बॉलीवुड एक्ट्रेस, फिल्ममेकर और सांसद कंगना रनौत (Kangana Ranaut) की फिल्म ‘इमरजेंसी’ की रिलीज पर तकरार खत्म होती नजर नहीं आ रही है। सेंसर बोर्ड ने बिना कट्स फिल्म को पास करने से मना कर दिया है।
बॉलीवुड एक्ट्रेस और मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत (Kangana Ranaut) की फिल्म इमरजेंसी को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने पास करने से मना कर दिया है। फिल्म की रिलीज एक बार पहले ही टल चुकी है। सेंसर बोर्ड ने कोर्ट में साफ कर दिया है कि बिना कट्स के फिल्म को हरी झंडी नहीं दी जाएगी। वहीं, कंगना रनौत ने कहा है कि इमरजेंसी में कोई कट्स नहीं लगाया जाएगा।
कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने कहा कि सेंसर बोर्ड ने 13 कट्स लगाने को कहा है, पर ये सुझाव काफी अनुचित हैं और फिल्म में कट्स नहीं लगेगा। सेंसर बोर्ड ने कोर्ट में कहा कि फिल्म में 13 कट्स लगाने के बाद उसे यू/ए सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाएगा।
फिल्म रिलीज का विवाद अब कोर्ट में चल रहा है। कोर्ट से आदेश मिलने के बाद ही फिल्म रिलीज का रास्ता साफ हो पाएगा। कंगना (Kangana Ranaut) को कोर्ट के आदेशानुसार फिल्म में कुछ बदलाव करने पड़ सकते हैं।

सेंसर बोर्ड की रिवाइजिंग कमेटी ने इमरजेंसी के निर्माताओं (Kangana Ranaut) से कहा है कि फिल्म की शुरुआत में एक डिसक्लेमर को दिखाना होगा। जिसमें लिखा होगा कि फिल्म “सच्ची घटनाओं से प्रेरित हैं” या आपातकाल के दौरान हुई घटनाओं के “नाटकीय परिवर्तन” को दिखाती है। सेंसर बोर्ड का कहना है कि दर्शकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे जो कुछ भी देख रहे हैं वह पूरी तरह से सच नहीं है।
फिल्म में जवाहर लाल नेहरू का एक सीन दिखाया गया है जिसमें वो कहते हुए सुने जा सकते हैं कि “चीन ने असम को भारत से काट दिया था।” बोर्ड का कोई भी सदस्य इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर सका है। सेंसर बोर्ड ने इमरजेंसी फिल्म की टीम को कहा है कि फिल्म में दिखाए गए पंडित जवाहरलाल नेहरू ने एक डायलॉग को प्रमाणित करने को कहा है।
फिल्म में भिंडरावाले और संजय गांधी के बीच बातचीत को दर्शाया गया है जिसमें भिंडरावाले ने आरोप लगाया कि गांधी वोट चाहते थे जबकि भिंडरावाले खालिस्तान चाहते थे। सेंसर बोर्ड चाहता है कि पूरे संवाद को फिल्म से हटा दिया जाए, क्योंकि संवाद को देखकर ऐसा लगता है कि वे किसी सौदे के प्रबंधन के बारे में बात कर रहे है।
भिंडरावाले को ‘संत या संत’ बताने वाले कम से कम तीन दृश्यों को फिल्म से हटाने को कहा गया है। इनमें से एक दृश्य में संजय गांधी और राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के बीच बातचीत का भी है, और दूसरे में इंदिरा गांधी सेना प्रमुख से बात करती हुई दिख रही हैं।
सेंसर बोर्ड ने फिल्म में दिखाई गई हिंसा के स्तर को कम करने के बारे में भी सुझाव जारी किया है। इसमें गैर-सिखों पर हिंसा करने वाले सिख भी शामिल हैं। एक दृश्य में, सिख समुदाय के सदस्य एक बस के सामने एक गैर-सिख व्यक्ति को गोली मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। इन सभी पर बोर्ड ने आपत्ति जताई है।
आपको बता दें कि कंगना रनौत (Kangana Ranaut) द्वारा निर्मित ‘इमरजेंसी’ पर शिरोमणि अकाली दल सहित कई सिख संगठनों ने आपत्ति जताई है। आरोप है कि फिल्म में सिख समुदाय को गलत तरीके से पेश किया गया है और ऐतिहासिक तथ्यों को गलत तरीके से दिखाया गया है। पहले यह फिल्म 6 सितंबर को रिलीज होने वाली थी। लेकिन सेंसर बोर्ड से क्लीयरेंस सर्टिफिकेट नहीं मिलने के कारण फिल्म अटकी हुई है।


