Delhi Elections: दिल्ली विधानसभा के लिए चुनाव के लिए प्रचार-प्रसार बंद हो गया है। पांच फरवरी को दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों के लिए वोटिंग होनी है। ऐसे में इस बार के चुनाव में लगभग सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंकी है। लेकिन आज हम बात करेंगे दिल्ली के उस 35 प्रतिशत भागीदारी की, जो राजनीतिक समीकरणों की वजह से महत्वपूर्ण बन गई हैं। दिल्ली में पूर्वांचल से आए लोगों की तादाद पहले से काफी बढ़ रही है।ये दिल्ली की कई सीटों के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित भी करते हैं।
बता दें कि पूर्वांचली वोटर्स यानी, वो वोटर्स जो मूल रूप से पूर्वी यूपी और बिहार से हैं। पिछले एक दशक से इन वोटर्स का साथ विधानसभा के चुनावों में बड़ी संख्या के साथ आप पार्टी को मिल रहा है। वहीं लोकसभा के समय इनका बड़ा समर्थन बीजेपी को हासिल होता रहा है। सियासी पार्टियों से संबंधित डेटा के मुताबिक दिल्ली में पूर्वांचली मतदाताओं की संख्या कुल मतदाताओं का लगभग 25 से 30% है। इनकी ताकत सबसे ज्यादा दिल्ली के पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों में है। वहां की कुछ सीटों में तो इनकी तादाद 35% से भी अधिक कही जा रही है। पूर्वांचल के लोग दिल्ली में राजनीतिक रूप से एक बड़ा वोट बैंक बनाते हैं। इनकी एकजुटता कई बार चुनावों के नतीजे को पलट देती है।
पूर्वांचली मतदाताओं की बात करें तो इसकी सबसी बड़ी संख्या त्रिलोकपुरी सीट पर बताई जाती है। जहां ये 35% से ज्यादा संख्या के साथ मौजूद हैं। इसके बाद नांगलोई जाट सीट पर ये करीब 30% आबादी के साथ मौजूद हैं। लक्ष्मीनगर सीट पर ये करीब 30% हैं। उत्तम नगर सीट पर इनकी संख्या लगभग 30% के साथ मौजूद है। वहीं किराड़ी सीट पर भी ये लगभग 30% के साथ उपस्थित हैं। घोंडा सीट पर ये लगभग 29% संख्या के साथ मौजूद हैं। वहीं कृष्णानगर सीट पर ये लगभग 29% के संख्याबल के साथ हैं। विकासपुरी सीट पर इनकी संख्या 28% मौजूद है। बुराड़ी में 27% आबादी के साथ उपस्थित हैं। वहीं बादली में 26% आबादी इनकी है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 की बात करे तो पूर्वांचली प्रभाव वाली सभी 16 सीटों पर 64 प्रतिशत वोट आम आदमी पार्टी को मिले थे। वहीं बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिला था, जबकि वोट बीजेपी को 29 फीसदी वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस का 4 प्रतिशत वोट मिले थे। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 की बात करें तो दिल्ली में 16 में 14 सीटें और 54.62 प्रतिशत वोट आप को मिले थे। बीजेपी के खाते में 2 सीट गई थी और उनका वोट प्रतिशत 39.09 फीसदी था। वहीं कांग्रेस को सिर्फ 2.44 फीसदी वोट मिले थे।
वहीं, अगर इस बार के चुनाव में पूर्वांचली वोटर की बात करें तो ये कहना काफी मुश्किल है कि उनका रुख किस तरफ है। यूं तो दिल्ली में बात करें तो आप की जड़ें मजबूत हैं और दिल्ली सरकार की नीतियों को लेकर AAP ने एक बड़ा आधार तैयार किया है। पार्टी ने अपने कार्यकाल में दिल्ली के विभिन्न मुद्दों पर काम किया है, जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और सुरक्षा, जो दिल्ली के मतदाताओं को आकर्षित करते हैं। खासतौर पर, AAP ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ा सुधार किया है, जो पूर्वांचलियों के लिए भी एक अहम मुद्दा बन सकता है। लेकिन प्रदूषण, टूटी सड़कें और भ्रष्टाचार का मुद्दा आप पर भारी भी पड़ सकता है।
जबकि दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी दिल्ली में हमेशा से एक मजबूत राजनीतिक दल रही है। बीजेपी के पास केंद्र सरकार की ताकत है और मोदी सरकार की योजनाओं का भी दिल्ली में असर देखा जा सकता है। बीजेपी ने हमेशा ही राष्ट्रीय सुरक्षा, हिन्दू पहचान, और विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दी है। इन मुद्दों को लेकर बीजेपी ने पूर्वांचली मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश की है। बीजेपी ने हिन्दू पहचान को महत्व दिया है, और यह संदेश दिल्ली में रहने वाले पूर्वांचली समुदाय के एक हिस्से को खासतौर पर आकर्षित कर सकता है। ऐसे में अब सच में पूर्वांचली वोटर के दिल में क्या है? इस बात का पता तप आठ फरवरी को चुनावी नतीजों के बाद ही साफ होगा।


