झारखंड विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन की शानदार जीत हुई है। चुनाव जीतने के बाद से ही झारखंड में नई सरकार बनने की कवायद शुरू हो गई थी। आज Hemant Soren ने CM पद की शपथ ली है।
जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष Hemant Soren ने आज यानी 28 नवंबर को झारखंड के 14वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। राज्यपाल संतोष गंगवार ने Hemant Soren को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित किया गया था।
Hemant Soren चौथी बार बने झारखंड के मुख्यमंत्री
Hemant Soren चौथी बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने हैं। सीएम के साथ किसी मंत्री ने शपथ नहीं ली है। Hemant Soren के शपथ ग्रहण में उनके पिता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन भी मौजूद थे। शपथ ग्रहण समारोह में इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने भी पहुंच कर शक्ति प्रदर्शन किया। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी मौजूद थे।
इंडिया गठबंधन जीती थी 56 सीटें
आपको बता दें कि झारखंड विधानसभा चुनाव में जेएमएम, कांग्रेस, आरजेडी और लेफ्ट के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ी थी। झारखंड में 81 विधानसभा सीटों पर चुनाव हुआ था। इंडिया गठबंधन ने 56 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। झारखंड में सरकार बनाने के लिए 41 का जादुई आंकड़ा पार करना होता है।
शिबू सोरेन ने राजनीति में आने के लिए किया प्रेरित
आपको बता दें कि हेमंत सोरेन का जन्म 10 अगस्त 1975 को झारखंड के रामगढ़ जिले के नेमारा गांव में हुआ था। हेमंत सोरेन का पालन-पोषण झारखंड के ग्रामीण परिवेश में हुआ है। वे एक आदिवासी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। हेमंत सोरेन की प्रारंभिक शिक्षा संयुक्त बिहार की राजधानी पटना के एक स्कूल से हुई थी।
इसके बाद उन्होंने रांची में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की। पढ़ाई के दौरान ही वे छात्र राजनीति में आ गए। हेमंत सोरेन का राजनीति में आने का मुख्य कारण उनके पिता शिबू सोरेन थे। दरअसल शिबू सोरेन ने हमेशा झारखंड के आदिवासी लोगों के हक के लिए संघर्ष किया और उन्होंने ही हेमंत को इस रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया।
2009 में रखा चुनावी राजनीति में कदम
हेमंत सोरेन ने साल 2009 में चुनावी राजनीति में कदम रखा। हेमंत सोरेन ने झारखंड विधानसभा चुनाव में बरहेट सीट से अपना पहला चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद वह झारखंड विधानसभा के सदस्य बने और आदिवासी समुदाय के मुद्दों को अपनी प्राथमिकता बनाई। आपको बता दें कि हेमंत सोरेन की शादी साल 2006 में कल्पना सोरेन से हुई थी। दोनों दंपत्ति के दो बेटे हैं। Hemant Soren ने 2010 में झारखंड के उप मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था।
साल 2013 में बने पहली बार मुख्यमंत्री
इसके बाद 2013 में जब राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ, तो हेमंत सोरेन ने कांग्रेस और राजद के समर्थन से पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। Hemant Soren का पहला मुख्यमंत्री कार्यकाल जुलाई 2013 से दिसंबर 2014 तक चला। लेकिन साल 2014 में हुए विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा।
बीजेपी ने चुनाव जीता और रघुवर दास ने मुख्यमंत्री पद संभाला। इसके बाद हेमंत सोरेन विपक्ष के नेता बने और राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे। साल 2016 में जब बीजेपी की सरकार ने आदिवासी भूमि कानूनों में संशोधन का प्रयास किया तो हेमंत सोरेन ने इसका पुरजोर विरोध किया। आदिवासियों की अवाज उठाकर हेमंत सोरेन ने राजनीति में अपनी छवि एक मजबूत नेता के रूप में बना ली।
साल 2017 में जब राज्य में आदिवासी भूमि की बिक्री और हस्तांतरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए, तो हेमंत सोरेन ने इन विरोधों का समर्थन किया। राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई।
2019 में बने दूसरी बार मुख्यमंत्री
उसके बाद Hemant Soren ने 2019 के विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और राजद के साथ गठबंधन की। 2019 के चुनाव में जनता ने हेमंत सोरेन पर भरोसा जताया और वो दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। उन्होंने आदिवासी और पिछड़े वर्गों के लिए कई योजनाएं शुरू की। हेमंत सोरेन हमेशा से आदिवासी समुदाय के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे हैं। हेमंत सोरेन ने दिसम्बर 2019 से जनवरी 2024 तक झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।
कथित जमीन घोटाले में हेमंत सोरेन को जाना पड़ा जेल
हालांकि Hemant Soren के लिए साल 2024 की शुरुआत कुछ अच्छी नहीं रही। उन्हें कथित जमीन घोटाले के मामले में जेल जाना पड़ा था। जेल जाने से पहले हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा भी देना पड़ा। इसके बाद जेएमएम के नेता चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया गया।
Hemant Soren को कई मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा, जैसे उनकी भाभी सीता सोरेन बीजेपी में शामिल हो गई। उनकी पत्नी कल्पना को मुख्यमंत्री बनाने के प्रयासों को लेकर जेएमएम में अंदरूनी मतभेद भी देखने को मिला। लेकिन तमाम मुश्किलों के बाद भी हेमंत ने हार नहीं मानी और आखिरकार एक बार फिर वो मुख्यमंत्री बने।


