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    शादी की पहली रात महिला का Virginity टेस्ट, कोर्ट पहुंचा मामला; ससुरावालों पर कार्रवाई

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    Madhya Pradesh Virginity Test: कभी हम सोचते हैं कि शादी जीवन का सबसे खास और खुशहाल दिन होता है, लेकिन जब ये खास दिन महिलाओं के लिए मेंटली और फिजिकली टॉर्चर का रूप ले ले, तो ये एक गहरी चिंता का विषय बन जाता है। ऐसा ही हुआ है मध्य प्रदेश के इंदौर में जहां एक युवती ने अपनी शादी की पहली रात के बाद के घटनाक्रम को लेकर चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। दरअसल, युवती ने शादी के बाद अपने ससुरालवालों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उसकी वर्जिनिटी चेक करने के लिए गलत तरीके अपनाए हैं। इस मामले में इंदौर की जिला अदालत ने संज्ञान लेते हुए युवती के ससुरालवालों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है। ये मामला न केवल एक महिला के खिलाफ हिंसा और मानसिक प्रताड़ना का है, बल्कि ये उस समाज और सोच को भी उजागर करता है, जो महिलाओं के शरीर और सम्मान को अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश करता है। ये मामला 12 दिसंबर 2019 का है, जब युवती की शादी भोपाल के एक लड़के से हुई थी।

    शादी के बाद की रात को उसकी सास ने, जो की पूराने खयालों की और पारंपरिक सोच वाली महिला थीं, उन्होंने उस युवती और उसकी वर्जिनिटी को लेकर सवाल उठाया।महिला की सास ने एक नई बेडशीट रखी और फिर ,सुबह आकर देखा तो बेड शीट रंगी हुई नहीं थी। जिसके बाद से ही उसकी सास ने उसपर सवाल खड़ा कर दिया था। ये सवाल उस युवती के लिए किसी बड़ी मानसिक और शारीरिक यातना से कम नहीं था। इस घटना के बाद, युवती का कहना है कि उसे लगातार मेंटली टॉर्चर दिया जाता था। सास ने न सिर्फ उसकी वर्जिनिटी पर सवाल उठाए, बल्कि उसे हर दिन मानसिक रूप से दबाव डालने की कोशिश की। इसके बाद, सास ने युवती से 2 लाख रुपये दहेज की मांग भी शुरू कर दी, जिससे वो मेंटली और परेशान रहने लगी थी।

    यहां तक कि युवती ने जो फिजिकल और मेंटल टॉर्चर झेला। उसके नतीजे भी कुछ खास ठीक नहीं रहे। युवती के वकील कृष्ण कुमार के अनुसार, उस युवती का अबॉर्शन हो गया, जो कि उसकी पहली बार गर्भवती होने के बाद हुआ। इसके बाद, उसने एक बेटी को जन्म दिया, लेकिन वो बच्ची महज नौ महीने और नौ दिन के जीवन के बाद चल बसी। ये दुखद घटनाएं युवती के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही थींययय उसके ससुरालवालों का रवैया लगातार उसे टॉर्चर देने और दबाव बनाने का था।फिर भी, युवती को उम्मीद थी कि शायद एक दिन उसकी ज़िंदगी में सब ठीक हो जाएगा, लेकिन जब उसने अपनी तीसरी बेटी को जन्म दिया और फिर से ससुरालवालों ने बेटा ना होने पर उसे घर से निकाल दिया था।शादी के बाद के मुश्किल वक्त में जब वो मानसिक रूप से टूट चुकी थी और फिजिकल टॉर्चर से गुजर रही थी, तब उसने इंदौर की जिला अदालत का दरवाजा खटखटाया। उसने अपने ससुरालवालों के खिलाफ घरेलू हिंसाका मामला दर्ज कराया।महिला ने अपनी सास, ससुर, पति और देवर पर गंभीर आरोप लगाए, जिनमें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना, वर्जिनिटी चेक के नाम पर अपमान और दहेज की मांग शामिल थे। इंदौर जिला कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लिया और महिला के ससुरालवालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का आदेश दिया। कोर्ट ने घरेलू हिंसा एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा, वूमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट डिपार्टमेंट की रिपोर्ट में भी ये खुलासा हुआ कि ससुरालवालों ने वर्जिनिटी चेक करने के लिए गलत तरीके अपनाए थे, जो कानूनी और सामाजिक दृष्टि से पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं।

    ये मामला न केवल एक महिला के खिलाफ हिंसा का है, बल्कि ये वर्जिनिटी टेस्ट जैसी प्रथा को भी कानूनी रूप से चुनौती देता है। वर्जिनिटी टेस्ट की प्रथा को ह्यूमेन राइट्स का उल्लंघन माना जाता है, और इसे कई देशों में अवैध घोषित किया गया है। भारत में भी इस तरह के परीक्षणों को पूरी तरह से असंवैधानिक और गलत माना जाता है, क्योंकि ये महिला के शरीर और उसकी आत्मसम्मान को खत्म करता है।वकील कृष्ण कुमार का कहना है कि इस मामले में वर्जिनिटी टेस्ट को कानूनी रूप से चुनौती दी जाएगी।। ये मुद्दा केवल एक महिला के खिलाफ अत्याचार का नहीं है, बल्कि ये समाज में उस सोच को भी चुनौती देता है, जो महिलाओं को और उनके सम्मान के साथ खिलवाड़ करती हैं।।
    ऐसे मामलों में महिला के आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचती है, और ये उसके मेंटल हेल्थ पर असर डालता है। युवती का गर्भपात, फिर से संतान का खोना, और आखिर में घर से निकाले जाने जैसी घटनाएं समाज में औरतों की स्थिति को उजागर करता है।।।।ये घटना भी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि समाज और परिवारों में महिलाओं के प्रति मानसिकता कितनी पुरानी हो सकती है एक महिला को शारीरिक और मानसिक रूप से टॉर्चर करना न केवल एक अपराध है, बल्कि ये एक ऐसे समाज की ओर इशारा करता है, जिसमें औरतों की अस्मिता और उनके अधिकारों को ठीक से सम्मान नहीं दिया जाता।

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