पटना। भाजपा (BJP) के प्रदेश कोषाध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी (Rakesh Kumar Tiwari) की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। पटना के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी-5 की अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानतीय वारंट (non-bailable warrant) जारी किया है। यह कार्रवाई अस्तित्व एडवरटाइजिंग द्वारा दायर परिवाद पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 356(2) के तहत की गई है। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को तय की गई है।
अदालत इससे पहले पाटलिपुत्र थाना को आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने का निर्देश दे चुकी थी। इसी बीच, बिहार पुलिस महानिदेशक के आदेश पर पुलिस महानिरीक्षक (केंद्रीय क्षेत्र, पटना) के निर्देशन में सिटी एसपी (पश्चिमी) के नेतृत्व में गठित त्रि-सदस्यीय विशेष जांच समिति ने बिहार क्रिकेट संघ से जुड़े मामलों की समीक्षा की।
जांच समिति ने पूर्व अनुसंधान को गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण और अपूर्ण बताते हुए प्रमुख एफआईआर में पुनः अनुसंधान की सिफारिश की है। कोतवाली थाना कांड संख्या 49/23 में आरोप है कि बाहरी राज्यों के खिलाड़ियों से बड़ी रकम लेकर फर्जी अथवा गलत पते पर बने डोमिसाइल प्रमाण पत्रों के आधार पर उन्हें बिहारी खिलाड़ी बताकर बीसीसीआई के आधिकारिक मुकाबलों में खिलाया गया।
इस प्रकरण में राकेश कुमार तिवारी समेत आठ लोगों के खिलाफ पुनः जांच की अनुशंसा की गई है। समिति ने यह भी उल्लेख किया है कि धन लेन-देन से जुड़े अहम ऑडियो साक्ष्यों (पेन ड्राइव) की पहले जांच नहीं की गई थी।
इसके अलावा थाना कांड संख्या 337/24 में मृतक के हस्ताक्षर का कथित दुरुपयोग कर बैंक खाते से बड़ी राशि के ट्रांसफर और नकद निकासी के आरोप सामने आए हैं। इस मामले में बैंक अधिकारियों, राकेश कुमार तिवारी और लेखपाल के खिलाफ भी पुनः अनुसंधान की सिफारिश की गई है।
विशेष जांच समिति की रिपोर्ट में बिहार क्रिकेट संघ से जुड़े मामलों में संगठित आर्थिक अनियमितता, धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग के गंभीर संकेत मिलने की बात कही गई है। अब पुनः जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।


