देश की राजधानी Delhi में सर्दी के दस्तक देने के साथ ही प्रदूषण बढ़ने लगा है।
गुरुवार सुबह को Delhi में प्रदूषण का लेवल 332 के पार बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गया। दिल्ली में लगातार तीसरे दिन AQI 300 के ऊपर रिकॉर्ड किया गया है। दिल्ली का आनंद विहार और जहांगीरपुरी सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्रों में शामिल हैं। दोनों ही जगहों का AQI 400 तक पहुंच गया है। वहीं, ओखला का AQI 328 रहा।
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए GRAP 2 भी लागू कर दिया है। दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण का सबसे बुरा प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। Delhi में आमतौर पर लोग सुबह इंडिया गेट के पास टहलने, व्यायाम करने और साइकिलिंग करने जाते हैं। लेकिन प्रदूषण के बढ़ने के कारण इंडिया गेट से लोग नदारद हो गए है।
Delhi में GRAP 2 हुआ लागू
Delhi में बढ़ते प्रदूषण के कारण आतिशी सरकार ने सोमवार को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू कर दिया है। GRAP 2 के तहत दिल्लीवासियों पर कुछ प्रतिबंध लगाए जाते हैं। इस प्लान के जरिए प्रदूषण को कंट्रोल करने की कोशिश की जाती है।
आपको बता दें कि GRAP को चार चरण में लागू किया जाता है। जब दिल्ली में AQI 201 से 300 के बीच रहता है तो GRAP 1 को लागू किया जाता है। इसके बाद अगर हवा ज्यादा खराब होती है और AQI 301 से 400 तक पहुंच जाता है तो GRAP 2 को लागू किया जाता है। AQI के 400 के पार जाने के बाद GRAP 3 को लागू किया जाता है। AQI 400 के पार जाने पर GRAP का चौथा चरण लागू किया जाता है।
कैसे मापी जाती है एयर क्वालिटी?
हवा की क्वालिटी को वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) से मापा जाता है। AQI एक इकाई है जिसके जरिए पता चलता है कि किसी क्षेत्र में हवा कितनी साफ है। आपको बता दें कि AQI थर्मामीटर की तरह काम करता है, लेकिन तापमान के जगह हवा में प्रदूषण की मात्रा को मापता है। किसी क्षेत्र के AQI को 0 से 500 के पैमाने पर मापा जाता है।
किसी शहर में अगर AQI जीरो से 50 के बीच रहता है तो AQI को अच्छा माना जाता है। 51 से 100 तक के AQI को संतोषजनक माना जाता है। 101 से 200 के बीच के AQI को मध्यम माना जाता है। वहीं, 201 से 300 के बीच AQI को खराब माना जाता है। अगर किसी क्षेत्र का AQI 301 से 400 के पार पहुंच गया तो बहुत खराब श्रेणी में रखा जाता है। 401 से 500 के बीच AQI होने पर गंभीर श्रेणी में रखा जाता है।


