सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में बिगड़ती वायु गुणवत्ता (Air Pollution) पर दिल्ली सरकार से सवाल किया। शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार से पूछा कि प्रदूषण-रोधी उपायों को लागू करने में देरी क्यों हुई।
शीर्ष अदालत ने पूछा, “हमने वायु गुणवत्ता सूचकांक के 300 पार करने का इंतज़ार क्यों किया?” सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से कहा कि कोर्ट को सूचित किए बिना पाबंदियों में ढील ना दें।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि एनसीआर क्षेत्र के सभी राज्यों को कक्षा 12वीं तक के छात्रों के लिए सभी भौतिक कक्षाएं बंद करने का तत्काल निर्णय लेना चाहिए।
देश की सुप्रीम अदालत राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण (Air Pollution) पर अंकुश लगाने के उपायों को लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
दिल्ली सरकार ने केंद्र पर फोड़ा ठीकरा
दिल्ली सरकार का दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण (Air Pollution) का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ा है। दिल्ली की सीएम आतिशी ने कहा- “दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण से लोग बहुत परेशान हैं। लोगों को सांस लेने में काफ़ी दिक़्क़त हो रही है। इसका कारण देशभर में पराली जलाया जाना है लेकिन केंद्र की BJP सरकार हाथ पर हाथ रखकर बैठी है। उत्तर भारत के तमाम शहर बुरी तरह से प्रदूषित हैं लेकिन केंद्र सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है।”
“मोदी सरकार ने उत्तर भारत को प्रदूषण (Air Pollution) के धुएं में झोंका“
आतिशी ने कहा- BJP शासित राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में पराली जलाये जलने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वहीं आम आदमी पार्टी शासित पंजाब में पराली जलाये जाने की घटनायें कम हुई हैं। यह आँकड़े हमारे नहीं बल्कि केंद्र की BJP सरकार के ही हैं।”
उन्होंने कहा- “जब पंजाब सरकार पराली जलाने की घटनाएँ कम कर सकती है तो केंद्र की बीजेपी सरकार क्यों नहीं कर सकती है? केंद्र सरकार कोई काम ना करने की बजाय राजनीति कर रही है और पूरे उत्तर भारत को Medical Emergency की तरफ़ धकेल रही है।”
दिल्ली सीएम ने कहा- “BJP के नेता पराली के मुद्दे पर राजनीति ना करके कुछ काम करके दिखाएं। यूपी, हरियाणा और मध्य प्रदेश में पराली जलने के पीछे बीजेपी की नाकामी है। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने पराली जलने की घटनाएं कम करके दिखा दी हैं। तो बीजेपी और उनकी केंद्र सरकार क्यों नहीं कर सकती?”


