नई दिल्ली: दिल्ली के पानी पर बड़ा खुलासा, 55% भूजल (Groundwater) पीने लायक नहीं – राजधानी दिल्ली में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General of India) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 से 2022 के बीच जांचे गए भूजल के 55% नमूने पीने के लिए सुरक्षित नहीं पाए गए।
आधे से ज्यादा पानी फेल
‘फंक्शनिंग ऑफ दिल्ली जल बोर्ड’ रिपोर्ट के अनुसार, Delhi Jal Board की 8 प्रयोगशालाओं ने 16,234 नमूनों की जांच की, जिनमें से 8,933 नमूने फेल हो गए। यानी हर दो में से एक से ज्यादा नमूना पीने योग्य नहीं था।
बिना शुद्ध किए सप्लाई हुआ पानी
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 2017-22 के दौरान रोजाना 80 से 90 मिलियन गैलन कच्चा पानी बिना ट्रीटमेंट के ही लोगों तक पहुंचाया गया। इससे पानी की गुणवत्ता और खराब हुई और लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ा।
भूजल (Groundwater) टेस्टिंग में बड़ी लापरवाही
पानी की जांच Bureau of Indian Standards के तय 43 मानकों के अनुसार होनी चाहिए, लेकिन दिल्ली जल बोर्ड सिर्फ 12 मानकों पर ही जांच कर रहा था।
यहां तक कि बोरवेल के पानी की जांच 46 में से सिर्फ 4 मानकों पर ही की गई।
आर्सेनिक, सीसा और तांबा जैसे खतरनाक तत्वों की जांच भी नहीं की जा रही थी, जो गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
प्रतिबंधित रसायनों का इस्तेमाल
हैदरपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में ऐसे रसायनों का इस्तेमाल जारी पाया गया, जिन पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी थी। इससे भूजल (Groundwater) और भी जोखिम भरा हो सकता है।
भारी पानी की बर्बादी और असमान सप्लाई
दिल्ली में 51% से 53% पानी लीकेज या चोरी में बर्बाद हो रहा है, जिससे करीब 4,988 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
साथ ही कई इलाकों में लोगों को तय मात्रा (60 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन) से भी कम पानी मिल रहा है।
क्या है बड़ी चिंता?
दिल्ली में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए अब भूजल पर निर्भरता बढ़ रही है। ऐसे में अगर यही पानी सुरक्षित नहीं है, तो यह सीधे लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
निष्कर्ष
कैग की यह रिपोर्ट साफ बताती है कि दिल्ली में पानी की सप्लाई तो हो रही है, लेकिन उसकी गुणवत्ता, जांच और निगरानी में गंभीर खामियां हैं। अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो इसका असर सीधे आम लोगों की सेहत पर पड़ेगा।


