प्रोफेसर मज़हर आसिफ (Mazhar Asif) को जामिया मिलिया इस्लामिया का कुलपति (Vice-Chancellor) नियुक्त किया गया है।
राष्ट्रपति ने गुरुवार (24 अक्तूबर 2024) को प्रोफेसर आसिफ की जामिया मिलिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) के कुलपति के तौर पर नियुक्ति को मंजूरी दी।
53 साल के प्रोफेसर मज़हर आसिफ (Mazhar Asif) इस समय जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के स्कूल ऑफ लैंग्वेज में प्रोफेसर हैं।
प्रोफेसर मज़हर आसिफ को जामिया मिलिया इस्लामिया के 16वें कुलपति के तौर पर पांच साल की अवधि के लिए नियुक्त किया गया है। पिछले साल नवंबर से जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति (Vice-Chancellor) का पद खाली था।
प्रोफेसर मज़हर आसिफ जामिया मिलिया इस्लामिया की पहली महिला वाइस चांसलर रहीं नज़मा अख्तर की जगह लेंगे। नज़मा अख्तर का कार्यकाल 12 नवंबर, 2023 को समाप्त हो गया था। जिसके बाद प्रोफेसर इकबाल हुसैन को कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया गया था।
प्रोफेसर मोहम्मद शकील 22 मई, 2024 से नए कुलपति की नियुक्ति तक जामिया मिलिया इस्लामिया के कार्यवाहक कुलपति के रूप में कार्यरत थे।
शिक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, “भारत की राष्ट्रपति ने जामिया मिलिया इस्लामिया के विजिटर के रूप में प्रोफेसर मज़हर आसिफ, स्कूल ऑफ लैंग्वेज, जेएनयू, नई दिल्ली को उनके कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से पांच साल की अवधि के लिए या 70 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, जामिया मिलिया इस्लामिया का कुलपति नियुक्त किया है।”
जामिया मिलिया इस्लामिया की स्थापना ब्रिटिश शासन के दौरान 1920 में हुई थी। 1988 में इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला।
कौन हैं मज़हर आसिफ?
मज़हर आसिफ (Mazhar Asif) जेएनयू के पूर्व छात्र और ABVP के सदस्य भी रहे हैं। वो नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के लिए मसौदा समिति के सदस्य भी थे।
प्रोफेसर मज़हर आसिफ शिक्षा के लिए राष्ट्रीय निगरानी समिति में काम करते हैं। वह NAAC सहकर्मी समीक्षा टीम का भी हिस्सा रहे हैं।
जेएनयू के फारसी और मध्य एशियाई अध्ययन केंद्र में प्रोफेसर आसिफ ने जेएनयू से एमए और पीएचडी की डिग्री हासिल की और पोस्टडॉक्टरल रिसर्च भी किया, जिसमें उनकी विशेषज्ञता का क्षेत्र सूफीवाद और भारत का मध्यकालीन इतिहास रहा।
जेएनयू में शामिल होने से पहले, आसिफ ने 1996 से 2017 के बीच गौहाटी विश्वविद्यालय में फारसी अध्ययन के संकाय सदस्य के रूप में भी काम किया।
प्रोफेसर आसिफ और विवाद
जेएनयू में प्रोफेसर आसिफ (Mazhar Asif) का कार्यकाल विवादों से भरा रहा है। 2017 में विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ ने संकाय में उनकी नियुक्ति को चुनौती दी थी।
जनवरी 2020 में, जेएनयू छात्र संघ ने आसिफ (Mazhar Asif) सहित कई संकाय सदस्यों पर उस महीने परिसर में हुई झड़प के दौरान हिंसा भड़काने का आरोप लगाया, जिसमें 30 से अधिक छात्र घायल हो गए थे।
छात्रों ने स्कूल ऑफ लैंग्वेज के एसोसिएट डीन, मज़हर आसिफ को कुलपति द्वारा गठित एक जांच समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त करने पर आपत्ति जताई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि “वह हमलावरों में से एक थे।”


