भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार Dilip Kumar का आज यानी 11 दिसंबर को 102वीं जयंती है।
दिलीप कुमार चुनिन्दा एक्टर्स में से एक है जिनका नाम भारतीय सिनेमा में स्वर्णाक्षरों में लिखा गया हैं। Dilip Kumar ने 50 साल से अधिक समय तक फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया था। भले ही वह अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्मों और अभिनय के योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
पेशावर के रहने वाले है Dilip Kumar
Dilip Kumar के जीवन से जुड़ी कई दिलचस्प कहानी उनके प्रशंसकों के लिए प्रेरणादायक रही हैं। जैसे कि दिलीप कुमार ने अपना नाम क्यों बदला? दिलीप कुमार का असली नाम मोहम्मद यूसुफ खान था। उनका जन्म पेशावर में हुआ था जो अब पाकिस्तान में पड़ता है। अभिनेता बनने से पहले उन्होंने अपना नाम मोहम्मद यूसुफ खान से बदलकर दिलीप कुमार रख लिया था।
मोहम्मद युसूफ कैसे बने Dilip Kumar?
उनकी आत्मकथा ‘द सब्सटेंस एंड द शैडो’ में Dilip Kumar ने इस बारे में खुलासा किया है कि उनका स्क्रीन नाम रखने का सुझाव निर्माता देविका रानी ने दिया था। देविका रानी उनकी पहली फिल्म ‘ज्वर भाटा’ के निर्माता थीं। देविका रानी ने दिलीप कुमार से कहा था कि यूसुफ, मैं सोच रही थी कि तुम्हारा फिल्मी करियर शुरू होने वाला है, और यह अच्छा होगा अगर तुम एक स्क्रीन नाम अपनाओ। एक ऐसा नाम जो दर्शकों से जुड़ सके और जो तुम्हारे रोमांटिक व्यक्तित्व के साथ मेल खाता हो। मुझे Dilip Kumar नाम बहुत अच्छा लगा। यह नाम मेरे दिमाग में आया जब मैं तुम्हारे लिए एक नाम सोच रही थी। तुमको यह नाम कैसा लगा?
Dilip Kumar के करियर की बेस्ट फिल्म है मुगल-ए-आजम
देविका रानी के इन शब्दों ने Dilip Kumar पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने सोचा कि एक स्क्रीन नाम रखना वाकई में उनके दर्शकों पर गहरा असर डाल सकता है। इसके बाद से ही उनका नाम दिलीप कुमार हो गया। उन्होंने दिलीप कुमार के रूप में एक नई पहचान बनाई। इसके बाद दिलीप कुमार ने भारतीय सिनेमा को मुगल-ए-आजम, आन, देवदास, पैगाम, राम और श्याम जैसी कई क्लासिक फिल्मे दी। दिलीप कुमार का योगदान भारतीय सिनेमा में अतुलनीय है। दिलीप कुमार की जयंती पर हम बॉलीवुड के कई एक्टर्स ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।


