Kanhaiya Kumar: बात शुरू होती है मोहन भागवत के बयान से। बीते दिनों RSS प्रमुख ने कुछ ऐसा कह दिया कि बयान विवादों की सीधी चपेट में आ गया। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अपने बयान में कहा कि ‘हिंदुस्तान को 15 अगस्त, 1947 को आजादी नहीं मिली, वो झूठी आजादी थी।’ देश को सच्ची आजादी मोदी जी के आने के बाद मिली। इस बयान पर सीधा संविधान के अपमान और देश स्वतंत्रता सेनानियों के अपमान से जोड़कर देखा गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश में जमकर इस पर हमला बोला। जिसके बाद राहुल गांधी के समर्थन में कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार भी दिखाई दिए। कन्हैया संविधान सेनानी बनने की बात कर कह रहे थे। कन्हैया का बयान भी खूब चर्चाओं में है। मगर सवाल है कि दिल्ली चुनाव से ठीक पहले कन्हैया एक्टिव होकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने, संविधान सेनानी बनने और सोशल मीडिया पर कवायद बनने की कवायद एकाएक से तेज कर देते हैं, सवाल है कि आखिर कन्हैया क्यों बनना चाहते हैं संविधान सेनानी।।।क्या दिल्ली चुनाव में कन्हैया का रिवाइव करना क्या बिहार चुनाव के संकेत दे रहा है??? क्या कन्हैया पर बिहार में बड़ा दांव खेलने वाली है कांग्रेस।
जगह महू मध्य प्रदेश। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भाषण दे रहे थे। राहुल के हाथ में अमूमन की तरह ही उनकी लाल किताब थी। यानी संविधान। राहुल गांधी आरएसएस प्रमुख पर हमला बोल रहे थे। कह रहे थे कि – कुछ दिन पहले RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- ‘हिंदुस्तान को 15 अगस्त, 1947 को आजादी नहीं मिली, वो झूठी आजादी थी।’ ये सीधा संविधान पर आक्रमण है। BJP ने लोक सभा से पहले भी संविधान को खत्म करने की बात कही थी, इन्होंने कहा था कि अगर 400 सीटें आ गईं तो संविधान बदल देंगे। लेकिन उनके सामने कांग्रेस और INDIA के नेता व कार्यकर्ता खड़े हुए। नतीजा ये हुआ कि लोक सभा में नरेंद्र मोदी को संविधान के आगे माथा टेकना पड़ा। याद रखिए।।। जिस दिन संविधान खत्म हो गया, उस दिन देश के गरीबों के लिए कुछ नहीं बचेगा। राहुल गांधी के इस बयान के बाद सियासत में गहमा-गहमी शुरू हो गई। इसी बीच सोशल मीडिया पर कांग्रेस के कई अंग और नेताओं ने राहुल गांधी के बयान का समर्थन किया। समर्थन में कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार भी उतरे। कन्हैया कुमार ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा कि – देश को स्वतंत्रता-सेनानियों ने जो संविधान वाली आज़ादी दिलाई, उस आज़ादी और संविधान की रक्षा हम “संविधान-सेनानी” बन कर आख़िरी साँस तक करेगें।
अब यहां सवाल ये उठता है कि आखिर कन्हैया कुमार संविधान सेनानी क्यों बनना चाहते हैं। क्या ये कोई नॉर्मल सोशल मीडिया पोस्ट है, या फिर कोई संदेश! समझने वाली यहां दो बातें हैं। पहली बात तो ये कि कि कन्हैया संविधान के बात इसलिए कर रहे होते हैं क्योंकि वो खुद भी जेएनयू से पॉलिटिकल साइंस के विद्यार्थी रहे हैं। संविधान की रोटी ही तो वकील और राजनीति विज्ञान के लोग खाते हैं। मगर दूसरे परत से समझने की कोशिश करेंगे तो ये बात समझ आएगी कि कन्हैया का दिल्ली चुनाव में 10 दिन पहले अचानक से एंट्री मार देना कुछ और संकेत भी देता है। बीते काफी समय से लापता चल रहे कन्हैया कुमार, वैसे ही जाग गए हैं जैसे ताबूत से अंडरटेकर जाग जाता था। कन्हैया का दिल्ली चुनाव में आना पूर्वांचलियों को मोहने का अच्छा साधन बताया जा रहा है। गौरतलब है कि कन्हैया कुमार दो बार लोकसभा चुनाव हारने हार गए हैं। एक बार CPI के टिकट से और एक बार कांग्रेस के टिकट से।
अब इसमें कोई हैरत नहीं कि कन्हैया को राजनीति में खड़ा करने के लिए कांग्रेस पार्टी कन्हैया को बिहार विधानसभा चुनाव में टिकट दे दे।।।जी हाँ इस बात की सुगबुगाहट राजनीति में तेज चल रही है। कन्हैया के लिए ये रास्ता हालांकि आसान नहीं होगा, बिहार में कन्हैया को तेजस्वी का सीधा कंप्टीशन माना जाता है। बिहार में कन्हैया और तेजस्वी का अर्जुन और एकलव्य वाला ही मामला है। अब देखना है कि दिल्ली में कन्हैया कुमार को वापस से ज़िन्दाा करना कांग्रेस को दिल्ली के युवा वोटर को कितना प्रभावित करता है। साथ ही कन्हैया फैक्टर और कन्हैया का संविधान-सेनानी बनना बिहार में कितना कारगर साबित होकर सामने आता है।


