Bihar News: बिहार में लगभग हर साल ही मकर संक्रांति पर सियासी समीकरण बनते-बिगड़ते हैं। चुनावी साल में भी बिहार चूड़ा-दही भोज के बहाने पॉलिटिक्स की शुरुआत हो गई है।दरअसल, बुधवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस (Pashupati Kumar Paras) के यहां दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया था। इस भोज में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) से लेकर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) तक को निमंत्रण भेजा गया था। हालांकि, भोज में सीएम नीतीश कुमार तो नहीं पहुंचे लेकिन लालू प्रसाद यादव ने पशुपति कुमार पारस के यहां पहुंचकर कई संकेत दे दिए।
पशुपति पारस के यहां आयोजित दही चूड़ा भोज में लालू प्रसाद यादव अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के साथ पहुंचे थे।बताया जा रहा है कि लालू यादव दही-चूड़ा भोज में लगभग 10 मिनट तक रुके और पशुपति पारस से कई सियासी मुद्दों पर चर्चा भी की।ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि लालू यादव ने पशुपति पारस को महागठबंधन के साथ आने का ग्रीन सिग्नल दे दिया है।बता दें कि पशुपति पारस की पार्टी एनडीए में शामिल है लेकिन पिछली लोकसभा में पांच सांसदों वाली पशुपति पारस की पार्टी को एनडीए ने 2024 के लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं दी थी।ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि एनडीए से नाराज चल पशुपति कुमार पारस लालू यादव से ग्रीन सिग्नल मिलने के साथ ही महागठबंधन से जुड़कर बिहार चुनाव भी लड़ सकते हैं।इस मुलाकात से बिहार की सियासत में माहौल गरमाया हुआ है।
बताते चलें कि बीते लगभग डेढ़-दो साल से पशुपति पारस बिहार की राजनीति से मानों गायब से हो गए थे ऐसे में लालू यादव ने बुधवार को पशुपति पारस के आवास पर चूड़ा-दही के भोज में बेटे तेजप्रताप के साथ पहुंचकर चिराग पासवान को चौंका दिया है।इसके बाद से यह भी चर्चा है कि पशुपति पारस और एलजेपी के पूर्व बाहुबली सांसद सुरजभान सिंह की जोड़ी चिराग पासवान को आगामी विधानसभा चुनाव में सबक सिखाने का प्लान तैयार कर लिया है।वहीं, आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ने पशुपति पारस को महागठबंधन में शामिल कर बिहार के भूमिहार और दलित वोट बैंक को साधने का प्लान बना रहे हैं।बताया जा रहा है कि पशुपति पारस की पार्टी मुंगेर, वैशाली, बेगूसराय, खगड़िया, नावदा, जमुई और हाजीपुर संसदीय सीट की कई विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। वहीं, लालू का प्लान है कि पशुपति अगर साथ में चुनाव लड़े तो सवर्ण और दलित के वोट में बंटवारा नहीं होगा और इससे महागठबंधन को फायेदा होगा।
महागठबंधन की बात करें तो इसमें आरजेडी के साथ कांग्रेस, लेफ्ट, वीआईपी जैसी पार्टियां है लेकिन ये सभी मुस्लिम-यादव यानी माई समीकरण ही है। इनमें से किसी के पास भी दलित वोट पर पकड़ नहीं थी। ऐसे में अब लालू के लिए पशुपति फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इन सबके बीच पशुपति पारस की लालू यादव से मुलाकात के बाद कुछ ऐसे ही संकेत दिए हैं। पशुपति कुमार पारस ने कहा कि लालू यादव हमारे निमंत्रण पर पहुंचे यह बड़ी बात है। हम उनका धन्यवाद करते हैं। उनसे मुलाकात काफी अच्छी रही। इस दौरान सब कुछ शुभ-शुभ रहा। लालू जी से अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा हुई। खरमास खत्म हो गया है। ऐसे में अब सब अच्छा होगा।
जबकि दूसरी ओर लालू यादव भी पशुपति पारस के यहां से मुस्कुराते हुए निकले और कहा कि सब ठीक है। इस दौरान पशुपति पारस के साथ आने पर लालू ने भी हामी भरी। गौरतलब है कि इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं. वहीं, बीते काफी समय से पशुपति कुमार पारस की पूछ एनडीए में नहीं हो रही है। ऐसे में लालू यादव से मुलाकात के बाद पशुपति कुमार पारस जल्द ही कोई फैसला ले सकते हैं। अब देखना है कि चुनावी साल में सियासत की खिचड़ी क्या रंग लाती है।


