दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के आसपास के इलाकों में दिवाली के बाद सुबह जहरीली धुंध की मोटी चादर दिखी। पटाखों पर पाबंदी का आदेश बेअसर रहा और गुरुवार रात जमकर आतिशबाजी हुई। इस वजह से गंभीर ध्वनि प्रदूषण हुआ और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बेहद खराब स्तर पर पहुंच गया।
दिवाली के अगले दिन शुक्रवार को हरियाणा और पड़ोसी पंजाब के कई स्थानों पर एक्यूआई का लेवल ‘खराब’ और ‘बहुत खराब’ स्तर तक पहुंच गया।
केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) भी ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहा।
दिवाली की रात हरियाणा के कई हिस्सों में भी AQI का लेवल ‘खराब’ और ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली के आनंद विहार में 1 नवंबर को सुबह 6 बजे AQI 395 दर्ज किया गया, जो “बहुत खराब” था। पिछली रात इस क्षेत्र में AQI का लेवल और भी खराब दर्ज किया गया था, क्योंकि PM2.5 का लेवल बढ़ गया था।
शुक्रवार सुबह 9 बजे हरियाणा के गुरुग्राम में AQI 344, जींद में 340, अंबाला में 308 और कुरुक्षेत्र में 304 दर्ज किया गया।
पंजाब और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में भी वायु गुणवत्ता का स्तर ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गया।
पिछले वर्ष दिवाली के दौरान आसमान साफ था, जब अनुकूल परिस्थितियों के चलते AQI 218 पर था, लेकिन इस वर्ष के त्यौहारों के कारण दिल्ली का वायु प्रदूषण फिर से खतरनाक स्तर पर पहुंच गया, जो प्रतिकूल मौसम, पराली जलाने और यातायात उत्सर्जन के कारण और भी बढ़ गया।
दिल्ली भारत के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है। आमतौर पर दिवाली के अगले दिन शहर की आबोहवा बेहद खराब हो जाती है।
साल 2017 से दिल्ली सरकार और कुछ अन्य राज्यों ने पटाखों की बिक्री पर पाबंदी लगा दी है। लोगों से ग्रीन क्रैकर्स और लाइट शो जैसे पर्यावरण के अनुकूल विकल्प चुनने का आग्रह किया गया है। लेकिन, इन नियमों का पालन बेहद सीमित है, क्योंकि पटाखे अभी भी स्थानीय स्टॉल और दुकानों से आसानी से उपलब्ध हैं।
कुछ लोगों का मानना है कि पाबंदी का असर बेहद काम है, वहीं कुछ लोग इसे प्रदूषण से निपटने के लिए एक जरूरी कदम मानते हैं।


