Fact Check: भारत में ऑनलाइन फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे में लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की साइबर अपराध इकाई ने नागरिकों को अगाह किया है कि एक ईमेल के जरिए सरकारी कार्यालय से लोगों को संदिग्ध ई-नोटिस मिल रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि किसी भी ईमेल को जांच परख कर ही जवाब दें।
मंत्रालय ने बताया कि ईमेल में नामित अधिकारी के नाम को प्रमाणित करने के लिए इंटरनेट पर जांच जरूर करें। साथ ही जिस विभाग के नाम से ईमेल आया है उस विभाग में फोन करके पता करना चाहिए। अगर नागरिक ये दोनों काम करते है तो पता चल जाएगा कि ईमेल फर्जी है या नहीं।
I4C ने भी किया लोगों को अगाह
फर्जी ईमेल को लेकर भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने भी लोगों को अगाह किया है। I4C ने एक सार्वजनिक विज्ञापन में कहा कि सरकारी ई-नोटिस की आड़ में भेजे गए “फर्जी ईमेल” से सावधान रहना चाहिए। विज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यह एक धोखाधड़ी हो सकती है जो लोगों को “साइबर धोखाधड़ी का शिकार” बना सकती है। I4C ने ऐसे फर्जी ईमेल को चेक करने का उपाय बताया है।
सरकार ने लोगों से अनुरोध किया है कि जांचे कि क्या ईमेल किसी प्रामाणिक सरकारी वेबसाइट से आया है। आपको बता दें कि कोई भी सरकारी वेबसाइट “gov.in” पर समाप्त होती है। ईमेल में नामित अधिकारियों के संबंध में दी गई जानकारी को इंटरनेट पर जांच करें। साथ ही प्राप्त ईमेल को सत्यापित करने के लिए विभाग को जरूर कॉल करें।
दिल्ली साइबर सेल ने भी जारी किया निर्देश
इस महीने की शुरुआत में दिल्ली साइबर सेल ने भी ईमेल उपयोगकर्ताओं को दिल्ली पुलिस साइबर अपराध और आर्थिक अपराध, केंद्रीय आर्थिक खुफिया ब्यूरो (सीईआईबी), इंटेलिजेंस ब्यूरो के नाम, हस्ताक्षर, टिकट से धोखाधड़ी करने वाले ईमेल के बारे में सचेत करते हुए एक सार्वजनिक सलाह जारी की थी। दिल्ली पुलिस ने बताया था कि एक ईमेल में बाल पोर्नोग्राफी, पीडोफिलिया, साइबर पोर्नोग्राफी, यौन रूप से स्पष्ट प्रदर्शन आदि के आरोप लगाए गए थे।
फर्जी ईमेल का नहीं दें जवाब- दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस ने बताया था कि धोखेबाज अटैचमेंट के साथ ऐसे फर्जी ई-मेल भेजने के लिए अलग-अलग ईमेल पते का उपयोग करते हैं। ऐसे किसी भी ईमेल को धोखाधड़ी के प्रयास के बारे में पता होना चाहिए। दिल्ली पुलिस ने आम जनता को सूचित किया था कि ऐसे किसी भी ईमेल का जवाब नहीं देना चाहिए। ऐसे मामलों की सूचना जल्द से जल्द निकटतम पुलिस स्टेशन/साइबर पुलिस स्टेशन को दी जानी चाहिए।


