं कहते हैं कि अगली लाठी चली तो बिहार पुलिस अंजाम के लिए तैयार रहे। लाठियां फिर चलती है। प्रशांत किशोर विद्यार्थिों को अकेला छोड़ कर पार्टी को लोगों के साथ आगे चले जाते हैं। कुछ ही दिन में उनपर FIR दर्ज होता है। बिहार पुलिस की प्रशांत किशोर के साथ हाथापाई होती हैं। जेल भी जाते हैं। लेकिन ज़मानत मिल जाती है। जिसके बाद प्रशांत किशोर और भी सनसनी हो बन जाते हैं। विपक्ष के लोग कहते हैं कि प्रशांत मोदी की ही B पार्टी हैं। मोदी के ही इशारे पर गिरफ्तार हुए और मोदी के ही इशारे पर रिहा। लेकिन विपक्ष में खलबली मचती है। राजनीति में ये जिक्र सुलग जाता है कि कहीं प्रशांत बिहार की राजनीति में विपक्ष का चेहरा तो नहीं बन रहे। लेकिन फिर प्रशांत किशोर बिहार, पटना में गंगा नदी के किनारे बड़ा एरिया में टेंट लगाते हैं। टेंट में सामने की ओर गेट बना है, जिस पर लिखा है ‘बिहार सत्याग्रह आश्रम’। यह चुनावी रणनीतिकार और जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर का नया ठिकाना है। लेकिन यहां एक चीज़ समझ से परे हैं। पदयात्रा ये आंदोलन और आंदोलन से आश्रम पहुंचने वाले प्रशांत किशोर की राजनीति आखिर किस ओर जा रही है! नमस्कार मैं प्रत्यूष रौनक, आप देख रहे हैं द हिन्दी टॉप, आगे बढ़ने स पहले आप द हिन्दी टॉप को सब्सक्राइब करके बेल आइकन दबाना ना भूलें ताकि आप तक पहुंचे हर खबर सबसे पहले –

    प्रशांत किशोर की पार्टी के भीतक ही अंतर्द्वंद्व शुरू हो गया है। यानी विचारों की खींचतान। मैनेजमेंट की कमी। पार्टी के बड़े चेहरे बता रहे हैं कि प्रशांत किशोर और जनसुराज इन दिनों आश्रम में सत्याग्रह साधने की कोशिश कर रहे हैं। बिहार में जब बाकी पार्टियां प्रचार-प्रसार कर रही हैं। जो प्रशांत युवाओं रजिस्ट्रेशन कर के सत्याग्रह में शामिल करा रहे हैं। शिक्षा, परीक्षा, युवा और महात्मा गांधी की उस शिविरि में खास मौजूदगी है। प्रशांत किशोर ने खुद कहा है कि अब बिहार के युवाओं के लिए गांधी के रास्ते पर चलकर सत्याग्रह करने की जरूरत है। उनके साथी बताते हैं कि वे कम से कम होली तक यहीं रहेंगे। इस बीच उनका लक्ष्य एक लाख युवाओं को प्रशिक्षित करना है। पार्टी की रणनीति के हिसाब ये तय हुआ है कि युवाओं को सत्याग्रह में ट्रेनिंग देने के तीन फॉर्मेट हैं। पहला तीन दिन का, दूसरा एक हफ्ते का और तीसरा 21 दिनों तक। उनके यहीं रहने का इंतजाम होगा। प्रशिक्षण में उन्हें सत्याग्रह का गांधी का रास्ता सिखाया जायेगा ताकि वे शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से अपनी लड़ाइयां लड़ सकें। पार्टी बता रही है कि अगले आठ हफ्तों में एक लाख युवाओं को ट्रेनिंग देने का टारगेट है। इसके अलावा पूरे राज्य का कोई भी पीड़ित व्यक्ति यहां आकर अपनी बात रख सकता है। जल्द ही यहां 15-20 हजार लोगों के रहने की व्यवस्था की बात भी कही जा रही है।”

    बताते चलें कि ये प्रशांत का पुराना विज़न है, जिसको चुनाव से पहले साधने की कोशिश की जा रही है। साल 2020 में प्रशांत किशोर ने ‘बात बिहार की अभियान’ को शुरू किया था जिसमें बिहारी युवाओं को साथ लाने और पॉलिटिकल ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा था। मगर यहां एक दूसरा सिरा भी खुलकर आता है। खुद को युवाओं और राजनीतिक ट्रेनिंग देने वाले मेंटर तक सीमित रखने पर प्रशांत किशोर से जनसुराज के कई बड़े नेता नाराज दिखाई दे रहे हैं। पार्टी के कार्यकर्ता बताते हैं कि शिक्षा और परीक्षा का मुद्दा बड़ा है, मगर बिहार में दूसरे भी बड़े मुद्दे हैं। हर जिले में कोई न कोई ऐसा मुद्दा है, जिस पर अलग-अलग तरीके से संघर्ष की जरूरत है. जनसुराज में पटना भर में केन्द्रित कर लेना सही नहीं है। ये साल चुनाव का है। और इस वक्त में प्रशांत को पार्टी और उम्मीदवारों के बारे में सोचना चाहिए।

    आपतको यहां और एक बात बताए चलते हैं। बिहार में चुनाव जीतने के लिए बनी पार्टी जनसुराज जो इन दिनों सत्याग्रह में लीन है, पार्टी ने दावा किया था कि चुनाव से पहले सभी विधानसभा में 5-5 उम्मीदवारों की घोषणा की जाएगी। फिर जनसभा में वोटर तय करेंगे कि किसको टिकट मिलना चाहिए, उसी को जनता से टिकट मिलेगा। सत्याग्रह में जनसुराज प्रोफेशनल कमेटी में शामिल लोग बता रहे हैं कि ऐसा नहीं है कि सत्याग्रह में सिर्फ़ परीक्षा और शिक्षा से जुड़े मुद्दे पर बात होगी…वहां राजनीति पर भी बात होगी। चुनाव पर भी।

    मगर इन बातों से जनसुराज के बड़े नेता नाराज दिखाई पड़ रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र यादव और बिहार के पूर्व मंत्री मोनाजिर हसन पार्टी से पहले ही किनारा कर चुके हैं। हाल में अति पिछड़ा समूह के बड़े नेता रामबली चंद्रवंशी ने भी मीडिया में आकर सार्वजनिक रूप से पार्टी के वर्क कल्चर की घोषणा की थी।
    एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, जनसुराज प्रोफेशनल टीम का दबदबा है। पार्टी में बड़े ओहदे के लोग मनमानी करते हैं। अभी जनसुराज राजनेताओं की पार्टी नहीं बनी है। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी बने हुए के चार महीने हो गए हैं। आज तक पार्टी का अकाउंट तक नहीं खुला है। जानकारी के मुताबिक बिहार उपचुनाव हारने के बाद जनसुराज से सैकड़ों की संख्या में काम करने वाले लोग या तो निकाले गए या तो खुद ही नौकरी छोड़ दी।

    मोनाजिर हसन ने कहा कि पार्टी की प्रोफेशनल कमेटी में जिन्हें पॉवर मिला है वो कई बार पार्टी के लोगों को ही, नेताओं को भी नीचा दिखाते हैं। मोनाजिर आगे कहते हैं कि जब वो जनता दल युनाइटेड में थे और किसी बात से नाराज होते या शिकायत रहती तो खुद आला कमान नीतीश कुमार का फ़ोन आता था। लेकिन आज तक प्रशांत किशोर को वक्त नहीं मिला कि एक बार भी उन्हें फोन करें। अगर ऐसा चलता रहा तो पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में एक सीट भी नहीं आएगी। बताया जाता है कि जनसुराज प्रोफेशनल कमेटी के लोग प्रशांत किशोर की पुरानी संस्था आईपैक से प्रशांत का हिस्सा बने रहे हैं।

    बहरहाल, जनसुराज पार्टी जो संवाद और बहुमत से फैसले लेने का दावा करती है। उन्हीं के पार्टी में तानाशाह रवैया की शिकायत आ रही है। पार्टी जो चुनाव जीतने के पूरे इरादे BPSC आंदोलन में जाहिर कर रही थी। पदयात्रा करके उपचुनाव में प्राण और पैसा फूंक रही थी। वही पार्टी जो बिहार की जनता को जगाती है। कहती है कब तक गरीबी सहोगे…कब तक पेपर लीक का दंश आपका बच्चा झेलेगा..कब तक बिहार से बाहर जाकर मजदूरी करोगे..कब तक हॉस्पिटल के बाहर दम तोड़ोगे…कब तक बिहार में रात ढ़लते ही छीन-झपट की घटनाएं होंगी..तब तक रोजगार, समता और विकास की भीख मांगोगे..आओ मेरे साथ बदलाव की राजनीति में शामिल हो जाओ…वही पार्टी सत्याग्रह करके युवाओं का रजिस्ट्रेशन और गांधीवाद का ट्यूशन देने मात्र तक महदूद होती दिखाई दे रही है। और पार्टी की जानकारी के मुताबिक होली तक यही करेगी। खैर डी-रेल होती जा रही जनसुराज, जिसको लेकर उन्हीं के बड़े और कद्दावर नेता विज़न और ब्लूप्रिंट से भटकती नज़रा आ रही है, देखना है चुनाव से कितना पहले पार्टी और प्रशांत किशोर का भक खुलता है। खैर कहा तो ये भी जा रहा है कि प्रशांत किशोर के बाल धूप में तो सफेद हुए नहीं हैं। राजनीति के तजुर्बे की देन ये बालों में चमकती हुई चांदी है। ज़रूर प्रशांत किशोर कुछ ना कुछ करतब का तामझाम बांध रहे हैं। देखने है कि जनता को प्रशांत कितना समझ आते हैं, और बिहार की राजनीति के बयार में जनसुराज का तंबू कितने थपेरे झेल पाता है। मोटा-मोटी ये कि बिहार विधानसबा चुनाव हद्द दिलचस्प होने जा रहा है।

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