New Delhi Assembly Seat: विधानसभा चुनाव में नई दिल्ली विधानसभा सीट पर चुनावी लड़ाई दिलचस्प मोड़ ले रही है। दरअसल, ये सीट राजधानी की सबसे हाईप्रोफाइल सीट में से एक है। यूं तो ये मुकाबला त्रिकोणीय लग रहा है कि लेकिन यहां 22 ऐसे भी धुरंधर मैदान में उतरे हैं जो Arvind Kejriwal के सामने अपनी चुनौती पेश कर रहे हैं। बता दें कि वोट संख्या के मामले में नई दिल्ली विधानसभा सीट दूसरी सबसे छोटी सीट है। हालांकि, इस सीट का राजनीतिक महत्व काफी है। इस बार के चुनाव में इस सीट पर से उम्मीदवारों के मामले में भी ये सीट सबसे आगे हैं। बता दें कि कुल चालीस उम्मीदवारों ने इस सीट से पर्चे नॉमिनेशन किए हैं, कुछ ने अपना नाम भी वापस ले लिया जबकि और कुछ के रिजेक्ट हो गए। इसके बाद इस सीट पर अब 23 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।
नई दिल्ली सीट इसलिए भी ज्यादा खास बन गई, क्योंकि मौजूदा विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अलावा कांग्रेस और बीजेपी ने भी हाई प्रोफाइल उम्मीदवार उतार दिए। इस सीट पर कांग्रेस ने दिल्ली की शिल्पकार कहे जाने वाली शीला दीक्षित के बेटे और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित को चुनावी मैदान में उतारा है। जबकि बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री साहब सिंह वर्मा के बेटे और पश्चिमी दिल्ली से सांसद प्रवेश वर्मा को यहां से उतारा है। इसके अलावा कई निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी लाइमलाइट में आने के लिए यहां से नॉमिनेशन भरा है।
नई दिल्ली विधानसभा सीट इसलिए भी अहम् है क्योंकि कहा जाता है कि यही सीट मुख्यमंत्री भी चुनती है। लगातार तीन बार अरविंद केजरीवाल ने नई दिल्ली विधानसभा सीट से जीत हासिल की और दिल्ली पर राज किया। केजरीवाल से पहले शीला दीक्षित भी इसी सीट से विधायक हुआ करती थीं और वो भी लगातार तीन बार मुख्यमंत्री बनीं। ऐसे में इस साल के दिल्ली चुनाव में केजरीवाल को दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे चुनौती दे रहे हैं। संदीप दीक्षित नई दिल्ली से कांग्रेस के प्रत्याशी हैं और पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शीला दीक्षित के बेटे भी। प्रवेश वर्मा वर्मा भी पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत साहेब सिंह वर्मा के बेटे हैं। साथ ही दोनों सांसद रह चुके हैं। ऐसे में इस सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है।
इस सीट पर वोटर्स को साधने के लिए संदीप दीक्षित डोर टु डोर कैंपेन साथ ही वह शीला दीक्षित के कार्यकाल में हुए कामों पर निर्भर हैं। इसके अलावा प्रवेश वर्मा के पास मोदी सरकार का आठवें वेतन आयोग के गठन की मंजूरी
ही संजीवनी है। दरअसल, नई दिल्ली सीट पर सबसे ज्यादा सरकारी कर्मचारी हैं। ऐसे में सरकारी कर्मचारियों के वेतन में सुधार के कदम को बीजेपी अपनी उपलब्धि और केजरीवाल के खिलाफ सियासी हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है। इसके अलावा बीजेपी के पास हिन्दुत्व का वोट भी है। हालांकि, तीनों प्रत्याशियों के बीच तुलना करें तो अरविन्द केजरीवाल की पकड़, अनुभव, साधन, संसाधन और संगठन की ताकत के मुकाबले बाकी प्रत्याशी नहीं ठहरते। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी नई दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी को बढ़त मिली थी। हालांकि यह बढ़त मामूली वोटों की ही मानी जाएगी। 2262 वोटों से बीजेपी यहां पिछड़ी थी।


