More
    HomeNationalDelhi Elections: में मुस्लिम बहुल इलाकों में Kejriwal ने क्यों बनाए रखी...

    Delhi Elections: में मुस्लिम बहुल इलाकों में Kejriwal ने क्यों बनाए रखी दूरी?

    Published on

    spot_img

    Delhi Elections: चुनाव आयोग के डाटा के अनुसार दिल्ली में कुल 13 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। दिल्ली के कुल 70 सीटों में से 8 सीटें मुस्लिम बहुल मानी जाती है। इस बार यानी साल 2025 का दिल्ली विधानसभा चुनाव कई मायनों में अलग और अनोखी मानी जा रही है। जिसमें एक आंकड़ा ये भी है कि मुस्लिम बहुल इलाके जहां पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को जीत मिली, वहां से केजरीवाल ने इस बार दूरी क्यों बना ली है!!! क्या दिल्ली में ओवैसी के उतरने से केजरीवाल ने बनाई है दूरी, क्या इस बार सत्ता विरोधी लहर में कांग्रेस की मुस्लिम बहुल सीटों पर मजबूत पकड़ है केजरीवाल की दूरी का कारण, समझेंगे सब लेकिन उससे पहले आप द हिन्दी टॉप को सब्सक्राइब करके बेल आइकन दबाना ना भूलें ताकि आप तक पहुंचे हर खबर सबसे पहले –

    दिल्ली में सियासी हैट्रिक लगाने की पुरज़ोर कोशिश करती हुई आम आदमी पार्टी और पार्टी सुप्रिमो ने हर सीट पर प्रचार किया, मगर मुस्लिम बहुल इलाकों की सीटों से केजरीवाल की दूरी इस चुनाव में साफ दिखी। दिल्ली की किसी मुस्लिम सीट पर केजरीवाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं उतरे, जहां से आम आदमी पार्टी के मुस्लिम कैंडिडेट किस्मत आजमा रहे हैं। बताते चलें कि दिल्ली की 70 में से 5 ऐसी सीट्स हैं जिनपर आम आदमी पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। 2015 और 2020 के चुनाव में दिल्ली की सभी मुस्लिम बहुल सीटें आम आदमी पार्टी जीतने में कामयाब रही है। इसके बावजूद केजरीवाल मुस्लिम बहुल सीट पर पिछली बार की तरह ही इस बार भी चुनाव प्रचार के लिए नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर क्या वजह है कि मुस्लिम इलाकों से केजरीवाल ने दूरी बनाए रखी।

    दिल्ली की कुल 70 में से 8 विधानसभा सीटें मुस्लिम बहुल माना जाती हैं. केजरीवाल बिग्रेड ने दिल्ली की बल्लीमारान, सीलमपुर, ओखला, मुस्तफाबाद और मटिया महल सीट पर मुस्लिम कैंडिडेट उतारे हैं। इन सीटों पर 45 से 60 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। दिल्ली चुनाव में 3 सीटों पर आम आदमी पार्टी की कांग्रेस से सीधी टक्कर मानी जा रही है, वहीं मुस्तफाबाद और ओखला सीट पर AIMIM के चलते त्रिकोणीय मुकाबला बन गया है। जिसके बाद दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाकों में कांटे की टक्कर देखी जा रही है। अब ज़रा ये समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर केजरीवाल ने किन कारणों से मुस्लिम बहुत सीटों से इस चुनाव में दूरी बरती है। साल 2020 , जब CAA NRC का प्रोटेस्ट हुआ। आम आदमी पार्टी की ओर से शाहीन बाग आंदोलन और मुसलमानों पर सवाल किए गए। आपत्तिजनक टिप्पणी भी की गई थी। साल 2020 में आम आदमी पार्टी विधानसभा चुनाव तो जीत गई। लेकिन ठीक 2 साल बाद यानी साल 2022 में MCD चुनाव में मुस्लिम बहुल इलाकों में आम आदमी पार्टी का वोटिंग परसेंट काफी गिर गया था।

    अबकी साल 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुस्लिम बहुल इलाके में तब्लीगी जमात के मरकज और दिल्ली दंगे के मुद्दे गंभीर रूप से उठ कर सामने आ रहे हैं। कांग्रेस और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठा रही है। और गरम लोहे पर चोट करने की पूरी कोशिश कर रही है। मुस्लिम बहुल इलाकों में कांग्रेस ने भी मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। सत्ता विरोधी लहर में मुस्लिमों का भरोसा कांग्रेस पर शिफ्ट होता दिख रहा है। AIMIM ने भी ओखला और मुस्तफाबाद इन दो सीटों से मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। ओखला से शिफा उर रहमान और मुस्तफाबाद से ताहिर हुसैन AIMIM की ओर से दिल्ली के सियासी मैदान में मोर्चा संभाल रहे हैं। जिनकी वजह से भी केजरीवाल का मुस्लिम वोट खिसकता दिख रहा है।
    कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के पांचों मुस्लिम उम्मीदवार आमने-सामने चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि बीजेपी की बात करें तो इस बार भाजपा ने किसी भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया। दिल्ली की 5 सीटों पर मुस्लिम बनाम मुस्लिम की लड़ाई है। ऐसे में मुस्लिम मतदाता किसी एक दल के पक्ष में एकतरफा वोटिंग वाली परंपरा से इस बार दूर दिख रहा है। जिसका फायदा कहीं ना कहीं भाजपा को भी दिख सकता है। दिल्ली के राजीतिक जानकार बता रहे हैं कि कांग्रेस और ओवैसी की घेराबंदी के बाद भी केजरीवाल मुस्लिम इलाके में खुद नहीं उतरे हैं, जिसके चलते मुस्लिम बहुल सीटें जीतने के लिए आम आदमी पार्टी के नेताओं को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही। मुस्लिम बहुल सीटों पर केजरीवाल की दूरी बनाए जाने के चलते आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों को राज्यसभा सांसद संजय सिंह की रैलियों से संतोष करना पड़ा है। इसके अलावा अखिलेश यादव को अपने साथ रैलियों में लाकर केजरीवाल ने मुस्लिम वोटों पर चोट करने को कोशिश की।

    ज़मीनी हक़ीक़त की बात करें तो दिल्ली के मुसलमान दिल्ली दंगों के दौरान आम आदमी पार्टी के रवैये और उसके बाद की बदलती राजनीतिक विचारधारा के साथ-साथ कोरोना के दौर में तब्लीगी जमात पर आम आदमी पार्टी के रवैया, सोच और भाषा से से मुस्लिम मतदाता केजरीवाल से नाराज दिख रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि अबकी दिल्ली चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं का रूझान ओवैसी के उम्मीदवार और साथ ही साथ कांग्रेस द्वारा उतारे गए मुस्लिम कैंडिडेंट्स की तरफ़ झुकता नज़र आ रहा है। केजरीवाल अगर मुस्लिम बहुल इलाकों से प्रचार करने उतरते तो उनके खिलाफ की रैली की हवा सकती थी। इसलिए सेफ खेलते हुए आम आदमी पार्टी ने संजय सिंह को और जम्मू-कश्मीर के डोडा से पार्टी विधायक मेहराज मलिक को चुनावी प्रचार में लगा रखा है। गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह हिंदू-मुस्लिम एकता पर अकसर बात करते हैं। ऐसे में मुस्लिम इलाकों में संजय सिंह का होना पार्टी के लिए किफायती माना जा रहा था। संजय सिंह ने दिल्ली के सीलमपुर से लेकर मुस्तफाबाद और बाबरपुर जैसी सीटों पर प्रचार किया।
    दिल्ली में तमाम बयानों के बीच केजरीवाल का एक बयान ये भी सामने आया था कि कांग्रेस को वोट देने का फायदा सीधे बीजेपी को होगा। यह संदेश कहीं न कहीं मुस्लिम समुदाय से जोड़ कर देखा जा रहा था। दिल्ली में मुस्लिम मतदाताओं का विश्वास जीतने के लिए केजरीवाल ने इंडिया गठबंधन से कई नेताओं को भी रैलियां में उतारा हैं। अखिलेश यादव के साथ किराड़ी सीट पर केजरीवाल ने रोड शो किया था। साथ-साथ सपा के तमाम मुस्लिम नेता आम आदमी पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करते नजर आ रहे हैं। जिससे ये कयास सामने आए कि केजरीवाल मुस्लिम बहुल सीटों पर उन नेताओं की ओट में रैली कर जनता से मुखातिब हुए जिन नेताओं की पकड़ मुस्लिमों के बीच अच्छी है।

    बहरहाल मतदान 5 फरवरी को है और 8 को परिणाम, जिसके बाद साफ हो जाएगा कि दिल्ली के तमाम वोटर्स के के साथ-साथ मुस्लिम मतदाताओं का वोट किस पार्टी और उम्म्दीवार के हिस्से आता है।

    Latest articles

    ईरान ने भारत के लिए खास संदेश दिया है जब भारत का 7वां LPG टैंकर सुरक्षित रूप से Strait of Hormuz पार

    ईरान ने भारत के लिए खास संदेश दिया है जब भारत का 7वां एलपीजी...

    US–Israel–Iran War Live: 2 हफ्ते का सीज़फायर, ‘गोल्डन एज’ की बात—इस्लामाबाद में वार्ता तय

    US–Israel–Iran War Updates: Donald Trump ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि अमेरिका...

    US-Israel-Iran War पर बड़ी अपडेट: 5 घंटों में बदला घटनाक्रम, युद्धविराम की ओर कदम

    US-Israel-Iran War: अमेरिका और ईरान युद्ध को लेकर 4 जरूरी बयान आए. इसकी पूरी...

    नालंदा घटना पर भड़कीं Dr. Kanchana Yadav, कहा—“यह सिर्फ एक घटना नहीं, व्यवस्था की सड़ांध”

    राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की राष्ट्रीय प्रवक्ता Dr. Kanchana Yadav ने बिहार के नालंदा...

    More like this

    ईरान ने भारत के लिए खास संदेश दिया है जब भारत का 7वां LPG टैंकर सुरक्षित रूप से Strait of Hormuz पार

    ईरान ने भारत के लिए खास संदेश दिया है जब भारत का 7वां एलपीजी...

    US–Israel–Iran War Live: 2 हफ्ते का सीज़फायर, ‘गोल्डन एज’ की बात—इस्लामाबाद में वार्ता तय

    US–Israel–Iran War Updates: Donald Trump ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि अमेरिका...

    US-Israel-Iran War पर बड़ी अपडेट: 5 घंटों में बदला घटनाक्रम, युद्धविराम की ओर कदम

    US-Israel-Iran War: अमेरिका और ईरान युद्ध को लेकर 4 जरूरी बयान आए. इसकी पूरी...