Asaduddin Owaisi: वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा करने के लिए आयोजित JPC की बैठक में जबरदस्त हंगामा हुआ। इस हंगामे के चलते 10 विपक्षी सांसदों को एक दिन के लिए निलंबित कर दिया गया। इस विवाद की मुख्य वजह थी विपक्षी सांसदों का आरोप कि उनकी बातों को नजरअंदाज किया जा रहा है और उन्हें सही तरीके से सुनने का मौका नहीं दिया जा रहा। अब इस पर सियासत गरमा गई। इस बैठक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। हंगामा इतना बढ़ गया कि मामले को नियंत्रित करने के लिए मार्शल को बुलाने की नौबत आ गई। जेपीसी की बैठक में जो विवाद हुआ, उसने इस संशोधन बिल को लेकर पूरी कार्यवाही को संकट में डाल दिया है।
विपक्षी सांसदों का कहना था कि उन्हें इस बैठक में अपनी बात रखने का उचित समय और अवसर नहीं दिया जा रहा है। उनका ये भी आरोप था कि सरकार और भाजपा इस बैठक को जल्द से जल्द निपटाने की कोशिश कर रही है, ताकि दिल्ली चुनावों के संदर्भ में अपनी राजनीति साधी जा सके।टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी और कांग्रेस के नसीर हुसैन ने बैठक के दौरान विरोध जताया और अपनी बात रखने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें ऐसा मौका नहीं मिला। इसके बाद दोनों सांसद बैठक से बाहर निकल गए और संवाददाताओं से कहा कि जेपीसी की कार्यवाही अब एक “तमाशा” बन गई है। उन्होंने यह भी मांग की कि प्रस्तावित वक्फ संशोधन बिल की खंड-दर-खंड जांच के लिए 27 जनवरी को होने वाली बैठक को 30 या 31 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया जाए।
इस दौरान, जेपीसी के अध्यक्ष और भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल ने बैठक को स्थगित करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। हालांकि, विपक्षी सांसदों का कहना था कि इस बैठक को जल्दी निपटाने के लिए दबाव डाला जा रहा है, और इसके पीछे दिल्ली चुनावों का कारण छिपा हुआ है। अब आपको बताते हैं कि इस बैठक में हुआ क्या था। जेपीसी की बैठक में कुछ समय तक शांति रही, लेकिन जब कश्मीर के धार्मिक मीरवाइज उमर फारूक को बुलाने की चर्चा हुई, तो स्थिति बिगड़ गई,कुछ सदस्य इस पर बहस कर रहे थे कि मीरवाइज को बुलाने से पहले क्या जम्मू-कश्मीर के चुने हुए प्रतिनिधियों को बुलाया जाना चाहिए था।
टीएमसी के सांसद कल्याण बनर्जी और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद मार्शल को बुलाने की जरूरत पड़ी। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने विपक्षी सांसदों के व्यवहार को लेकर कड़ी आलोचना की और उन्हें निलंबित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे जेपीसी ने स्वीकार कर लिया।।अब जेपीसी ने कुल 10 विपक्षी सांसदों को एक दिन के लिए निलंबित कर दिया। निलंबित होने वाले सांसदों में टीएमसी के कल्याण बनर्जी, कांग्रेस के मोहम्मद जावेद, ए राजा, असदुद्दीन ओवैसी, नसीर हुसैन, मोहिबुल्लाह, मोहम्मद अब्दुल्ला, अरविंद सावंत, नदीम-उल हक और इमरान मसूद शामिल हैं। निलंबित होने के बाद इस निलंबन के बाद, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि विपक्षी सांसदों का व्यवहार लोकतंत्र के खिलाफ था। और विपक्ष ने बैठक के दौरान गलत व्यवहार किया और कार्यवाही को बाधित किया।
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष की मांग को अनदेखा किया गया और बैठक को जल्दबाजी में निपटाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार दिल्ली चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस बिल को जल्दी पास करना चाहती है, और यही कारण है कि बैठक के विषय को बदला गया।कल्याण बनर्जी ने इसे “अघोषित आपातकाल” की कार्यवाही करार दिया और कहा कि इस बैठक को राजनीति से प्रेरित होकर जल्दी निपटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जेपीसी की कार्यवाही अब एक “तमाशा” बन चुकी है और विपक्षी सदस्य होने के कारण उन्हें कोई सम्मान नहीं दिया जा रहा है।
अब बीजेपी के सांसदों का कहना था कि विपक्ष ने पूरी तरह से संसदीय प्रक्रिया का उल्लंघन किया है और बैठक को बाधित किया। भाजपा सांसद और जेपीसी की सदस्य अपराजिता सारंगी ने कहा कि “कल्याण बनर्जी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने जेपीसी अध्यक्ष के खिलाफ बहुत असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया, जो कि बिल्कुल गलत था।”
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा प्रस्तावित 44 संशोधनों पर कई बार चर्चा हो चुकी है, और अब समय आ गया है कि इन पर अंतिम निर्णय लिया जाए। अपराजिता सारंगी का कहना था कि जेपीसी की कार्यवाही को लंबा नहीं खींचा जा सकता, क्योंकि सभी मुद्दों पर विचार विमर्श हो चुका है। वक्फ संशोधन बिल पर जेपीसी की बैठक में हुए हंगामे ने सरकार और विपक्ष के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। विपक्षी सांसदों का कहना है कि सरकार इस बिल को जल्दबाजी में पास कराना चाहती है, जबकि सरकार का कहना है कि यह बिल देश के लिए आवश्यक है और इसकी चर्चा पूरी हो चुकी है।वक्फ संशोधन बिल पर जेपीसी की बैठक में हुआ हंगामा भारतीय संसद की कार्यवाही का एक बड़ा मुद्दा बन गया है। विपक्षी सांसदों के आरोप और भाजपा के जवाब ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है। अब यह देखना होगा कि 27 जनवरी को होने वाली जेपीसी की अगली बैठक में क्या स्थिति बनती है और क्या इस विवाद का समाधान निकलता है।


