श्रीलंका राष्ट्रपति चुनाव में वामपंथी नेता अनुरा कुमारा दिसानायके (Anura Kumara Dissanayake) की जीत हुई है। सोमवार को उन्होंने राष्ट्रपति पद की शपथ ली। दिसानायके ने 1980 में छात्र जीवन में ही राजनीति में कदम रख दिया था।
दिसानायके साल 2000 में पहली बार सांसद चुने गए। राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद उन्होंने कहा कि यह हम सबकी जीत है। हम मिलकर श्रीलंका के इतिहास को फिर से लिखने के लिए तैयार हैं।
श्रीलंका (Sri Lanka) में हाल ही में हुए राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आ गए हैं। श्रीलंका चुनाव के इतिहास में पहली बार जीत का फैसला दूसरे दौर की मतगणना से किया गया है। चुनाव नतीजों में वामपंथी नेता अनुरा कुमारा दिसानायके (Anura Kumara Dissanayake) की जीत हुई है।
दिसानायके ने आज यानी सोमवार को श्रीलंका के नौवें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ले ली है। बता दें कि दिसानायके श्रीलंका के पहले वामपंथी राष्ट्रपति हैं। 56 वर्षीय दिसनायके को राष्ट्रपति सचिवालय में मुख्य न्यायाधीश जयंत जयसूर्या ने शपथ दिलाई है।
दिसानायके (Anura Kumara Dissanayake) जनता विमुक्ति पेरामुना पार्टी (जेवीपी) के नेता हैं। इस चुनाव में उन्हें नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) गठबंधन की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया था।
बीते शनिवार को उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी समागी जन बालवेगया (एसजेबी) के साजिथ प्रेमदासा को मात दी थी। बता दें कि चुनावी मैदान में 39 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे थे।
मतगणना के पहले दौर में ही दिसानायके ने अन्य प्रत्याशियों से बढ़त बना ली थी। दिसानायके को 56.3 लाख वोट मिले, जो कुल वोट का 42.31 फीसदी है।
विपक्षी नेता साजिथ प्रेमदासा को 43.6 लाख, यानी 32.80 फीसदी मत हासिल हुए। पूर्व राष्ट्रपति विक्रमसिंघे को 22.9 लाख वोट मिले जो, कुल मतों का 17.27 फीसदी है।
श्रीलंका के चुनाव आयोग के नियम के मुताबिक अगर कोई भी उम्मीदवार 50 फीसदी वोट नहीं हासिल कर पाता है तो दूसरे और तीसरे दौर की मतगणना शुरू की जाती है।
बता दें कि इस चुनाव से पहले श्रीलंका में हमेशा प्रथम वरीयता मतों के आधार पर ही प्रत्याशियों की जीत निर्धारित हुई थी।
जीत के बाद क्या बोले दिसानायके?
जीत के बाद दिसानायके (Anura Kumara Dissanayake) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “सदियों से हमने जो सपना संजोया है वह आखिरकार सच हो रहा है। यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति के काम का नतीजा नहीं है, बल्कि आप हजारों लोगों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।”
उन्होंने आगे कहा, आपकी प्रतिबद्धता हमें यहां तक ले आई है और इसके लिए मैं हृदय से आभारी हूं। ये जीत हम सभी की है।
दिसानायके ने कहा, “यहां तक पहुंचने के लिए अनेक लोगों ने बलिदान दिया है। जिन्होंने इस उद्देश्य के लिए अपना पसीना, आंसू और यहां तक कि अपना जीवन भी दे दिया। उनके बलिदानों को भुलाया नहीं जा सकता। हम मिलकर श्रीलंका के इतिहास को फिर से लिखने के लिए तैयार है।”
उन्होंने कहा कि, इस सपने को नई शुरुआत से ही साकार किया जा सकता है। सिंहली, तमिल, मुस्लिम और सभी श्रीलंकाई लोगों की एकता इस नई शुरुआत का आधार है। हम जिस नए पुनर्जागरण की तलाश कर रहे हैं वह इस साझा ताकत और दृष्टिकोण से उभरेगा।
कैसी रहा है दिसानायके का सियासी सफर?
श्रीलंका के राष्ट्रपति और वामपंथी नेता दिसानायके (Anura Kumara Dissanayake) छात्र जीवन में ही राजनीति और जेवीपी से जुड़ गए थे। 1980 के दशक में जेवीपी ने सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह किया था और पूरे देश में हिंसा भड़क गई थी।
80 के दशक को श्रीलंका का खूनी दौर भी कहा जाता है। सरकार ने इस विद्रोह को कुचल दिया था। कुछ समय बाद दिसानायके और जेवीपी ने हिंसा के रास्ते को छोड़ दिया था।
दिसानायके पहली बार साल 2000 में सांसद चुने गए थे। इसके बाद साल 2004 में श्रीलंका फ्रीडम पार्टी के साथ गठबंधन करने के बाद दिसानायके कृषि और सिंचाई मंत्री बने थे।
साल 2014 में दिसानायके जेवीपी के अध्यक्ष बने थे। साल 2019 में दिसानायके पहली बार राष्ट्रपति चुनाव के रेस में आए थे लेकिन चुनाव में उनकी बुरी हार हुई थी और उन्हें केवल 3 फीसदी वोट ही मिला था।


