कोलकाता (Kolkata) के एक अस्पताल में महिला डॉक्टर से हुए रेप और मर्डर मामले (Doctor Rape Murder Case) को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहीं पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने अपने प्रशासन और शहर की पुलिस का जमकर बचाव किया है। साथ ही ममता बनर्जी ने देश के अन्य राज्यों में महिलाओं पर होने वाले हमले जैसी घटनाओं की ओर इशारा भी किया है।
ममता ने 2020 में उत्तर प्रदेश के हाथरस में 20 साल की दलित महिला के साथ हुए बलात्कार और 2013 में बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में एक कॉलेज छात्रा के साथ बलात्कार और बर्बर हत्या के साथ-साथ पिछले हफ्ते राजस्थान के जयपुर में एक सरकारी अस्पताल में एक बच्ची के साथ हुए बलात्कार की घटना का भी जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा, “उत्तर 24 परगना के कामदुनी मामले में हमने मृत्युदंड की मांग की थी…लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उन्नाव में जो हुआ, उसके बारे में कोई बात नहीं करता। हाथरस की पीड़िता को न्याय नहीं मिला…” कामदुनी मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा एक आरोपी को बरी करने और दो अन्य की मौत की सजा को कम करने के बाद अपील दायर की गई है।
ममता बनर्जी ने कहा, “उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में महिलाओं के खिलाफ अपराध दर असामान्य रूप से अधिक है… और वहां कोई न्याय नहीं है, लेकिन बंगाल में महिलाओं को अदालतों में न्याय मिलेगा।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ-साथ उन सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के इस्तीफे की भी मांग की, जो “महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून लागू करने में असमर्थ हैं।”
कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में पिछले 8-9 अगस्त की रात एक डॉक्टर के बलात्कार और हत्या कर दी गई थी। इस घटना के विरोध में कोलकाता समेत देश के तमाम बड़े शहरों में डॉक्टरों के प्रदर्शन हो रहे हैं। ममता बनर्जी ने इस मामले को लेकर 30 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 8 दिन में दूसरी चिट्ठी लिखी। उन्होंने बलात्कारी को कड़ी सजा देने के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर पीएम को 22 अगस्त को भी पत्र लिखा था।
बंगाल ने पास किया ‘अपराजिता’ विधेयक
पश्चिम बंगाल विधानसभा ने मंगलवार को राज्य सरकार द्वारा लाए गए बलात्कार विरोधी ‘अपराजिता’ विधेयक (Aparajita Woman and Child Bill) (West Bengal Criminal Laws and Amendment 2024) को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इसके साथ ही बंगाल बलात्कार, सामूहिक बलात्कार और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से निपटने वाले केंद्रीय कानूनों में संशोधन लाने वाला पहला राज्य बन गया है।
अब इस विधेयक (Bengal anti-rape bill) को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस और फिर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास उनकी मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस विधेयक में मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है, यदि बलात्कार और यौन अपराधों के लिए दोषी व्यक्ति के चलते पीड़िता की मौत हो जाती है या वह अचेत अवस्था में चली जाती है। इसके अलावा, इसमें बलात्कार के दोषी व्यक्तियों के लिए पैरोल के बिना आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।


