Pralay Missile: इस साल गणतंत्र दिवस परेड में भारत की मिलिट्री पॉवर और स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों यानि Indigenous defence technologies का प्रदर्शन किया जाएगा। इस साल के परेड में एक खास आकर्षण बनने जा रही है प्रलय मिसाइल, जिसे पहली बार कर्तव्य पथ पर लाया जाएगा। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस बात की जानकारी दी है कि ये प्रलय मिसाइल Indigenous forms से विकसित की गई है और ये परंपरागत हथियारों को लेकर दुश्मन के इलाके में अंदर तक हमला करने में सक्षम है। इस मिसाइल को भारत की बढ़ती मिलिट्री पॉवर और सेल्फ रिलायंस का प्रतीक माना जा रहा है।
प्रलय मिसाइल भारत की स्वदेशी रक्षा प्रणाली का एक अहम हिस्सा है, जिसे भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानि DRDO ने विकसित किया है। ये एक छोटी दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है, जो 150 से 500 किलोमीटर तक अपने लक्ष्य को सटीकता से भेदने में सक्षम है।इस मिसाइल की खासियत इसकी हाई एक्यूरेसी और दुश्मन के इलाके में गहरे तक घुसकर हमला करने की क्षमता है। प्रलय मिसाइल को अपनी सटीकता के लिए जाना जाता है, जो इसे अलग-अलग मिलिट्री ऑपरेशन में काफी उपयोगी बनाता है। ये एक State-of-the-art systems है, जिसमें मिसाइलों की तरह काम करने की क्षमता है और ये दुश्मन के रक्षात्मक तंत्र को आसानी से खत्म करने में सक्षम है।
इस मिसाइल का डिज़ाइन इस तरह किया गया है कि ये मुश्किल से मुश्किल तंत्र को भी चकमा दे सकती है, जिससे दुश्मन की मिलिट्री पॉवर को इनएफ्फेक्टिव बना देती है। प्रलय मिसाइल 500 से 1000 किलोग्राम तक भार ले जाने में सक्षम है।इसका मतलब ये है कि ये केवल छोटी दूरी पर हमला करने वाली मिसाइल नहीं है, बल्कि इसमें भारी गोला-बारूद भी ले जाने की क्षमता है।इस वजह से ये मिसाइल अलग-अलग तरह के युद्ध संचालन में उपयोगी हो सकती है।प्रलय मिसाइल की एक्यूरेसी हाई लेवल की है।सटीक रूप से भेदना इसका मुख्य गुण है, जिससे दुश्मन की सेनाओं के लिए ये एक खतरनाक अस्तित्व बनती है।
इस मिसाइल का फायरपॉवर 150 किलोमीटर से 500 किलोमीटर तक है, जो इसे हमले करने की अनुमति देती है।ये मिसाइल अपनी दूरदर्शिता यानि फॉरसाइट और सटीकता की वजह से खास साबित हो सकती है, खासकर युद्ध के उन स्थितियों में जब दुश्मन की मिलिट्री सिस्टम पर फौरन हमला करना हो। प्रलय मिसाइल का विकास भारतीय रक्षा उद्योग और भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है, जो भारत की आत्मनिर्भरता को दिखाता है। इस मिसाइल के निर्माण से भारत अपनी रक्षा तैयारियों में आत्मनिर्भर हो गया है और विदेशी स्रोतों पर निर्भरता को कम किया है। परेड में प्रलय मिसाइल के शामिल होने से न केवल भारत की मिलिट्री पॉवर का प्रदर्शन होगा, बल्कि ये भी साफ होगा कि भारत अब अपने defense equipments की बनावट में पूरी तरह से सक्षम है। ये भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा और दुनिया को ये संदेश देगा कि भारत अब अपने रक्षा साजो-सामान को पूरी तरह से स्वदेशी तरीके से विकसित करने में सक्षम है। प्रलय मिसाइल के अलावा, इस परेड में और भी कई स्वदेशी हथियार प्रणालियों को प्रदर्शित किया जाएगा, जैसे कि brahmos missile , मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर, टी-90 टैंक और नाग मिसाइलें।ये सभी उपकरण भारत की मजबूत मिलिट्री पॉवर और सेल्फ डिफेन्स को दिखाते हैं। इसके अलावा, इस परेड में भारत की सांस्कृतिक विरासत का भी जश्न मनाया जाएगा, जिसमें भारतीय संविधान के 75 वर्ष पूरे होने के प्रतीक के तौर पर दो खास झांकियां निकाली जाएंगी।
इस साल की गणतंत्र दिवस परेड का महत्व बस मिलिट्री पॉवर को दिखाने तक सीमित नहीं होगा। भारतीय संविधान के 75 साल पूरे होने के अवसर पर दो विशेष झांकियां प्रदर्शित की जाएंगी, जो भारतीय संविधान की यात्रा और उसकी उपलब्धियों को दिखांएंगे।।। ये झांकियां संविधान के गठन, इसके उद्देश्यों को दिखाएंगी।इसके साथ ही, परेड में अलग-अलग राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों की झांकियां भी शामिल होंगी।। लगभग 90 मिनट की परेड में 31 झांकियां दिखाई जाएंगी, जिनमें 16 राज्यों और 15 केंद्रीय मंत्रालयों की झांकियां शामिल होंगी।ये झांकियां भारतीय समाज, संस्कृति को प्रस्तुत करेंगी


