Babarpur Seat: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है। चुनावी तीरीखों के ऐलान के बाद अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी दिल्ली में लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करने के लिए जोर लगा रही है,जबकि भाजपा ने बाजी पलटने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कांग्रेस भी लड़ाई में है, जो अकेले चुनाव लड़ रही है। बता दें कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2024 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। लेकिन अब देखना ये होगा कि 2025 में कौन बनेगा दिल्ली का हीरो।
बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में, AAP ने 70 में से 62 सीटें जीती थीं, जबकि BJP को केवल 8 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। इस बार AAP ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है । अगर बात 2020 के चुनाव की करे तो आम आदमी पार्टी (AAP) ने शानदार जीत हासिल की थी, जिसमें उन्होंने 62 सीटों पर जीत हासिल की थी। बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला था, लेकिन कांग्रेस को कोई खास सफलता नहीं मिली। बाबरपुर विधानसभा सीट दिल्ली की महत्वपूर्ण विधानसभा सीट है,जहां 2020 में आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल की थी अगर बात 2025 की करें तो उत्तर पूर्वी जिले में बाबरपुर राजनतिक नजरिये से हाट सीट है। क्योंकि इस सीट पर पिछले दो विधानसभा चुनाव से आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रमुख और दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय काबिज है। इस बार कांग्रेस ने इस सीट पर ऐसा पत्ता फेंका है, जिससे मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है।
आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक हाजी इशराक खान को गोपल राय की टक्कर में कांग्रेस ने बाबरपुर सीट से उतारा है। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ठीक ठाक है। तीन बार कांग्रेस यहां मुस्लिम प्रत्याशियों पर दाव खेल चुकी है। लेकिन वह प्रत्याशी यहां कमाल नहीं दिखा सके। इस बार फिर से कांग्रेस ने मुस्लिम उम्मीदवार पर भरोसा जताते हुए मैदान में उतारा है। साल 1998 में कांग्रेस ने इस सीट पर अब्दुल हमीद को मैदान में उतारा था, जो चुनाव हार गए थे आपको बता दें 2020 में आम आदमी पार्टी ने सीलमपुर से टिकट कटने से नाराज होकर हाजी मोहम्मद इशराक खान ने आप छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था। यहां बीजेपी ने अनिल वशिष्ठ को मैदान में उतारा है।
बाबरपुर में अब तक के चुनावों के परिणामों की बात करें तो 1993 से लेकर साल 2020 तक के हुए सात चुनावों में बीजेपी का दबदबा रहा है। बीजेपी ने अब तक चुनावों में चार जीत हालिस की। खास बात यह है कि, 1993 से लेकर 2020 तक के चुनावों में बीजेपी की तरफ से नरेश गौड़ ने ही यहां पार्टी का प्रतिनिधित्व किया था। इस बार पार्टी ने उनका टिकट काट कर अनिल वशिष्ठ पर दांव लगाया है। गौड़ को पिछले दो चुनावों 2020 और 2015 में आप के गोपाल राय के हाथों मात खानी पड़ी। जबकि एक बार 2003 में कांग्रेस के विनय शर्मा ने उन्हें हराया था। नरेश गौड़ 1993, 1998, 2008 और 2013 में बाबरपुर सीट पर बीजेपी का परचम लहराने में सफलता हासिल की थी। अब देखने ये होगा कि बाबरपुर की जनता किसको चुनती है और बाबरपुर की सीट पर किसके सजेगा ताज और किसपर किरेगी गाज ये तो चुनावी नतीजो के बाद ही साफ होगा।
बाबरपुर में जीत हार में भूमिका मुस्लिम और हिंदू मतदाताओं के एक तरफा वोटिंग पर निर्भर करती है। अगर मुस्लिम मतदाता एक तरफ वोट करें और हिंदू मतदाताओं का वोट बंट जाए तो उसका फायदा कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को मिला है। वहीं, जब मुस्लिम मतदाता का वोट बंट जाता है तो उसका फायदा हिंदू प्रत्याशियों भाजपा को मिलता रहा है। अबकी बार इस सीट से कांग्रेस ने सीलमपुर के पूर्व विधायक हाजी इशराक खान को बाबरपुर से आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री गोपाल राय के सामने मैदान में उतार दिया है। हाजी इशराक खान आम आदमी पार्टी के टिकट पर ही वर्ष 2015 में सीलमपुर से विधायक चुने गए थे। टिकट कटने के कुछ समय बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ दी थी। हाजी इशराक खान की छवि साफ है। सीलमपुर में लोग उनके कामकाज से काफी संतुष्ट बताए जाते हैं। भाजपा ने इस सीट से अनील वशिष्ठ को उम्मीदवार बनाया है। लेकिन, ऐसा माना जा रहा है कि हाजी इशराक खान मुस्लिम मतदाताओं में अच्छी सेंधमारी करेंगे, जिससे गोपाल राय की राह मुश्किल हो सकती है।


