Hindi Diwas: भारत विविध भाषाओं का देश रहा है। लेकिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की भाषाओं की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने का नाम ‘हिन्दी’ है।
मशहूर साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चन्द्र ने लिखा है, “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति कौ मूल”, यानि, अपनी भाषा की उन्नति ही सभी प्रकार की उन्नति का मूल है।
वैसे देखा जाए तो हमारा देश दुनिया भर में सांस्कृतिक और भाषाई दृष्टि से बहुत समृद्ध है। देश की भाषाई संपन्नता को ध्यान में रखते हुए संविधान निर्माताओं ने भारत के संविधान में भाषाओं के लिए अलग से प्रावधान किया जिसमें शुरुआत में 14 भाषाएं रखी गई थीं और अब इस आठवीं अनुसूची में कुल 22 भाषाएं शामिल हैं।
भारत की सभी भाषाएं महत्वपूर्ण हैं। उनका अपना-अपना समृद्ध इतिहास है।
स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिंदी की महत्त्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए संविधान निर्माताओं ने 14 सितंबर 1949 के दिन ही हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था।
दरअसल, 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी। साल 1953 में पहली बार 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया गया था। इस दिन को मनाने का विचार पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय में आया था।
इसके बाद से हर साल 14 सितंबर को हिन्दी दिवस (Hindi Diwas) मनाया जाता है। यह दिन लोगों को हिन्दी भाषा के महत्व के बारे में जागरूक करता है।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिन्दी दिवस की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद 343 द्वारा संघ की राजभाषा हिंदी और देवनागरी लिपि को अपनाया। संविधान के अनुच्छेद 351 में हिंदी भाषा के विकास के लिए हमें निदेश भी संविधान ने किया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय का राजभाषा विभाग सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से राजभाषा हिन्दी के प्रगामी प्रयोग की दिशा में निरंतर प्रयास कर रहा है। राजभाषा विभाग ने स्मृति आधारित अनुवाद प्रणाली ‘कंठस्थ’ का निर्माण और विकास किया है जिसमें लगभग 22 लाख वाक्य शामिल किए जा चुके हैं। इस टूल का प्रयोग सुनिश्चित कर सरकारी कार्यालयों में अनुवाद की गति एवं गुणवत्ता बढ़ाई गई है।
राजभाषा विभाग द्वारा जन-साधारण के लिए ‘लीला हिन्दी प्रवाह’ मोबाइल ऐप तैयार किया गया है जिसे अपनाकर 14 विभिन्न भाषा-भाषी अपनी-अपनी मातृभाषाओं से निःशुल्क हिन्दी सीख सकते हैं। राजभाषा विभाग के ‘ई- महाशब्दकोश’ में 90 हज़ार शब्द सम्मिलित किये गए हैं और ‘ई-सरल’ हिंदी वाक्यकोश में 9 हज़ार वाक्य शामिल हैं।
राजभाषा हिन्दी तो राष्ट्रभाषा क्या?
अब आपके दिमाग में यह सवाल उठ रहा होगा कि अगर हिन्दी हमारी राजभाषा है तो हमारी राष्ट्रभाषा क्या है? दरअसल, कई लोगों को राष्ट्रभाषा और राजभाषा को लेकर कंफ्यूजन रहता है और यही वजह है कि काफी कम लोगों को दोनों में अंतर पता होता है। अगर आप भी उन्हीं लोगों में से हैं तो आपको बता दें कि राष्ट्रभाषा वह भाषा है, जिसका इस्तेमाल राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यों के लिए किया जाता है।
इस तरह हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा भी है क्योंकि देश की अधिकतर आबादी हिन्दी का ही इस्तेमाल करती है। दूसरी तरफ, राजभाषा वह है जिसका उपयोग सरकारी कामकाज के लिए किया जाता है, जैसे देश की अदालतों में, संसद में या व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए।


