Tahir Hussain: दिल्ली में साल 2020 में हुए दंगों के आरोपी और पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए कस्टडी पैरोल की मंजूरी दे दी है। साथ ही ताहिर हुसैन को पुलिस हिरासत में चुनाव प्रचार करने की भी छूट मिल गई है।बता दें कि एआईएमआईएम पार्टी से ताहिर हुसैन दिल्ली की मुस्तफाबाद सीट से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। बीते दिनों ताहिर हुसैन ने पूर्व में सुप्रीम कोर्ट में चुनाव प्रचार के लिए जमानत देने की याचिका दायर की थी, लेकिन इसकी मंजूरी नहीं मिल पाई थी। अब उन्होंने पुलिस हिरासत में ही चुनाव प्रचार करने देने की इजाजत सुप्रीम कोर्ट से मांगी थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर कर लिया गया है।
बता दें कि दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उन पर आरोप गंभीर है। इसमें आईबी अधिकारी की हत्या का आरोप है और इस दंगे में 56 लोगों की मौत हुई। सुप्रीम कोर्ट ने ताहिर हुसैन के वकील से पूछा कि इसके अलावे और कितने मामले है जिसमें जमानत नही मिली है?? उन्होंने कहा कि दो मामलों में जमानत के लिए निचली अदालत में उनकी अर्जी लंबित है। ताहिर हुसैन के तरफ से कोर्ट को कहा कि अगर कोर्ट अंतरिम जमानत देता है तो वे घर नही जाएगा, होटल में रुकेगा।
गौरतलब है कि साल 2020 के दिल्ली दंगों में ताहिर हुसैन पर गंभीर आरोप हैं। ताहिर पर दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या में शामिल होने का भी आरोप है। इसके अलावा UAPA और PMLA जैसे संगीन कानूनों के तहत भी दो मामले दर्ज हैं। दंगों के ताहिर हुसैन आम आदमी पार्टी के पार्षद थे, लेकिन इस बार के दिल्ली चुनाव में उन्हें AIMIM ने टिकट दिया है। इससे दिल्ली हाईकोर्ट ने उसे कस्टडी परोल पर बाहर आकर नामांकन की अनुमति दी थी, लेकिन प्रचार के लिए अंतरिम जमानत देने से मना कर दिया था।
पिछले हफ्ते, अंतरिम जमानत के लिए ताहिर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन तब दो जजों की बेंच में इस पर सहमति नहीं बन पाई थी। ऐसे में मंगलवार यह मामला तीन जजों की बेंच जस्टिस विक्रम नाथ, संजय करोल और संदीप मिश्रा की बेंच में लगा। सुनवाई के दौरान ताहिर के लिए पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि वह अंतरिम जमानत की मांग पर जोर नहीं देना चाहते। इसके बजाय वह कोर्ट की तरफ से तय शर्तों पर कस्टडी परोल चाहते हैं। वहीं, जजों ने इस पर दिल्ली पुलिस के लिए पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू से जवाब मांगा। हालांकि, एएसजी राजू ने इस मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस तरह से गलत मिसाल बनेगी। जजों ने कहा कि ताहिर हुसैन ने रिहाई के दौरान आने वाला पूरा खर्च उठाने की बात कही है। सभी शर्तें भी स्वीकार करने की बात कही है इसलिए, आप खर्च और शर्तों पर जवाब दीजिए।
वहीं, दिल्ली पुलिस ने पैरोल का विरोध करते हुए कहा था कि ताहिर हुसैन पर गंभीर आरोप हैं, और अगर उन्हें अंतरिम जमानत दी जाती है, तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, पुलिस ने यह भी कहा कि चुनाव लड़ना कोई मौलिक अधिकार नहीं है और हुसैन अपना नामांकन तिहाड़ जेल से भी दाखिल कर सकते हैं। दिल्ली पुलिस ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान भीड़ को देखते हुए सुरक्षा का ज्यादा प्रबंध करना होगा। जेल वैन और सरकारी गाड़ियों का भी खर्च होगा। इसमें हर दिन (24 घंटे) के लिए 4 लाख 14 हजार का खर्च आएगा। एस वी राजू ने शाम 6 बजे ताहिर को वापस जेल भेजने की भी मांग की। इस पर जजों ने कहा कि इससे खर्च आधा हो जाएगा।


