राज्यसभा के सभापति Jagdeep Dhankhar के खिलाफ इंडिया गठबंधन अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस की तरफ से Jagdeep Dhankhar के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। कांग्रेस के इस अविश्वास प्रस्ताव पर टीएमसी से लेकर समाजवादी पार्टी ने समर्थन देने का फैसला किया है। इंडिया गठबंधन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67 (बी) के तहत राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तैयारी कर रहें हैं। कांग्रेस के इस प्रस्ताव पर राज्यसभा के 70 सांसदों ने हस्ताक्षर कर दिया है।
कांग्रेस मंगलवार को ला सकती है अविश्वास प्रस्ताव
आपको बता दें कि संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। राज्यसभा में जॉर्ज सोरोस के मुद्दे पर जबरदस्त बहस देखने को मिल रही है। इस मुद्दे पर जिस तरह का रवैया सभापति Jagdeep Dhankhar ने दिखाया है उसे कांग्रेस नाराज नजर आ रही है। इसी कारण कांग्रेस ने सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक इंडिया गठबंधन मंगलवार को राज्यसभा में सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं।
विपक्ष ने लगाया सभापति पर पक्षपात का आरोप
सोमवार को सदन में हंगामे के दौरान दिग्विजय सिंह और राजीव शुक्ला ने सभापति Jagdeep Dhankhar पर पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने सभापति से सवाल किया कि किस नियम के तहत उन्होंने चर्चा शुरू की है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सभापति बीजेपी सदस्यों का नाम लेकर उनसे बोलने के लिए कह रहे हैं।
आपको बता दें कि राज्यसभा में सभापति को हटाने वाले प्रस्ताव पर 50 सांसदों के हस्ताक्षर की जरूरत होती है। सभापति धनखड़ के खिलाफ 70 सांसदों ने हस्ताक्षर कर दिया हैं। मॉनसून सत्र के दौरान भी विपक्ष ने सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले थे। लेकिन विपक्ष ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था।
कैसे हटाए जाते हैं सभापति?
राज्यसभा के सभापति को पद से हटाने के लिए कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर के साथ प्रस्ताव सचिवालय को भेजना होता है। कम से कम 14 दिन पहले दिए गए इस नोटिस पर राज्यसभा में उपस्थित सदस्यों के बहुमत के आधार पर प्रस्ताव पारित किया जाता है। राज्यसभा से प्रस्ताव पारित होने के बाद लोकसभा भेजा जाता है। लोकसभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति को प्रस्ताव भेजा जाता है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही सभापति को पद से हटाया जा सकता है। आपको बता दें कि उप राष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है।


