Bihar Elections: बिहार के चुनावी साल में राजनीति गलियारों में हलचल शुरू हो चुकी है। इसी बीच तेजस्वी यादव को आरजेडी का चेहरा बनाकर लालू प्रसाद यादव ने एक बड़ा कदम उठाया है।अब तक पार्टी के फैसलों में लालू यादव की अहम भूमिका थी, लेकिन अब तेजस्वी यादव अपने फैसले खुद ले सकेंगे।बता दें कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी ने 75 सीट पाई। तेजस्वी ने बैठक के बाद कहा कि उनका लक्ष्य बिहार को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है। उन्होंने कहा कि हमारे पास बिहार के विकास का विजन और ब्लूप्रिंट है, जिसमें सभी वर्गों का ख्याल रखा जाएगा। सियासी गलियारों में लालू यादव के इस कदम को उनका प्लान माना जा रहा है.
लालू यादव ने ये कदम उस वक्त उठाया है जब नीतीश कुमार के बेटे की राजनीति में एंट्री की ख़बरें सामने आ रही हैं। निशांत के राजनीति में आने की अटकलों ने आरजेडी खेमे में हलचल मचा दी है। आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति को युवा नेतृत्व की जरूरत है। निशांत को सभी गुण विरासत में मिले हैं। हालांकि, आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी कहते हैं कि नीतीश कुमार चाहे जिसे भी लॉन्च करें, तेजस्वी आने वाले दिनों में सत्ता से बेदखल होने तक चैन से नहीं बैठेंगे क्योंकि बिहार की जनता तेजस्वी के नेतृत्व को स्वीकार कर चुकी है और नीतीश कुमार के बेटे को आने में समय लगेगा।
दरअसल, कयास लगाए जा रहे हैं कि सीएम नीतीश कुमार के इकलौते बेटे सक्रिय राजनीति में आ सकते हैं। निशांत कुमार आम तौर पर सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आते हैं। उन्हें बेहद कम अवसरों पर सार्वजनिक तौर पर पिता नीतीश कुमार के साथ देखा गया है। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि 73 वर्षीय नीतीश कुमार ‘पार्टी के अंदर उठ रही मांगों’ पर सहमत हो सकते हैं। इसके बाद निशांत औपचारिक रूप से जदयू में शामिल हो जाएंगे। जदयू के पास दूसरे पंक्ति का नेतृत्व नहीं है, जो सुप्रीमो नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद उनकी जगह ले सके।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार की राजनीति में युवा नेताओं का क्रेज बढ़ रहा है। ऐसे में तेजस्वी यादव जैसे नेता को टक्कर देने के लिए जेडीयू को भी एक युवा चेहरे की जरूरत है। कयास लगाए जा रहे हैं कि निशांत कुमार का राजनीति में आना जेडीयू के लिए फायदेमंद हो साबित हो सकता है। साथ ही अगर नीतीश अपने बेटे निशांत को राजनीति में लाते हैं तो तेजस्वी की राह मुश्किल हो सकती है। एक तरफ जहां नीतीश लालू को टक्कर देंगे वहीं दूसरी ओर तेजस्वी के युवा जोश का जवाब निशांत कुमार के पास हो सकता है। बताते चलें कि तेजस्वी यादव 9वीं फेल हैं, जबकि निशांत ने अपने पिता की तरह इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है, जिसका फायदा उन्हें भी मिलेगा।
हालांकि तेजस्वी काफी समय से राजनीति में एक्टिव हैं, तो उन्हें इसका फायदा भी मिल सकता है।
गौरतलब है कि इस साल के अंत में बिहार विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके चलते एनडीए और इंडिया गठबंधन अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं। बीते चुनाव में एनडीए में जेडीयू 122 तो बीजेपी 121 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। उस चुनाव में जेडीयू ने अपने कोटे में से 7 सीटें HAM को दी थीं तो बीजेपी ने अपनी 9 सीटें मुकेश सहनी की पार्टी VIP को दी थीं। इसके अलावा चिराग पासवान अलग होकर चुनाव लड़े थे। इस बार चिराग और कुशवाहा भी साथ हैं, जबकि सहनी महागठबंधन के साथ हैं।


