भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) का बृहस्पतिवार, 27 दिसंबर 2024 को दिल्ली में निधन हो गया। उन्हें तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती कराया गया था जहां उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके निधन से देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है।
डॉ. मनमोहन सिंह का भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान के लिए याद किया जाएगा। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई ऐतिहासिक फ़ैसले लिए, जिसने देश की दिशा और दशा बदल दी।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा)
डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) के नेतृत्व में UPA सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा / MNREGA) देश में लागू एक रोजगार गारंटी योजना है, जिसे 5 सितम्बर 2005 को विधान द्वारा अधिनियमित किया गया। मनरेगा भारतीय संसद द्वारा अधिनियमित एक रोजगार गारंटी योजना है जो देश के ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन की रोजगार की गारंटी सुनिश्चित करता है। मनरेगा योजना ग्रामीण क्षेत्र का विकास तथा इसके साथ ही ग्रामीण लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराता है।
भारत-अमेरिका परमाणु समझौता:
उनके प्रधानमंत्री बनने के दौरान भारत और अमेरिका के बीच असैन्य परमाणु समझौता हुआ, जिससे भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह से छूट प्राप्त हुई। यह समझौता भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है। भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते में Dr. Manmohan Singh का अहम रोल था। उन्होंने इसके जरिये भारत-अमेरिका के बीच रिश्तों की एक नई शुरुआत की थी, अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस के मुताबिक तत्कालीन प्रधानमंत्री Manmohan Singh ने इसके लिए अपने राजनीतिक भविष्य तक को दांव पर लगा दिया था।
सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम :
डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) के नेतृत्व में UPA की सरकार ने सूचना का अधिकार कानून (Right to Information ACT) पारित किया, जिसने सरकारी कामकाजी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की। इस कानून ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूती दी साथ ही यह कानून भ्रष्टाचार के खिलाफ नकेल कसने में डॉ. सिंह का एक निर्णायक कदम साबित हुआ।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम/National Food Security Act, (NFSA) 2013:
डॉ. सिंह के नेतृत्व में UPA की सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू किया, जिसके तहत दो-तिहाई भारतीय परिवारों को सस्ते दरों पर खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 भारत सरकार द्वारा अधिसूचित एक कानून है जिसके माध्यम से भारत सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में जनसाधारण को खाद्यान्न उपलब्ध हो सके। यह योजना गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हुई।
साल 2020 में जब पूरी दुनिया कोरोना (COVID-19) की चपेट में थी, तब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस योजना के तहत मिलने वाले राशन को आठ महीने के लिए दोगुना और फ्री कर दिया.
Corona (COVID-19) खत्म होने के बाद भी केंद्र सरकार ने इस योजना को जारी रखा. साल 2023 में इसे एक साल के लिए और फिर 2024 में इसे पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया.
अब सरकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लाभार्थियों को राशन देती है.
भूमि अधिग्रहण और वन अधिकार अधिनियम:
मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम में सुधार किया और विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition Act 2013) के दौरान प्रभावितों को उचित मुआवजा दिलवाया। साथ ही, आदिवासी समुदायों को उनके पारंपरिक भूमि अधिकार वापस दिलाने के लिए वन अधिकार कानून लाया।
सम्मान और पुरस्कार:
डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) को उनके योगदान के लिए कई सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हुए, जिनमें पद्म विभूषण शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने 1991 में पीवी नरसिम्हा राव (P. V. Narasimha Rao) की सरकार में वित्त मंत्री के रूप में भारतीय अर्थव्यवस्था को नए आयाम दिए।
Dr. Manmohan Singh के निधन से भारतीय राजनीति और समाज के एक युग का अंत हो गया। उनकी नीतियाँ और योगदान हमेशा याद किए जाएंगे।


