भारत के पूर्व प्रधानमंत्री Manmohan Singh का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है। मनमोहन सिंह ने दिल्ली एम्स में गुरुवार रात को अंतिम सांस ली।
Manmohan Singh साल 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। मनमोहन सिंह के निधन के बाद 7 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। चलिए आज हम मनमोहन सिंह से जुड़ी कुछ अनसुनी कहानी को जानते हैं।
कहानी उस शख़्स की जिसके ख़ामोशी का शोर अनंतकाल तक गूंजता रहेगा। वो जिन्होंने कहा कि मीडिया से ज़्यादा इतिहास मेरे लिए उदार रहेगा। जिसकी सादगी ऐसी कि सरकारी BMW कार की जगह मारुती 800 ज़्यादा पसंद थी। वो जिन्हें वित्त मंत्री का पद ऑफ़र किया गया तो मज़ाक समझ कर बात टाल गए। वो जो शानदार अर्थशास्त्री थे अपने पद को ऐसा ख़ाली कर गए जिसे भर पाना ना-मुमकिन सा मालूम पड़ता है। हम बात कर रहें हैं स्वर्गीय डॉ मनमोहन सिंह की।
वित्त मंत्री पद के ऑफर को समझा था मजाक
यह बात साल 1991 की है जब नरसिम्हा राव भारत के प्रधानमंत्री बने। भारत की आर्थिक स्थिति दयनीय थी, भारत को अपने अगले वित्त मंत्री की तलाश थी। चर्चा में एक नाम निकल कर आया। सभी लोगों ने RBI के पूर्व गवर्नर आईजी पटेल के नाम पर सहमत हुए। लेकिन आईजी पटेल ने इस पद को लेने से इंकार कर दिया। इसके बाद नए नामों पर फिर से विचार हुआ। मनमोहन सिंह के नाम पर सहमती बनी। शपथ ग्रहण समारोह से ठीक 1 दिन पहले नरसिम्हा राव ने पीसी अलेक्जेंडर को मनमोहन सिंह से बात करने को कहा गया।
तब तक रात काफ़ी ढ़ल चुकी थी, 20 जून 1991 को देर रात मनमोहन सिंह नीदरलैंड से लौटकर सो रहे थे। अलेक्जेंडर ने उन्हें फोन किया और बताया कि वो तुरंत उनसे मिलना चाहते हैं। उसी रात अलेक्जेंडर, मनमोहन सिंह के आवास पहुंचे और नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री बनने का प्रस्ताव रखा। Manmohan Singh को अलेक्जेंडर की बात पर भरोसा नहीं हुआ। उन्हें ये बात मज़ाक लगी और अगले सुबह मनमोहन सिंह अपने काम पर लग गए। शपथ समारोह में मनमोहन सिंह नजर नहीं आए तब उनकी खोजबीन शुरू हुई और उन्हें फोन किया गया। उनसे पूछा गया कि क्या वो अगले वित्त मंत्री के तौर पर शपथ लेने आएंगे?
शपथ ग्रहण समारोह में नहीं पहुंचे थे Manmohan Singh
Manmohan Singh को यकीन तो नहीं हुआ फिर फोन पर उन्हें कहा गया कि वो अपने घर जाकर तैयार होकर शपथ समारोह में शामिल होने के लिए आए। अशोक हॉल में शपथ ग्रहण के लिए मंच सज कर तैयार था। कार्यक्रम में मौजूद लोग चकित हो गए क्योंकि मनमोहन सिंह तैयार होकर पहली पंक्ति में बैठे हुए थे, समारोह में मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री का पद नहीं सौंपा गया।
लेकिन शपथ समारोह के बाद उन्हें बतौर वित्त मंत्री नॉर्थ ब्लॉक ऑफिस से काम शुरू करने को कहा गया। बाद में प्रेस रिलीज जारी कर डॉक्टर मनमोहन सिंह को आधिकारिक तौर पर वित्त मंत्रालय में मंत्री के तौर पर काम सौंपा गया। इस बात का प्रसंग Penguin Random House India से प्रकाशित एके भट्टाचार्य की किताब India’s Finance Ministers: Stumbling into Reforms (1977 to 1998) में मिलता है।
ऑक्सफोर्ड से पढ़े थे Manmohan Singh
आपको बता दें कि Manmohan Singh का जन्म 26 सितंबर 1932 को पंजाब के झंगलवाली गांव में हुआ था जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है। उनका परिवार एक सामान्य व्यापारी परिवार था। विभाजन के समय उनका परिवार पाकिस्तान से भारत आकर बस गया। इस कठिन समय ने मनमोहन सिंह को जीवन की कठिनाइयों से संघर्ष करने की प्रेरणा दी। मनमोहन सिंह की शुरुआती शिक्षा पंजाब में हुई थी। इसके बाद उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से इकोनॉमिक्स में अपनी डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से एम.ए. की डिग्री और फिर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की थी। उनकी शिक्षा ने उन्हें एक उत्कृष्ट अर्थशास्त्री बनाया।


