Prashant Kishor: एक समय तक नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और जदयू (JDU) के लिए के लिए काम करने वाले प्रशांत किशोर ने फिर से सनसनी बन गए है। बिहार (Bihar) में नीतीश बाबू की नियती ऐसी है कि जिधर के होते हैं उधर ही सरकार बन जाती है। लेकिन जब तक सरकार में रहते हैं विपक्ष के भरसक निशाने पर रहते हैं। इधर नीतीश कुमार के मानसिक स्थिति पर सवालिया निशान और गहरा गया है। लोग उन्हें मेंटल बताने लगे हैं। अब प्रशांत किशोर का बयान सामने आया है। कह दिया कि अपने मंत्रियों के नाम बिना कागज देखे बता दें तो मैं आंदोलन छोड़ने को तैयार हूं। और क्या क्या बोल गए प्रशांत किशोर जिसके बाद बिहार की सियासत में सनसनी समा गई है।
प्रशांत किशोर मीडिया से मुखातिब हुए। इन दिनों पटना में गंगा किनारे सत्याग्रह आश्रम में युवाओं को सत्याग्रह की ट्रेनिंग दे रहे हैं। इसी बीच प्रशांत किशोर का एक बयान काफी वायरल हो रहा है जिसने प्रशांत कह रहे हैं कि नीतीश कुमार का 10 महीने का समय बचा हुआ है। वो मानसिक और शारीरिक रूप से थके हुए हैं। उनकी मानसिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए प्रशांत किशोर ने नीतीश सरकार पर सरापा हमला बोला। प्राशांत किशोर ने कहा कि मानसिक तौर पर नीतीश कुमार की ऐसी स्थिति नहीं है कि वो बिहार जैसे प्रदेश के मुख्यमंत्री बने रहे। कैमरे पर उन्होंने कहा कि हमलोगों ने उनके मेडिकल जांच की बात की थी, छोड़िए मेडिकल जांच अगर प्रशांत किशोर ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि सीएम नीतीश कुमार बिना कागज देखे अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों और उनके विभागों के नाम नहीं बता दें तो वो अपना पूरा आंदोलन वापस ले लेंगे, और फिर से नीतीश कुमार के समर्थन में खड़े हो जाएंगे।
बिहार की मौजूदा कानून व्यवस्था पर प्रशांत किशोर ने बड़ा बयान दिया। कहा कि जब बिहार में बालू माफिया, शराब माफिया और अफसर राज है तो फिर सुचारू कानून व्यवस्था की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि अपराधियों का सत्ता में बैठे लोगों से क्या रिश्ता है? यह सभी जानते हैं। जब मुख्यमंत्री मानसिक रूप से निर्णय लेने में सरकार चलाने में सक्षम नहीं हैं तो बिहार में ऐसी घटनाएं होना स्वाभाविक है। आपको बता दें इससे पहले तेजस्वी यादव भी लगातार मुख्यमंत्री नीतीश को थका हुआ बताते आए हैं। नेता प्रतिपक्ष कह चुके हैं कि नीतीश कुमार को उन्हीं के मंत्री बोलने नहीं देते हैं। वो पूरी तरह से टायर्ड हो गए हैं। तेजस्वी के बाद अब प्रशांत किशोर ने भी नीतीश कुमार को मानसिक और शारीरिक रूप से थका हुआ बताया है। बताते चलें कि चुनाव के मद्देजनर पीके की जन सुराज पार्टी भी तैयारियों में जुट है। गंगा किनारे जन सुराज आश्रम बन रहा है। जिसे पीके की टेंट सिटी भी कहते हैं। वहां से अब जन सुराज अपनी चुनावी रणनीति पर काम कर रही है।
बिहार में बीते दिनों प्रगति यात्रा करने के दरमियां नीतीश कुमार ने महिलाओं से बात करते बोला था कि – पहले कोई लड़की कपड़ा पहनती थी..नहीं ना…अब देखिए कितना सुंदर कपड़ा पहनती है, केतना सुंदर से बोलती है. इससे पहले भी बिहार विधानसभा चुनाव में बोलते हुए नीतीश ने वुमन अवेयरनेस को ध्यान में रखते हुए पति-पत्नि के रिश्ते और शारीरिक संबंधों को लेकर दिए बयान से काफी सनसनी मची थी। और नीतीश के विचार और मानसिक स्वास्थ पर सवाल उठने शुरू हो गए थे। एक बार तो नीतीश ने स्कूल में बंटने वाली योजनाएं जोकि एक थैले में करके बच्चों में बांटे जा रहे थे उस झोले को बच्चे का हाथ में देने के बजाय झोले को गले में पहना दिया था। नीतीश की हर हरकत को भी लोग मानसिक स्वास्थय पर सवालिया निशान लगाकर देख रहे हैं। तेजस्वी यादव तो आए दिन नीतीश को बुजुर्ग, थका हुआ और मानसिक स्थिति से कमज़ोर व्यक्ति बता कर वार करते रहते हैं इसी नाम में अब प्रशांत किशोर का भी नाम शामिल हो गया है। जहां उन्होंने नीतीश की यादाश्त और मानसिक स्थिति पर तंज कसा है, जिसका ज़िक्र राजनीतिक सुर्खियों में तेज है।
फिलहाल प्रशांत बिहार चुनाव को साधने की कोशिश में है। प्रशांत किशोर जो खुद चुनावी दलों के लिए रणनीति बनाया करते थे, वो खुद अपने पार्टी की स्थापना करते हैं। दावा करते हैं कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगे, सरकार भी बनाएंगे. प्रशांत किशोर जोकि BPSC आंदोलन, पदयात्रा और सत्याग्रह करके बिहार की राजनीति में अभिन्न बहल का हिस्सा हो गए हैं। विपक्ष के लोग कहते हैं कि प्रशांत मोदी की ही B पार्टी हैं। मोदी के ही इशारे पर ही BPSC आंदोलन में गिरफ्तार हुए और मोदी के ही इशारे पर रिहा। लेकिन BJP, RJD, JDU में एक खलबली देखी जा रही है। जन सुराज को बिहार उप चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था लेकिन राजनीति में ये जिक्र सुलग जाता है कि कहीं प्रशांत बिहार की राजनीति में विपक्ष का चेहरा तो नहीं बन रहे। फिलहाल गंगा नदी किनारे एक बड़ा सा टेंट लगा है, बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है ‘बिहार सत्याग्रह आश्रम’। यह चुनावी रणनीतिकार और जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर का नया ठिकाना है। देखना है कि BPSC आंदोलन, सत्याग्रह और बयानों के वार-पलट वार से उन्हें उनकी राजनीति कितनी पक कर सामने आती है…और क्या नीतीश वाकई थक गए हैं, मानसिक रूप से परेशान हैं या फिर विपक्ष की चकमा खा रहा है. खेला कुछ और ही होने वाला है.सब साफ होगा बिहार चुनाव में.


