Bihar Elections: बिहार का चुनाव, जोकि इसी साल होने को है। चुनाव को लेकर पार्टियों ने कमर कसना शुरू कर दिया है। सभी पार्टियां अपने-अपने हिसाब से रणनीति बनाना शुरू कर चुकी है। रैलियों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। इसी बीच केन्द्रीय मंत्री और बिहार में हम पार्टी के सुप्रिमो बिहार में कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में तमाम बातों के बीच मांझी का एक और भी बयान निकल कर सामने आया जिसके बाद NDA में फूट के कयास लगाए जाने लगे। ऐसा क्या कह दिया मांझी ने कि NDA में दरार की बात सामने आ गई।
बिहार का जहानाबाद ज़िला, जहां जीतन राम मांझी बिहार में कार्यकर्ताओं को सम्बोधिक कर रहे थे। सम्बोधन में शिक्षा, सीट, चुनाव, बजट और महाकुंभ सब पर बोल गए। जिसपर सीटों को लेकर उनका बयान खूब सुर्खियों में रहा। मांझी ने कार्यक्रम के बाद मीडिया से बात करते हुए चुनाव को लेकर अपनी मांगों को फिर से दोहराया। मांझी ने विधानसभा चुनाव को लेकर उनकी हम पार्टी के लिए 20 सीटों की मांग रखी थी। मांग दोहराते हुए उन्होंने कहा कि – अगर हमें चार रोटी की जरूरत है तो हमें चार रोटी चाहिए। एक रोटी भी कम होगा तो मांगेंगे। कोई एक कोना देगा तो हम मानने वाले नहीं हैं। जीतन राम मांझी के इस बयान से एनडीए में टेंशन बढ़ना तय है। जिसके बाद ये कयास भी तेज हो रहे हैं कि अगर मांझी को उनके मन मुताबिक सीटें नहीं मिलीं तो मांझी रास्ते अलग भी कर सकते हैं।
दरअसल, इसी साल बिहार में विधानसभा का चुनाव है और मांझी चाहते हैं कि एनडीए में उनकी पार्टी को 20 या उससे अधिक सीट मिले। उन्होंने कहा कि हम 20 सीट जीतकर आएंगे तो सारा काम कर देंगे। इसका मतलब 20 सीट नहीं है, और अधिक सीट मिलेगी तब न 20 सीट जीतेंगे?
शिक्षा को लेकर भी जीतन राम मांझी ठीक अवध ओझा जैसा बयान दिया। कहा कि शिक्षा शेरनी का दूध है। जो पीएगा वो शेर से कम नहीं होगा। नीतीश कुमार की तरफदारी में मांझी कहने लगे कि नीतीश गांव-गांव जाकर विकास की नदी बहा रहे हैं। जबकि तेजस्वी लगातार नीतीश पर हमला बोल रहे हैं। मांझी ने कहा कि हमको लगता है तेजस्वी का स्वास्थ्य खुद ही खराब है। उनको अपनी जांच करानी चाहिए। और रिपोर्ट दिखाना चाहिए। तेजस्वी को मांझी ने बजट के मामले में घेरा, कहा कि – तेजस्वी यादव अज्ञानी हैं। बिहार को इस बजट में जितना मिलना चाहिए था उससे अधिक मिला है। तेजस्वी यादव सिर्फ इधर-उधर की बातें करते हैं। उनका विकास से कुछ लेना-देना नहीं है। तेजस्वी ने कभी उन्होंने संघर्ष नहीं किया। आंदोलन नहीं किया। कभी जेल नहीं गए। वे बिहार के लिए कुछ करने वाले नहीं हैं क्योंकि वे सिर्फ एक समूह को लेकर चलते हैं और उसी समूह के बारे में सोचते हैं।
आपको बता दें कि बीते दिनों बीते दिनों भी बिहार की रैली में मांझी ने बयान दिया था कि मांझी और मांझी की हम पार्टी को झारखंड चुनाव में सीट नहीं मिला। दिल्ली चुनाव में भी नहीं मिला सीट। चलिए नहीं मांगे थे तो नहीं मिला. लेकिन ये कोई न्याय है क्या? हमारा कोई अस्तित्व नहीं है? केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने आगे कहा, “जब हमारे कार्यक्रम में भीड़ आ रही है, जनमानस हमारा है, वोटर हमको वोट देने के लिए तैयार तो फिर सीट क्यों नहीं मिली? मेरा एक ही प्रश्न है। हम फरियाना नहीं चाहते हैं कि हमको इतनी सीट दे दो, लेकिन कहते हैं कि जो वजूद है उस आधार पर सीट दो। हमको कोई फायदा नहीं है। आप लोगों के फायदा के लिए कह रहे हैं। लगता है कैबिनेट हमको छोड़ना पड़ेगा।”
अब जैसे ही कैबिनेट छोड़ने वाला बयान सामने आया। जनता, मीडिया और सियासत हर तरफ खलबली मच गई। लोग ये कयास लगाने लगे कि क्या NDA में फूट पर रही है? क्या अंदर और बाहर का माहौल अलग-अलग है। राजनीति के जानकारों के बीच ये बहल तेज़ हो गई कि सियासत का खेल ही अनोखा है। दिल्ली, हरियाणा चुनाव में जहां इंडिया गठबंधन में फूट पड़ती दिखाई दे रही है, वहीं क्या बिहार में NDA में फूट की शुरुआत हो गई है क्या!
हालांकि मांझी ने उसी दिन ट्वीट करते हुए इस पूरे कयाल पर पानी फेर दिया। कहा कि वो मरते दम तक मोदी का साथ देंगे। लेकिन फिर से 20 सीटों वाले बयान को रोटी से जोड़कर मीडिया के सामने रखने पर ये कयास तेज हो गए हैं कि क्या NDA में कोई किसी तरह की फूट पड़ रही है। कभी नीतीश कुमार की कोई बात,कोई कदम, कोई इशारा तो कभी मांझी के ऐसे बयान, जो लगातार इन दिनों तूल पकड़ रहा है। सवाल है कि अगर बिहार में ही अगर मांझी को मनमुताबिक सीटें नहीं मिलीं, तो क्या मांझी INDIA गठबंधन की ओर शिफ्ट होते दिखाई देंगे और अगर होंगे भी तो क्या INDIA गठबंधन में मांझी को मनमुताबिक सीट्स मिलेंगी…NDA के नेताओं की तारीफ करने वाले मांझी अक्सर NDA के फैसले से नाराज़ नज़र आते हैं। देखना है कि मांझी के आपसदारी के राजनीकित संबंध पार्टी की ज़रूरतों को कितना भर पाते हैं।


