लिव-इन पार्टनर (Live-in Partner) अगर शादीशुदा है तो भी उन्हें सुरक्षा का अधिकार है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस तरह के तीन मामलों में सुरक्षा दिए जाने के आदेश जारी किए हैं।
जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की बेंच इन तीनों मामलों की सुनवाई कर रही थी। तीनों में एक-एक पार्टनर पहले से शादीशुदा था।
इनमें से एक अपील केस था जिसमें प्रेमी जोड़े को सुरक्षा देने से इंकार किया जा चुका था।
बेंच ने कहा कि इस तरह के मामलों में सामाजिक नैतिकता के प्रभावों को देखते हुए समन्वय करना कठिन हो जाता है।
कोर्ट ने माना कि सामाजिक नैतिकता का प्रभाव लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in relationship) की प्रकृति पर पड़ता है। इससे समाज के नैतिक ताने-बाने को बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।
इस कारण शादीशुदा पार्टनर वाले लिव-इन कपल्स (Liv-in couples) को सुरक्षा देने के मामले में न्यायिक दृष्टिकोण में भिन्नता होती है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि एक नाबालिग किसी वयस्क के साथ लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in relationship) में है तो उन्हें कानून से सुरक्षा प्राप्त नहीं हो सकती। इसमें कोर्ट को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नाबालिगों की कस्टडी उनके माता-पिता को सौंप दी जाए।


