Delhi Elections: इस बार के दिल्ली चुनावों में कांग्रेस एक अलग ही संघर्ष करती हुई नजर आ रही है। और अब एक मोड़ पर आकर खड़ी हो गई है। इस बार कांग्रेस पार्टी ने अकेले ही दिल्ली में 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया। पहले कांग्रेस के आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की चर्चा थी, लेकिन बाद में ये गठबंधन नहीं हो पाया। और फिर केजरीवाल और राहुल गांधी के रिश्ते में फूट दिखनी शुरू हो गई। इस बात को लेकर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अजय माकन ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि कैसे कांग्रेस ने महागठबंधन के दलों से गठबंधन के लिए बातचीत की थी, लेकिन आखिर में इन बातों का कोई परिणाम नहीं निकला। माकन ने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में कांग्रेस को धोखा दिया और पीठ में छुरा घोंपने का काम किया। जिसके बाद से इंडिया गठबंधन ने भी राहुल गांधी का साथ नहीं दिया।आखिर क्या वजह है कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के बीच के कलह की और अनबन की वो आपको बताएंगे।
कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के कई दलों जैसे समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस , और RJD ने इस बार दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी का समर्थन किया है। हालांकि, कांग्रेस पार्टी का मानना है कि उन्हें इस चुनाव में अकेला छोड़ दिया गया है, जबकि वो गठबंधन के लिए पहले ही कई बार इन दलों से बातचीत कर चुके थे। अजय माकन ने एक इंटरव्यू में साफ तौर पर कहा कि कांग्रेस ने महागठबंधन के सभी दलों से संपर्क किया था और उनसे आग्रह किया था कि वो गठबंधन में शामिल हों, लेकिन इन दलों ने कांग्रेस की बात नहीं मानी और उन्होंने अपनी स्थिति बदलते हुए आम आदमी पार्टी का समर्थन किया कांग्रेस का ये मानना था कि यदि इंडिया गठबंधन के दल कांग्रेस का साथ देते, तो दिल्ली में बीजेपी को हराना आसान हो सकता था।। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और अब कांग्रेस को अकेले ही चुनावी मैदान में उतरना पड़ा है।
दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच पहले भी कई बार टकराव हुआ है, और इस बार भी गठबंधन की बात नहीं बन सकी। कांग्रेस ने न केवल इंडिया गठबंधन के दलों से, बल्कि आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल से भी गठबंधन के लिए संपर्क किया था लेकिन आम आदमी पार्टी के रवैये से ऐसा देखकर लगा जैसे वो कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं करना चाहती।।। इसके बाद केजरीवाल ने हरियाणा में कांग्रेस से बात की थी, लेकिन उन्होंने कांग्रेस की प्रस्तावित सीटों को ठुकरा दिया और अपनी मांग बढ़ाकर 6 सीटों की कर दी। जब कांग्रेस ने कहा कि हम अपने स्थानीय नेताओं से बात करना चाहते हैं, तो उसके अगले दिन केजरीवाल ने हरियाणा में 90 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।
अजय माकन के अनुसार, AAP के इस रवैये से ये साफ हो गया कि आम आदमी पार्टी स्वार्थी है। केवल अपने बारे में सोचती है। उसे कोई गठबंधन की आवश्यकता नहीं है। माकन ने ये भी कहा कि आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के साथ विश्वासघात किया है और इसे पीठ में छुरा घोंपने जैसा कार्य माना है। इससे कांग्रेस पार्टी के भीतर ये विचार और मजबूत हुआ कि अगर उन्हें दिल्ली में अपनी पहचान बनाए रखनी है, तो उन्हें अकेले ही चुनाव लड़ना होगा। माकन ने ये भी कहा कि राहुल गांधी का नेतृत्व हमेशा से सहयोगात्मक और समावेशी रहा है, लेकिन जब तक अन्य पार्टियां ये नहीं समझेंगी कि अकेले किसी पार्टी के लिए चुनाव लड़ना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, तब तक उन्हें सही समर्थन नहीं मिल सकता। दिल्ली चुनाव में केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को जो भारी समर्थन मिल रहा है, उसके पीछे कई कारण हैं। पहले तो, आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में अपनी सरकार के दौरान कई योजनाओं का सफलतापूर्वक कार्यान्वयन किया है, जैसे मुफ्त बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं। इन योजनाओं ने दिल्ली की जनता के बीच आम आदमी पार्टी को एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया है। इसके अलावा, केजरीवाल की छवि एक भ्रष्टाचार विरोधी नेता के रूप में उभरी है, जो सीधे जनता से जुड़ा हुआ है और उन्हें हर प्रकार की मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है।
दिल्ली की जनता को ये एहसास हुआ है कि केजरीवाल ने राज्य में उनकी मूलभूत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए काम किया है। इसी वजह से दिल्ली में आम आदमी पार्टी का समर्थन लगातार बढ़ रहा है, और कांग्रेस के लिए ये स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है। कांग्रेस के लिए ये समय है कि वो अपनी रणनीतियों में बदलाव लाए और जनता को ये समझाए कि वे ही दिल्ली की बेहतर भविष्य की कुंजी हो सकती है।दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में कांग्रेस का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला न केवल पार्टी के भीतर की राजनीति का हिस्सा है, बल्कि ये भारत की राष्ट्रीय राजनीति में भी एक बड़ा संकेत है। कांग्रेस का ये कदम ये दिखाता है कि पार्टी अपने अस्तित्व को बचाने और जनादेश प्राप्त करने के लिए अपनी रणनीतियों में बदलाव कर रही है। अजय माकन के बयान से ये साफ हो जाता है कि कांग्रेस ने कई प्रयास किए थे, लेकिन इंडिया गठबंधन के दलों और आम आदमी पार्टी ने उनका समर्थन नहीं किया। अब कांग्रेस को दिल्ली में अकेले ही अपने भविष्य को आकार देना होगा, जबकि आम आदमी पार्टी की स्थिति मजबूत हो रही है।


