Manipur में एक बार फिर से हिंसा भड़क चुकी है। इंफाल घाटी के जिरीबाम जिले में तीन महिलाओं और तीन बच्चों का शव मिला है।
महिला और बच्चों की मौत के बाद इंफाल घाटी के अलग अलग हिस्सों मे हिंसक प्रदर्शन और आगजनी की घटनाएं शुरू हो गई। हिंसा पर काबू पाने के लिए राज्य सरकार ने कर्फ्यू लगा दिया गया है। साथ ही इंटरनेट की सेवा भी बंद कर दी गई है।
आक्रोशित भीड़ ने 3 मंत्री और 6 विधायक के आवास पर किया हमला
Manipur में एक बार फिर हिंसक घटनाएं देखने को मिल रही है। इंफाल के जिरीबाम में महिलाओं और बच्चों के शव मिलने के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। आक्रोशित भीड़ ने राज्य के तीन मंत्रियों और छह विधायकों के आवास पर हमला कर दिया। गुस्साई भीड़ ने मंत्रियों और विधायकों के घरों पर तोड़फोड़ की। प्रदर्शनकारियों ने इंफाल ईस्ट में सीएम बीरेन सिंह के पैतृक निवास पर भी हमला करने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाबलों ने उन्हें रोक दिया।
पुलिस ने 20 आरोपी को किया गिरफ्तार
तोड़फोड़ और आगजनी करने वाली भीड़ में शामिल करीब 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। घटना के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। अमित शाह ने शीर्ष अधिकारियों को मणिपुर में शांति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अमित शाह ने महाराष्ट्र में अपनी जन सभाओं को रद्द कर दिया। सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्री ने शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ मणिपुर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की।
क्या Manipur में गिर जाएगी BJP की सरकार?
Manipur हिंसा पर कांग्रेस तो हमलावर है ही साथ ही राज्य की सियासत में भी हलचल दिखाई दे रही है। राज्य की नेशनल पीपुल्स पार्टी यानी NPP ने बीजेपी सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। NPP ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को चिट्ठी लिखी और कहा कि एन बीरेन सिंह की सरकार राज्य में जातीय हिंसा को रोकने में नाकाम रही है। इस वजह से वे बीजेपी से समर्थन वापस ले रही है।
क्या कहता है विधानसभा का गणित?
NPP के समर्थन वापस लेने के बाद सभी की नजर मणिपुर की एन बीरेन सिंह सरकार पर टिकी हुई है। अब सवाल यह उठता है कि समर्थन वापसी के बाद क्या मणिपुर की बीजेपी सरकार अल्पमत में आ जाएगी? मणिपुर में साल 2022 में विधानसभा चुनाव हुए थे। उस वक्त बीजेपी ने 60 में से 32 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, कांग्रेस को 5 सीट पर जीत मिली थी।
जेडीयू को 6, नागा पीपुल्स फ्रंट को 5 और नेशनल पीपुल्स पार्टी ने 7 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं कुकी पीपुल्स एलायंस ने 2 और 3 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीता थे। दरअसल, 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 31 है और बीजेपी के पास खुद के 32 विधायक हैं। ऐसे में NPP के समर्थन वापस लेने के बाद भी एन बीरेन सिंह की सरकार पर कोई खतरा नजर नहीं आता दिख रहा है।
न तो एक है, न तो सेफ है- मल्लिकार्जुन खड़गे
Manipur हिंसा को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी के ‘एक हैं तो सेफ हैं’ के नारे पर तंज कसा है। खड़गे ने कहा कि बीजेपी के डबल इंजन की सरकार में ‘न तो एक है, न सेफ है।’
कांग्रेस अध्यक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखते हुए कहा कि मई 2023 से मणिपुर में हिंसा हो रही है। जिसकी वजह से राज्य की जनता का भविष्य खराब हो रहा है। खड़गे ने लिखा कि ऐसा लगता है कि जैसे बीजेपी मणिपुर को जानबूझकर जलाना चाहती है। खड़गे ने पोस्ट के जरिए दावा किया कि हिंसा के कारण 7 नवंबर से अब तक 17 लोगों की जान चली गई है।
एन बीरेन सिंह दें इस्तीफा- Congress
NPP के समर्थन वापस लेने के बाद मणिपुर के कांग्रेस अध्यक्ष और वांगखेम से विधायक कीशम मेघचंद्र ने एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने पोस्ट करके कहा कि अगर मणिपुर के लोग राज्य में शांति लाने के लिए नया जनादेश लाना चाहते हैं तो वो कांग्रेस विधायकों के साथ विधायक पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। इस पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश का कहना है कि पहले मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को इस्तीफा देना चाहिए। अब देखना दिलचस्प होगा कि मणिपुर में आगे क्या होता है।


