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    Mamta Kulkarni: ममता कुलकर्णी नहीं ममता नंदगिरी’, खुद का पिंडदान कर किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बनीं एक्ट्रेस

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    Mamta Kulkarni: “तुम ये कैसे भूल गए की मै तुम्हारी पूजा नहीं किसी की पत्नी हूं” ये डायलोग सुनकर आप समझ ही गए होंगे की हम किसकी बात कर रहे है। Naseeb पिक्चर में गोविंदा के साथ काम करने वाली ममता कुलकर्णी की जिन्हें आजकल एक रूप में देखा गया है। दरअसल प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में एक अनोखा घटनाक्रम सामने आया है। बॉलीवुड की एक्टर ममता कुलकर्णी ने किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से दीक्षा ग्रहण करके संन्यास की ओर कदम बढ़ाया हैं। ममता कुलकर्णी ने lime light की दुनिया से खुद को किनारे करते हुए अब साधवी का रूप ले लिया है।। उन्हें किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है, और उनका नया नाम ‘श्री यमाई ममतानंद गिरि’ रखा गया है। ये घटना महाकुंभ चर्चा का विषय बनी हुई है।

    ममता कुलकर्णी के जीवन में इस बदलाव ने न केवल उनके आध्यात्मिक मार्ग पर सवाल उठाए हैं, बल्कि उनके फिल्मी करियर और एक समय के विवादों से भी उनके जुड़ाव को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आइए जानते हैं ममता कुलकर्णी की इस नई यात्रा के बारे में और ये कैसे एक एक्टर से संन्यासी की ओर बदल गईं। ममता कुलकर्णी ने पहले ही संन्यास लेने का फैसला लिया था और साध्वी के रूप में जीवन जीने की राह चुनी थी। 24 साल तक विदेश में रहने के बाद, ममता हाल ही में भारत लौट आईं और महाकुंभ में किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर के रूप में प्रतिष्ठित हुईं। उन्होंने गंगा, यमुना और सरस्वती के त्रिवेणी संगम में स्नान किया और पिंडदान भी किया। इसके बाद, उन्हें भगवा रंग का कपड़ा पहनने के बाद वैदिक मंत्रों के बीच दूध से स्नान कराया गया, जो एक मन की शुद्धी और उनके पुराने जीवन से अलविदा करने का एक प्रतीक माना गया। ममता के इस नए रूप को देखकर उनके चाहने वालों और मीडिया के लिए ये चौकाने वाला था। उनका ये बदलाव एक फिल्मी सितारे से संन्यासी बनने की यात्रा का प्रतीक था।

    ममता को किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने महामंडलेश्वर की उपाधि दी और उनका नाम ‘श्री यमाई ममतानंद गिरि’ रखा। किन्नर अखाड़ा उन लोगों को स्वीकार करता है, जो आध्यात्मिक जीवन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं। ममता ने इस मौके पर अपने पुराने जीवन को पीछे छोड़ने की बात की और अब एक नई राह पर चलने की बात की। उनके आंसू इस बात का संकेत थे कि वो अपने पिछले जीवन से पूरी तरह से अलविदा ले चुकी हैं और अब एक नए जीवन की ओर बढ़ रही हैं। आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने ममता के बारे में कहा, “ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाने का निर्णय बहुत सोच-समझकर लिया गया है। वो पिछले डेढ़ साल से हमारे संपर्क में हैं। यदि वो चाहें तो किसी भी धार्मिक पात्र का किरदार निभा सकती हैं, क्योंकि हम किसी को भी अपनी कला दिखाने से नहीं रोकते।
    चलिए अब थोड़ा पीछे चलते और ममता कुलकर्णी के गुज़रे हुए जीवन के बारे में जानते हैं। ममता कुलकर्णी का जीवन हमेशा से ही विवादों से घिरा रहा है। उनका फिल्मी करियर और personal life दोनों ही कई बार सुर्खियों में रहे हैं। ममता ने बॉलीवुड के कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया था, लेकिन उनका करियर अचानक ठप हो गया। इसके बाद उनके नाम कई विवादों के साथ जुड़ने लगे।सबसे बड़ा विवाद साल 1990 के आखिर में आया था। ममता का एक गैंगस्टर से संबंध था। ममता कुलकर्णी का नाम उस समय के कुख्यात गैंगस्टर छोटा राजन के साथ जोड़ा गया था । मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो , ममता और छोटा राजन के बीच करीबी रिश्ते थे, और ममता कई बार विवादों में घिरी रही थीं। इसके बाद ममता का नाम ड्रग्स के मामले में भी सामने आया था, और उन्हें एक समय में पुलिस की जांच का सामना करना पड़ा था।

    हालांकि, ममता ने कभी भी इन आरोपों का खुलकर सामना नहीं किया, लेकिन इन विवादों ने उनके फिल्मी करियर और निजी जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया। बॉलीवुड से उनका नाम धीरे-धीरे हटता गया और वो पूरी तरह से लाइमलाइट से बाहर हो गईं। इसके बाद ममता ने धार्मिक जीवन अपनाने का फैसला लिया और साध्वी के रूप में जीवन जीने का विकल्प चुना। उन्होंने संन्यास लेने का फैसला किया और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने लगीं।

    महाकुंभ 2025 में ममता कुलकर्णी का संन्यास और किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर के रूप में प्रतिष्ठित होना एक बड़ा बदलाव था। महाकुंभ में उनका पिंडदान और उनके भगवा वस्त्र धारण करने की प्रक्रिया ने इस आध्यात्मिक यात्रा को और भी गहराई दी। ममता ने एक नए नाम के साथ अपने पुराने जीवन को अलविदा कह दिया और अब वे पूरी तरह से धार्मिक जीवन की ओर अग्रसर हो गई हैं। महाकुंभ जैसे धार्मिक आयोजन में ममता का ये बदलाव न केवल उनके जीवन का एक नया अध्याय है, बल्कि यह समाज के सामने भी एक संदेश देता है कि हर व्यक्ति अपने जीवन में एक नया मोड़ ले सकता है और अपने अतीत से उबरकर एक नई शुरुआत कर सकता है।

    ममता कुलकर्णी की संन्यास यात्रा एक प्रेरणा है, जो हमें ये सिखाती है कि किसी भी व्यक्ति का जीवन चाहे जैसे भी मोड़ ले सकता है, और वो किसी भी समय अपने अतीत को पीछे छोड़कर एक नया रास्ता चुन सकता है। ममता का आध्यात्मिक परिवर्तन और किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर के रूप में प्रतिष्ठित होना न केवल उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ है, बल्कि ये समाज में एक सकारात्मक संदेश भी भेजता है कि आत्मिक शांति की खोज सबसे महत्वपूर्ण है।

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