इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस शेखर कुमार यादव का एक विवादित बयान वायरल हो रहा है। Kapil Sibal ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज के खिलाफ संसद में प्रस्ताव लाएंगे।
जस्टिस शेखर कुमार ने रविवार को प्रयागराज में विश्व हिंदू परिषद की लीगल सेल के एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। इसी कार्यक्रम में उन्होंने विवादित बयान दिया था। जस्टिस शेखर ने कहा कि मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि हिंदुस्तान बहुसंख्यकों की इच्छा के हिसाब से चलेगा। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कठमुल्ला शब्द गलत है लेकिन यह कहने में परहेज नहीं है क्योंकि वो देश के लिए बुरा है। वो जनता को भड़काने वाले लोग हैं। देश आगे न बढ़े, इस प्रकार की सोच के लोग है। उनसे सावधान रहने की जरूरत है।
जज को ऐसे शब्द शोभा नहीं देते हैं- Kapil Sibal
राज्यसभा के सांसद और वकील Kapil Sibal ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ये भारत को तोड़ने वाली बात है। राजनेता भी ऐसी बात नहीं करते हैं और वो तो संविधान की रक्षा के पद पर बैठे हैं। उनको ये शब्द शोभा नहीं देते हैं। Kapil Sibal ने कहा कि ऐसे बयान देने वाले जज की नियुक्त कैसे होती है। ऐसे बयान देने की लोगों की हिम्मत कैसे होती है।
ये पिछले 10 साल में ही क्यों हो रहा है। कुछ लोग हैं जो ऐसे बयान देते हैं और इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो जाते हैं। इसके बाद राज्यसभा सदस्य बन जाते हैं। मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट को सख्त कदम उठाने चाहिए। Kapil Sibal ने कहा कि उस शख्स को कुर्सी पर नहीं बैठने देना चाहिए। एक भी केस उसके पास नहीं जाना चाहिए।
जज को हटाने के लिए संसद में लाएंगे प्रस्ताव- Kapil Sibal
Kapil Sibal ने कहा कि दिग्विजय सिंह, विवेक तन्खा, जावेद अली, मोहन झा, सीपीएम पार्टी आदि से चर्चा हुई है। हम जल्द ही मिलेंगे और जज को हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि और कोई रास्ता बचा नहीं है, जो भी लोग न्यायपालिका की स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं, वे सारे लोग हमारे साथ आएंगे।
राज्यसभा सांसद ने आगे कहा कि पक्ष-विपक्ष की बात नहीं है, ये न्यायपालिका की स्वतंत्रता की बात है तो पीएम, गृह मंत्री और सत्ता में बैठे लोग हमारा साथ दें। अगर वो साथ नहीं देंगे तो लगेगा कि वो जज के साथ हैं, क्योंकि कोई ऐसा नहीं कर सकता है। कोई नेता भी ऐसा बयान नहीं दे सकता है तो एक जज कैसे दे सकता है।
इस देश में हलाला तीन तलाक नहीं चलेगा- जस्टिस शेखर
जस्टिस शेखर कुमार यादव ने यूनिफॉर्म सिविल कोड पर कहा कि यह देश भारत है, यहां रहने वाले भारतीय हैं। देश एक है और एक संविधान है तो कानून क्यों नहीं है? देश के महापुरुषों का अनादर करने का अधिकार नहीं है। इस देश में हलाला तीन तलाक नहीं चलने वाला है।
जस्टिस शेखर ने मुस्लिम समुदाय का नाम लिए बिना कहा कि हमारे यहां बच्चा जन्म लेता है तो ईश्वर की तरफ ले जाते हैं। वेद मंत्र बताते हैं, उनके यहां बच्चों के सामने बेजुबानों का बेरहमी से वध किया जाता है। फिर कैसे अपेक्षा की जाती है कि वो उदार होगा।
पर्सनल लॉ को स्वीकार नहीं किया जाएगा- जस्टिस शेखर
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस शेखर कुमार यादव ने अपने संबोधन में ये भी जोड़ा कि आप चार पत्नियां रखने, हलाला करने या तीन तलाक करने का अधिकार नहीं मांग सकते। अगर आप कहते हैं कि हमारा पर्सनल लॉ इसकी अनुमति देता है, तो इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अगर आप कहते हैं कि हमें तीन तलाक देने और महिलाओं को भरण-पोषण न देने का अधिकार है। लेकिन यह अधिकार काम नहीं करेगा। आप उस महिला का अपमान नहीं कर सकते जिसे हिंदू शास्त्रों और वेदों में देवी माना जाता है।


