बीजेपी के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने ऐसा बयान दिया है, जिसने सभी को चौंका दिया है। नितिन गडकरी ने खुलासा किया है कि उन्हें प्रधानमंत्री (Prime Minister) बनने का ऑफर मिला था। उनसे कहा गया था कि अगर वो प्रधानमंत्री पद के दावेदार बनते हैं तो उन्हें सपोर्ट दिया जाएगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने नागपुर के विदर्भ गौरव प्रतिष्ठान के कार्यक्रम में बताया कि विपक्ष के एक बड़े नेता ने उनसे संपर्क किया था। विपक्ष की तरफ से उन्हें पीएम (Prime Minister) बनने का ऑफर दिया गया था। उनसे कहा गया था कि अगर वो प्रधानमंत्री पद की रेस में शामिल होते हैं तो उन्हें सपोर्ट दिया जाएगा। लेकिन, उन्होंने विपक्ष की पेशकश को खारिज कर दिया। नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने कहा कि मुझे पद में कोई इच्छा नहीं है। मैं अपने सिद्धांतों और संगठन के प्रति वफादार हूं। मैं किसी पद के लिए समझौता नहीं कर सकता। हालांकि, नितिन गडकरी ने विपक्ष के उस नेता का नाम नहीं बताया, जिसने उनसे संपर्क करके ये बात कही थी।
नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने समारोह में चार सीनियर पत्रकारों को सम्मानित किया। इन पत्रकारों के नाम विवेक देशपांडे (पूर्व में इंडियन एक्सप्रेस में), रामू भागवत (टाइम्स ऑफ इंडिया से सेवानिवृत्त), श्रीमंत माने (संपादक, लोकमत विदर्भ) और राम भाकरे (लोकसत्ता) हैं।
इस कार्यक्रम के दौरान बीजेपी नेता नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने कहा कि राजनीति और पत्रकारिता में नैतिक्ता बहुत जरूरी है। उन्होंने एक किस्से को याद करते हुए बताया कि, एक बार वो सीपीआई के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के साथ बैठे हुए थे। उस बैठक में नितिन गडकरी ने कम्युनिस्ट नेता से कहा था कि दिवंगत एबी बर्धन नागपुर और विदर्भ के सबसे बड़े राजनेताओं में से एक थे। जब सीपीआई के नेता ने आश्चर्य जताते हुआ कहा कि बर्धन आरएसएस (RSS) के विरोधी थे, तो नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने कहा कि ईमानदार विपक्ष का सम्मान किया जाना चाहिए।


