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    Delhi Election तो है बहाना, Kanhaiya Kumar को बिहार चुनाव है लड़ाना?

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    Kanhaiya Kumar: ‘केजरीवाल जी हमारे साथ लड़ेंगे तो हमारे सहयोगी हैं लेकिन अगर हमारे साथ मिलकर बीजेपी से नहीं लड़ेंगे तो उनको साफ करना होगा कि वह किसके साथ हैं।’ ये बयान है राजनीति को सेंसेशन चेहरा कन्हैया कुमार का। वही कन्हैया कुमार जिसने छात्र संघ की राजनीति में नई आत्मा जगा दी, प्राण फूंक दिए। वहीं कन्हैया कुमार जो लाल सलाम-लाल सलाम के नारों के बीच तिहाड़ जेल जाते हैं। वही कन्हैया कुमार जिनके संघर्षों के स्याही से निकली कहानी आज भी जेएनयू की लाल दीवारों पर छपी हुई हैं। वही कन्हैया कुमार जिनके पहले विधानसभा चुनाव के प्रचार में आधा बॉलीवुड बेगूसराय की मिट्टी पहुंच चुका थी, अजी वही कन्हैया जिनसे पूछा गया कि आपने CPI छोड़कर कांग्रेस का दामन क्यों थामा तो बोले कि क्रिकेट का मैच टेनिस के रैकेट से नहीं खेला जाता। अब दिल्ली चुनाव चुनाल से 10 दिन पहले कन्हैया कि दिल्ली की राजनीति में एंट्री हो गई है। जिसके बाद कांग्रेस और मजबूत होती दिखाई दे रही है। लेकिन सवाल ये है कि दूसरी बार लोकसभा चुनाव हारने के बाद राजनीति से लापता कन्हैया कुमार क्या पूर्वांचलियों के बहाने बाहर आएं हैं। क्या दिल्ली में रहकर बिहार की राजनीति साधने की कोशिश कर रहे हैं कन्हैया कुमार? क्या कन्हैया कुमार लड़ेगे बिहार से चुनाव?

    दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच की रार जो ठनी थी उस ढ़लाई में और सीमेंट भरने का काम दिल्ली में कन्हैया कुमार ने कर दिया है। हालांकि कन्हैया कुमार इस एपीरिएंस से पहले सरापा लापता थे। दूसरी बार लोकसभा चुनाव हारने के बाद शायद आत्ममंथन के ध्येय से कन्हैया ने राजनीतिक दूसरी बना ली थी। सोशल मीडिया से भी नदारद थे। शास्त्रों में जिसे डिजिटल डिटॉक्स कहा गया है। कन्हैया कुमार का आखिरी ट्वीट मई 23 2024 का है।। जिसमें वो इंटरव्यू देते दिखाई दे रहे हैं।इसके बाद से उनका कोई ट्वीट नहीं देखा गया । फेसबुक पर कभी खबार एक आधा पोस्ट दिखाई पड़ जाता है। लेकिन ट्विटर से उनकी दूरी है।कन्हैया कुमार पढ़े लिखे और अच्छे वक्ता हैं। वो ख़ुद बिहार के बेगूसराय से हैं। कन्हैया कुमार को देश का सबसे नापंसदीदा या पंसदीदा छात्र भी माना जाता है। मार्क्सवादी विचारधाराओं के प्ररित कन्हैया अब कांग्रेस की समता, समानता, समाजवादी राजनीति में रम गए है। कन्हैया का चुनाव चिह्न बदला है। लेकिन अंदाज़ वही पुराना है। बीते साल केजरीवाल पर तो हास-परिहास में कह दिया था कि केजरीवाल मेरे तिहाड़ी दोस्त हैं। तिहाड़ में हम और वो दोनों एक ही समय पर बंद थे। बयान खूब वायरल भी हुआ था। अब जब इंडिया गठबंधन में रार ठनी हुई है। पार्टियां अलग-थलह होकर चुनाव लड़ रही हैं। तो कन्हैया ने एंट्री में सीटी बटवान दी। बोल गए कि केजरीवाल जी हमारे साथ लड़ेंगे तो हमारे सहयोगी हैं लेकिन अगर हमारे साथ मिलकर बीजेपी से नहीं लड़ेंगे तो उनको साफ करना होगा कि वह किसके साथ हैं। जाहिर है कि भींगा के बोलने में कन्हैया का सानी नहीं है। बिहार के हैं। वाक्य पटुता में करिश्मा बिहार के राजनेता सतुआ में घोर के पी जाते हैं।

    दिल्ली चुनाव में कन्हैया की एंट्री से भाजपा और कांग्रेस दोनों की परेशानी बढ़ गई। जाहिर है कि कन्हैया को नई नस्ल के लोग मानते हैं। सो कन्हैया की वाइल कार्ड एंट्री से दिल्ली के सियासी फुटबॉल मैदान में सीट रूपी गोल देखा जा सकता है। अपने चिर परिचित अंदाज़ में कन्हैया ने भाजपा पर हमला बोला, बोले कि कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि कांग्रेस और बीजेपी एक नदी का दो किनारा है जो कभी नहीं मिल सकता है। उन्होंने इसी क्रम में कहा कि हम किसी व्यक्ति और दल के खिलाफ नहीं हैं। हम तो विचार के खिलाफ हैं। अगर पीएम नरेंद्र मोदी कब्रिस्तान और श्मशान करना बंद कर दें, कपड़ा देखकर अपराधी पहचानना बंद कर दें तो उनके खिलाफ भी नहीं हैं।

    कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्वांचलियों के मुद्दे पर भी कन्हैया कुमार ने बात की और साथ ही आम आदमी पार्टी को लेकर अपना स्टैंड साफ किया। जब उनसे पूछा गया कि केजरीवाल आरोप लगाते हैं कि कांग्रेस और भाजपा दिल्ली में साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं तो उन्होंने कह दिया कि – हम दोनों दल हम दो ध्रुव हैं। मिल नहीं सकते।

    कन्हैया कुमार ने आगे कहा कि ये पहला मौका नहीं है कि पूर्वांचलियों को गाली के रूप में इस्तेमाल किया गया है। हर चुनाव से पहले होता है और सारी पार्टियों करती हैं। दिल्ली हम सबकी है। दिल्ली देश का दिल है। वो बात और है कि अभी उसका लंग्स खराब है, प्रदूषण बढ़ गया है। इतिहास उठाकर देख लीजिए। यह हमेशा से सबकी रही। यह तो राजधानी है। अगर हम पूर्वांचल की बात कर रहे हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे इलाके की बात नहीं कर रहे हैं। कांग्रेस की घोषणा यानी कांग्रेस का जो कूपन है इसमें सबकी बात हो रही है।

    वहीं, केंद्र पर हमला करते हुए कन्हैया कुमार ने कहा कि दिल्ली चमकने का मतलब यह नहीं है कि केवल प्रधानमंत्री के आवास के आसपास ही चमकाया जाए बल्कि पूर्वी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली, उत्तर पश्चिम दिल्ली, उत्तर पूर्व दिल्ली को सेंट्रल दिल्ली की तरह चमकाया जाए।

    अब भईया कन्हैया तो लगातार नज़र आएंगी दिल्ली चुनाव में, पार्टी की तरफ से आसार तो यही लगाए जा रहे हैं। लेकिन इसके पीछे की इंसाइड स्टोरी क्या है।।।क्या कन्हैया कुमार को पूर्वांचलियों का मन और इमोजन जीतने के लिए उतारा गया है।।।कन्हैया कुमार जो बिहार के नेता के तौर पर मुख्य रूप से जाने जाते हैं वो दिल्ली की सियासत में खुद को आजमाने की कोशिश क्यों कर रहे हैं। पब्लिक तो ये भी कह रही है कि दिल्ली में मनोज तिवारी के खिलाफ चुनाव लड़ने के बजाए कन्हैया अगर बिहार से ही अबकी लोकसभा लड़ते तो शायद जीत भी जाते। तो क्या ये कयास लगाए जा सकते हैं कि कन्हैया को राजनीति में खड़ा करने के लिए कांग्रेस बिहार से उन्हें टिकट सकती है, आने वाले विधानसभा चुनाव में। राजनीति के जानकार कहते हैं कि कन्हैया को बिहार में RJD खड़ा नहीं होने दे रही, क्योंकि अर्जुन और एकलव्य वाला मामला है इधर। लोग कहते हैं कि कन्हैया बिहार में Establish हो गए तो तेजस्वी की राजनीति खा जाएंगे। हालांकि विश्वविद्यलय के बच्चे जो कन्हैया में भविष्य का नेता देखते हैं, वो तो कहते हैं कि लंबी छलांग से पहले तैयारी लगती है कन्हैया बाबू, नहीं तो व्यक्ति खाई में गिर जाता है। पहले विधाईकी लड़िए फिर सांसदी का चुनाव।।।कन्हैया कुमार के लिए मायावती मोटिवेशन का काम कर सकती हैं। वो भी नॉन पॉलिटकिल बैकगाउंड से थीं।।3-3 बार लोकसभा चुनाव हार गईं थी। लेकिन आगे चलकर झंडा गाड़ दिया था। खैर देखना है कि कन्हैया फैक्टर से दिल्ली चुनाव में कांग्रेस को कितना मुनाफा होने वाला है।।।और क्या कन्हैया को दिल्ली चुनाव में रियाज़ कराकर बिहार चुनाव में उतारने की पूरी राजनीति साधने की तईयारी रास्ते में हैं। मामला दिसचस्प है। बिहार भी और दिल्ली भी।

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