Rahul Gandhi: दिल्ली चुनावों में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के तेवर इन दिनों कुछ और ही कह रहे हैं। उनकी राजनीति की दिशा भी किसी और तरफ करवट लेती हुई नज़र आ रही है। एक तरफ दिल्ली चुनाव है दूसरी तरफ बिहार चुनाव दोनों ही जगह चुनावों के चलते राजनीतिक माहौल गर्माया है। और इस बार दिल्ली चुनावों में जो राजनीतिक समिकरण नजर आ रहे हैं, वो बिहार में भी देखने को मिल सकते हैं। हाल ही में पटना में राहुल गांधी बड़े खुशनुमा माहौल के साथ लालू यादव और उनके परिवार से मुलाकात की थी। अब राहुल गांधी का लालू परिवार से मिलना और राजनीतिक संवाद स्थापित करना साफ तौर पर दिखाता है कि उनका रुख अब पूरी तरह से बदलाव के रास्ते पर है। दरअसल, बिहार चुनाव में कांग्रेस और आरजेडी के गठबंधन को लेकर जो भी समीकरण बन रहे हैं, वो दिल्ली चुनावों जैसे ही हो सकते हैं।
हाल ही में दिल्ली विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी ने पहली बार अरविंद केजरीवाल को सीधा टार्गेट किया और मोदी के साथ उनकी तुलना की। कांग्रेस की रैली में राहुल गांधी ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों एक जैसे ही हैं। लिहाज़ा राहुल ये कहना चाहते थे कि केजरीवाल और पीएम मोदी की सियासत में कोई फर्क नहीं है।।।राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीति और गरमा गई।।कांग्रेस अब दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) के खिलाफ अपनी पूरी ताकत झोंकेगी। 2020 के दिल्ली चुनाव में राहुल गांधी के एक बयान ने खूब चर्चा बटोरी थी जब उन्होंने कहा था, “तो युवा डंडे मारेंगे।” ये बयान उस समय राहुल गांधी का चुनावों में रुख बता रहा था।
हालांकि, बिहार दौरे के बाद राहुल गांधी की तबीयत ठीक नहीं रही थी और कई कार्यक्रम रद्द किए गए थे। इनमें नई दिल्ली सीट पर उनकी पदयात्रा भी शामिल थी। अब राहुल गांधी की रैलियां दिल्ली में शुरू हो चुकी हैं, और उनका निशाना फिर से अरविंद केजरीवाल पर है।अरविंद केजरीवाल ने राहुल गांधी के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वो अपनी अलग लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि राहुल गांधी कांग्रेस को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। मगर जब राहुल गांधी ने अरविंद केजरीवाल पर हमला बोलते हुए कहा कि मोदी के नाम से केजरीवाल कांपने लगते हैं, तो केजरीवाल ने पलटवार किया और राहुल से सवाल किया, “आप और आपका परिवार अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं हुआ?” इस तकरार ने दिल्ली की राजनीति को और भी गर्म कर दिया। लेकिन अब सवाल ये है की राहुल गांधी जैसे दिल्ली में केजरीवाल को अपना competitor समझते हैं क्या वैसे ही वो बिहार में लालू यादव के खिलाफ खड़े होंगे। हालांकि अपने बिहार दौरे के दौरान राहुल गांधी ने तेजस्वी यादव के साथ खूब दोस्ताना दिखाया, लेकिन जब बात जातिगत गणना की आई तो राहुल गांधी ने वहां अपने आप को अलग कर लिया।
अक्सर बिहार में तेजस्वी यादव को जातिगत गणना के मुद्दे को उठाते हुए देखा गया है। जिसके जवाब में राहुल गांधी ने इसे फर्जी करार दिया। राहुल गांधी ने बिहार के जातीय गणना को “बेवकूफ बनाने वाला” कदम बताया और कहा कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर जातिगत जनगणना कराकर ही दम लेगी। यह बयान राहुल गांधी के बिहार चुनाव को लेकर साफ संकेत देता है कि वो अब तेजस्वी यादव और लालू यादव पर दबाव बनाने की पूरी कोशिश करेंगे। राहुल गांधी का ये बयान ये दिखाता है कि बिहार चुनाव में कांग्रेस और आरजेडी के बीच अब कोई सहज और सुलझा हुआ गठबंधन नहीं दिखेगा। कांग्रेस और आरजेडी के रिश्तों में खटास आ सकती है, जैसा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस के रिश्तों में देखी गई थी।
दिल्ली में जिस तरह से चुनावी समीकरण बनते गए थे, क्या वही समीकरण बिहार में भी होंगे? इस सवाल का जवाब हां में हो सकता है, क्योंकि बिहार चुनाव में भी यही सब कुछ देखने को मिल सकता है। राहुल गांधी और कांग्रेस का दिल्ली में जो रुख था, वो बिहार में भी देखा जा सकता है, क्योंकि बिहार में जातिगत गणना पर बहस और राजनीति तेज हो चुकी है।बिहार में भी इंडिया ब्लॉक के तत्व अब खुद को सामने ला सकते हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव में जो बंटवारा दिखा था, वो बिहार में भी संभव है। राहुल गांधी और कांग्रेस का ये है कि वो बिहार में भी तेजस्वी यादव और लालू यादव के परिवारवाद को निशाना बनाएंगे, जैसा कि दिल्ली में केजरीवाल को लेकर हम देख चुके हैं। राहुल गांधी ने पहले भी कई बार बोल चुके हैं ।वो बिहार में ‘जंगलराज’ का इतिहास याद दिलाएंगे। यह कदम बीजेपी और नीतीश कुमार के रणनीतिक खेल से मेल खाता हुआ दिखाई देता है।
बिहार में कांग्रेस और आरजेडी का गठबंधन पहले से ही चर्चा में है, और ये गठबंधन आगामी चुनावों में बड़ा असर डालने वाला हो सकता है। राहुल गांधी के तेजस्वी यादव पर हमले और जातिगत गणना के मसले पर बयान ने ये दिखाया कि उनका रुख अब अलग हो सकता है। इस समय कांग्रेस और आरजेडी के गठबंधन के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि दिल्ली चुनाव के बाद इंडिया ब्लॉक में दरार आ सकती है, और इस दरार का असर बिहार चुनावों में भी देखने को मिल सकता है। अगर कांग्रेस और आरजेडी के बीच मतभेद और गहरे होते हैं, तो कांग्रेस बिहार में अकेले चुनावी मैदान में उतर सकती है, जैसे कि दिल्ली में कांग्रेस अकेले चुनावी मैदान में थी।
दिल्ली चुनावों में ममता बनर्जी और अखिलेश यादव का समर्थन आम आदमी पार्टी को मिल रहा है , और अब बिहार में भी ये सब कुछ देखने को मिल सकता है। ममता बनर्जी की ओर से राहुल गांधी को लेकर अपनी राय बनाना और बिहार में गठबंधन को लेकर अपनी भूमिका तय करना अहम होगा। जैसे दिल्ली में अखिलेश यादव का आम आदमी पार्टी को समर्थन था, वैसे ही बिहार में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। कुल मिलाकर, दिल्ली और बिहार चुनावों के समीकरण में कई समानताएं दिख रही हैं। बिहार में भी कांग्रेस और आरजेडी के रिश्तों में खटास आ सकती है, और राहुल गांधी का रुख अब तेजस्वी यादव और लालू यादव पर हमला करने के पक्ष में होता दिख रहा है। बिहार में चुनावी संघर्ष दिल्ली की तरह तीव्र और निर्णायक हो सकता है, और यह सवाल उठ सकता है कि क्या कांग्रेस बिहार में भी अकेले चुनाव लड़ेगी। बिहार में राजनीतिक समीकरण बदलते हुए नजर आ रहे हैं, और आगामी चुनाव में ये सब कुछ दिलचस्प साबित हो सकता है।


