Delhi Elections: दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए मतदान बुधवार को ही संपन्न हो चुके हैं और अभी तक जितने भी एग्जिट पोल्स आए हैं उसमें भाजपा को बंपर बहुमत मिलती हुई नज़र आ रही है। इससे दिल्ली की सियासी जमीन पर हलचल मच गई है। खासकर, मिडिल क्लास में इस चुनाव में अहम भूमिका निभा रही हैं। यह सवाल उठ रहा है कि क्या मिडिल क्लास वोटरों ने बीजेपी का साथ दिया और क्या वो फिर से बीजेपी के समर्थन में आ गई हैं? इस बार दिल्ली में आप के वोट बैंक में गड़बड़ नज़र आ रही है, इसके क्या मायने है? क्या मिडिल क्लास ने केजरीवाल को वोट नहीं किया या फिर केंद्रीय बजट में उन्हें मिली 12 लाख रुपये तक की आयकर छूट ने उनका मन पलट दिया और उनका समर्थन भाजपा को चला गया? ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि, दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री ने जो बजट पेश किया, उसमें मिडिल क्लास के लिए कई खास कदम उठाए गए थे। सबसे अहम घोषणा 12 लाख रुपये तक की आयकर छूट थी, जिसे मिडिल क्लास के लिए एक गेम चेंजर माना जा रहा है। इससे सीधे तौर पर उन परिवारों को फायदा हुआ, जो अब तक आयकर में छूट के लिए संघर्ष कर रहे थे। इस छूट को लेकर मिडिल क्लास में सकारात्मक प्रतिक्रिया आई और ये कहीं ना कहीं बीजेपी के लिए भी ये एक हैट्रिक है और जीत का एक मौका।
इसके अलावा, मोदी सरकार ने मिडिल क्लास के लिए कई और योजनाओं की घोषणा की थी, जिनसे आम आदमी को लाभ मिल सकता था। इससे ये संभावना जताई जा रही है कि मिडिल क्लास की महिलाएं और दूसरे वर्ग के लोग बीजेपी के पक्ष में आए होंगे, क्योंकि उनके लिए ये बजट एक तरह से राहत का पैकेज था।।दिल्ली में इस बार महिला मिडिल क्लास वोटर्स का रुख इस बार बेहद अहम हो सकता है। कई चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि मिडिल क्लास की महिला मतदाता इस चुनाव में निर्णायक साबित हो सकती हैं। पिछले कुछ सालों में महिलाओं के लिए सरकार द्वारा की गई योजनाओं और कल्याणकारी उपायों के चलते, बीजेपी के लिए ये एक फायदेमंद स्थिति हो सकती है। बीजेपी ने महिला सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और कई अन्य पहलुओं पर अपनी योजनाएं लागू की हैं, जो महिलाओं के बीच सकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।।।।बीजेपी ने कई योजनाओं के माध्यम से मिडिल क्लास को लाभ पहुंचाने की कोशिश की है, जैसे जनधन योजना, पीएम आवास योजना, और कई वित्तीय योजनाएं। इसके साथ ही महिलाओं के लिए अलग-अलग योजनाओं की घोषणा ने भी मिडिल क्लास महिलाओं को बीजेपी की ओर खींचा है।
हालांकि, दिल्ली के पिछले विधानसभा चुनावों में महिलाओं ने आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ समर्थन दिखाया था। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने महिलाओं के लिए कई घोषणाएँ की थीं, जैसे कि मुफ्त बस यात्रा, शिक्षा में सुधार, और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में वृद्धि। इन फैसलों ने महिलाओं के बीच एक सकारात्मक माहौल पैदा किया था।।। लेकिन इस बार बीजेपी के कदमों और बजट में किए गए बदलावों ने महिलाओं को और मिडिल क्लास को आकर्षित किया है।।।।दिल्ली में इस बार मतदान एक दिलचस्प सवाल खड़ा करता है।।कि क्या ये अब जनता बदलाव चाहती है? कई राजनीतिक विश्लेषक इसे लेकर दो राय रखते हैं।।। पारंपरिक तौर पर ये माना जाता है कि जब मतदान प्रतिशत बढ़ता है, तो इसका मतलब सत्ता के खिलाफ एक आंदोलन है, लेकिन पिछले चुनावों में ये बात सही नहीं साबित हुई थी। इस बार क्या हो सकता है, ये कहना भी मुश्किल है।
मिडिल क्लास ने बीजेपी का साथ दिया लेकिन केजरीवाल का साथ आखिर क्यों छोड़ा इसपर भी एक सवालिया निशान है।पिछले कुछ चुनावों में, मिडिल क्लास ने केजरीवाल को सपोर्ट किया था, क्योंकि उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, और अन्य बुनियादी सेवाओं में सुधार करने का वादा किया था। इसके अलावा, केजरीवाल की लोकप्रियता खासतौर पर दिल्ली के गरीब वर्ग और मिडिल क्लास के बीच थी। लेकिन इस बार, मिडिल क्लास के वोटरों का बीजेपी की तरफ झुकाव देखा जा सकता है, और इसका सबसे बड़ा कारण केंद्रीय बजट है।
अब बात करें अगर 2020 के विधानसभा चुनावों की तो 2020 के चुनावों में मिडिल क्लास ने आम आदमी पार्टी (AAP) का साथ दिया था। अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया और विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड बहुमत हासिल किया। आम आदमी पार्टी ने मिडिल क्लास के लिए कई ऐसे मुद्दे उठाए थे, जो सीधे उनके जीवन से जुड़े थे। इन मुद्दों ने दिल्ली के मिडिल क्लास वोटर्स को आकर्षित किया और उनका समर्थन आम आदमी पार्टी को मिला।।।।आम आदमी पार्टी ने 2020 के चुनावों में मिडिल क्लास को ध्यान में रखते हुए कई वादे किए थे। सबसे पहले, पार्टी ने दिल्ली में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने का वादा किया था। दिल्ली सरकार ने पहले ही कई स्कूलों और अस्पतालों को सुधारने का काम शुरू किया था, और केजरीवाल सरकार ने इसे जारी रखने की बात की थी। मिडिल क्लास परिवारों के लिए ये योजनाएं अहम थीं, क्योंकि वे अक्सर बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की तलाश में रहते हैं। इसके अलावा, केजरीवाल सरकार ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, पानी का मुफ्त कनेक्शन, और बिजली बिलों में छूट जैसी योजनाएं भी दी थीं। इन योजनाओं से मिडिल क्लास परिवारों को आर्थिक राहत मिली थी, और इस वजह से वे आम आदमी पार्टी के साथ खड़े हुए थे।
दिल्ली चुनावों में बीजेपी ने भी मिडिल क्लास के वोटर्स को लुभाने के लिए कई वादे किए थे। बीजेपी ने दावा किया था कि उनकी सरकार मिडिल क्लास के हितों को ध्यान में रखते हुए काम करेगी और दिल्ली को और ज्यादा विकसित बनाएगी। लेकिन 2020 के चुनाव में बीजेपी के इन वादों का ज्यादा असर मिडिल क्लास पर नहीं पड़ा। बीजेपी ने ज्यादा जोर केंद्रीय योजनाओं और सुरक्षा पर दिया, लेकिन दिल्ली के स्थानीय मुद्दों पर उनका फोकस कम नजर आया।
इसके बावजूद, बीजेपी को मिडिल क्लास वोटरों का एक हिस्सा समर्थन देता रहा। खासकर वो लोग जो मोदी सरकार की केंद्रीय योजनाओं से खुश थे, जैसे कि जनधन योजना, पीएम आवास योजना, और मुद्रा योजना। इसके अलावा, दिल्ली में सुरक्षा के मुद्दे को लेकर बीजेपी ने मिडिल क्लास वोटरों को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की थी, लेकिन ये मुद्दा आम आदमी पार्टी के मुकाबले ज्यादा असरदार साबित नहीं हुआ।


