Delhi Elections: देश की सबसे पुरानी पार्टी इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक बार फिर बीजेपी (BJP) और अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को कांटे की टक्कर देती दिख रही है। मैदान में तीन बड़ी पार्टी आमने सामने है। आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) , बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) …कांग्रेस के अलग रास्ते पर चलने से यह चुनाव तीन-तरफा हो गया है। वहीं, इस बार के चुनाव में मजबूत होती कांग्रेस को देख जहां केजरीवाल की टेंशन बढ़ गई है। वहीं, बीजेपी के लिए अच्छी खबर है। दरअसल, ताजा सर्वे बता रहे हैं कि इस बार दिल्ली चुनाव में कांग्रेस बढ़त बना सकती हैं। ऐसे में इसका फायदा बीजेपी को मिलता दिख रहा है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव अब कुछ ही दिन दूर है, और सियासी मैदान में मची हलचल से ये तय हो गया है कि यह चुनाव कुछ अलग और दिलचस्प होगा। भले ही आप और कांग्रेस ने दिल्ली में 2024 के लोकसभा चुनाव एक साथ लड़े थे। लेकिन इसके बाद से दोनों की राहें एकदम अलग हो गईं है। ऐसे में अगर कांग्रेस अपने वोट शेयर में इजाफा करती है तो इससे बीजेपी को फायदा हो सकता है। क्योंकि दिल्ली के मुख्य वोट बैंक में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग, पूर्वांचली, मुस्लिम और अनधिकृत कॉलोनियों के में अभी केजरीवाल को लेकर नाराजगी है। जिसका सीधा फायदा कांग्रेस और बीजेपी को मिल सकता है।
कहीं न इस बात का अंदाजा आम आदमी पार्टी को भी लग चुका है। तभी आप अरविंद केजरीवाल ने इस पुरानी पार्टी पर बीजेपी के साथ ‘सीक्रेट तालमेल’ का आरोप लगाया है। कहीं न कहीं अरविंद केजरीवाल का ये डर ठीक भी है। दरअसल दिल्ली में जब आम आदमी पार्टी का उदय हुआ था, तो कांग्रेस की हालत बहुत ही खराब हो गई थी। 2013 में AAP ने दिल्ली में अपनी धाक जमाई और 28 सीटें जीत लीं, जबकि कांग्रेस 43 सीटों से घटकर सिर्फ 8 सीटों तक ही सिमट कर रह गई। इसका सीधा मतलब था कि कांग्रेस के वोटर्स का मोह भंग होना।
इसका नतीजा ये हुआ कि कांग्रेस के वोटर्स का झुकाव आप की तरफ बढ़ने लगा। नतीजा…केजरीवाल की सरकार बन गई। फिर 2015 में भी यही हुआ, कांग्रेस का वोट शेयर गिरता चला गया और AAP का वोट शेयर बढ़ता गया।।हालांकि, इस दौरान बीजेपी का वोट शेयर स्थिर रहा। 2020 में तो कांग्रेस का वोट शेयर घटकर सिर्फ 4।26% तक रह गया, जबकि AAP का वोट शेयर लगभग स्थिर रहा। ऐसे में कांग्रेस के वोट शेयर में बढ़ोतरी से उसकी सीटों में भले ही ज्यादा इजाफा न हो, लेकिन इससे AAP को नुकसान हो सकता है। आपको बता दें कि आप के पास अभी 62 सीटें हैं। बीजेपी के पास सिर्फ 8 सीटें हैं, इसलिए उसे फायदा हो सकता है। हालांकि, कांग्रेस सच में बीजेपी को फायदा पहुंचाएगी या नहीं इस बात का पता तो 8 फरवरी को ही चलेगा।


