Paris Paralympics 2024: पेरिस में चल रहे पैरालंपिक में भारत ने इतिहास रच दिया है। हर दिन हर रंग के पदकों में इज़ाफ़ा हो रहा है जिससे भारत ने नए कीर्तिमान रच दिए हैं। आइए जानते हैं भारत की दामन में सोना-चांदी टांकने वाले कुछ इन खिलाड़ियों के बारे में।
Paris Paralympics 2024: हिन्दी में एक कहावत है। वो कहते हैं कि ‘मन के हारे हार है, मन के जीते-जीत।’ यानी हार तब होती है जब मान लिया जाता है, और जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है। पेरिस पैरालंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने ये सिद्ध कर दिया है कि किसी भी तरह का अभाव आपके रास्ते में रोड़ा नहीं बन सकता जब तक आप ख़ुद थक कर नहीं बैठ जाते। हिम्मत हो और कुछ कर गुज़रने का जुनून हो तो प्रकृति भी आपकी हमसफ़र बन जाती है।
पेरिस पैरालंपिक में बना इतिहास
Paris Paralympics में भारतीय खिलाड़ियों का दमदार प्रदर्शन चर्चा और गौरव का विषय बना हुआ है। आए दिन पदक के सभी रंगों में इज़ाफ़ा हो रहा है जिससे मेडल टैली में भी भारतीय दल सम्मानजनक स्थिति में पहुंच गया है। 5 गोल्ड, 9 सिल्वर, 10 ब्रॉन्ज यानी 5 सितंबर की दोपहर तक कुल 24 पदकों के साथ भारत मेडल टैली में 13वें नम्बर पे पहुंच गया है।
अभी तक कुल 24 पदक के साथ भारत ने टोक्यो पैरालंपिक में 19 मेडल जीतने के अपने ही रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है। ये अनुमान लगाया जा रहा है कि पैरालंपिक ख़त्म होने तक भारत मे़डल टैली में टॉप 10 में फिनिश करेगा।
पैरालंपिक के अब तक के 24 पदक आधे मेडल भारत को पैरा एथलेटिक्स में मिले, जबकि पैरा बैडमिंटन में भारत ने 5 मेडल जीते।
हरविंदर सिंह ने बना डाली हिस्ट्री
4 सितंबर को हरविंदर सिंह ने पैरालंपिक गोल्ड मेडल जीता। वह Paris Paralympics में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय तीरंदाज बन गए हैं। उन्होंने पुरुषों की व्यक्तिगत रिकर्व ओपन स्पर्धा में यह खास उपलब्धि हासिल की। वे 2018 जकार्ता एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे थे। हरविंदर ने टोक्यो पैरालंपिक में ब्रॉन्ज जीता था, ये भा अपने आप में इतिहास था क्योंकि क्योंकि यह भारत का पहला तीरंदाजी पदक था। तीरंदाजी में सफलता के साथ वह इकोनॉमिक्स में पीएचडी की डिग्री भी ले रहे हैं। कोविड-19 महामारी के कारण लगे लॉकडाउन में उनके पिता ने अपने खेत को तीरंदाजी रेंज में बदल दिया ताकि वह ट्रेनिंग कर सकें।
क्लब थ्रो में भी बरसा सोना-चांदी
वहीं, धर्मवीर ने भी पुरुषों के क्लब थ्रो F51 फाइनल में गोल्ड हासिल किया, धर्मबीर ने फाइनल मुकाबले में शुरुआती चार थ्रो फाउल किए। फिर पांचवें थ्रो से उन्होंने 34.92 की दूरी हासिल की और यही उनका बेस्ट थ्रो रहा, जिससे गोल्ड अपने नाम किया। इसके बाद छठे थ्रो में धर्मबीर ने 31.59 मीटर की दूरी हासिल की थी। इस तरह शुरुआती चार थ्रो फाउल करने के बाद भी धर्मबीर ने गोल्ड मेडल पर कब्जा किया।
वहीं इसी इवेंट में प्रणव सोरमा ने भी सिल्वर जीता। दूसरी तरफ प्रणव सूरमा ने अपने पहले ही थ्रो में बेस्ट हासिल कर लिया। उनका पहला थ्रो 34.59 का रहा, जिसने उनके खाते में सिल्वर मेडल डाल दिया था। फिर दूसरे थ्रो में उन्होंने 34.19 की दूसरी तय की और तीसरा थ्रो फाउल रहा। इसके बाद चौथे थ्रो में 34.50, पांचवें में 33.90 और छठे थ्रो में 33.70 की दूरी हासिल की।


