विवादित अफसर पूजा खेडकर (Puja Khedkar) को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से बर्खास्त कर दिया गया है। पूजा खेडकर 2023 बैच की ट्रेनी अफसर थीं। उन्हें सिविल सेवा परीक्षा (CSE-2022) में 841वीं रैंक मिली थी।
शुक्रवार (6 सितंबर) को जारी आदेश के मुताबिक, केंद्र सरकार ने पूर्व ट्रेनी IAS पूजा खेडकर को तत्काल प्रभाव से सेवामुक्त कर दिया है। पूजा खेडकर के खिलाफ ये कार्रवाई IAS (परिवीक्षा) नियम, 1954 के नियम 12 के तहत की गई है।
पूजा खेडकर को अपने गृह राज्य (महाराष्ट्र कैडर) में प्रोबेशनरी अफसर के तौर पर तैनाती मिली थी। पूजा खेडकर जून 2024 से IAS की ट्रेनिंग कर रही थीं। उन पर आरोप है कि उन्होंने आरक्षण का फायदा उठाने के लिए सिविल सर्विस परीक्षा 2022 में खुद से जुड़ी गलत जानकारी दी थी।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने अपनी जांच में पूजा खेडकर को दोषी पाया था। इसके बाद 31 जुलाई को पूजा का सेलेक्शन रद्द कर दिया गया था।
पूजा खेडकर पर उम्र, माता-पिता की गलत जानकारी, पहचान बदलकर तय सीमा से ज्यादा बार सिविल सर्विसेस की परीक्षा देने का आरोप था। सेलेक्शन रद्द होने के बाद पूजा का पद छिन गया। उन पर भविष्य में UPSC के किसी भी एग्जाम में शामिल होने पर रोक लग गई।
यूपीएससी ने पूजा के खिलाफ पुलिस में मामला भी दर्ज कराया था कि उन्होंने अपनी फर्जी पहचान बताकर सिविल सेवा परीक्षा में निर्धारित प्रयासों से अधिक बार परीक्षा देकर धोखाधड़ी की है।
पूजा ने गिरफ़्तारी से बचने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने उनकी ‘तत्काल गिरफ़्तारी’ पर रोक लगाकर राहत दे दी थी।

पूजा खेडकर से जुड़े विवाद:-
पूजा खेडकर को आईएएस बनने के बाद से ही लगातार विवादों में थीं। यहां तक की उनके माता-पिता भी विवादों में थे।
पुणे में सहायक कलेक्टर के तौर पर तैनाती हुई लेकिन चार्ज संभालने से पहले अलग चेंबर, कार और घर की मांग की।
प्राइवेट कार पर लाल-नीली बत्ती और महाराष्ट्र सरकार का स्टिकर लगाकर घूमने पर विवाद हुआ।
विकलांगता सर्टिफिकेट में पूजा खेडकर का एड्रेस ‘प्लॉट नंबर 53, देहू अलंदी रोड, तलावडे, पिंपरी चिंचवाड़, पुणे’ लिखा गया था। जबकि इस एड्रेस पर कोई घर नहीं, बल्कि थर्मोवर्टा इंजीनियरिंग कंपनी नाम की एक फैक्ट्री है। पूजा की जिस ऑडी को जब्त किया गया था, वह इसी कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड थी।
सरकारी नियमों के तहत विकलांगता सर्टिफिकेट बनाने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है, लेकिन पूजा के सर्टिफिकेट में राशन कार्ड लगाया गया था।
विकलांग कोटे से UPSC में सेलेक्शन होने के बाद से पूजा के कई विकलांगता सर्टिफिकेट सामने आ चुके हैं। पूजा खेडकर ने 2018 और 2021 में अहमदनगर डिस्ट्रिक्ट सिविल हॉस्पिटल की ओर से जारी 2 विकलांग सर्टिफिकेट UPSC को सौंपे थे।
पूजा ने अपनी विकलांगता सर्टिफिकेट की पुष्टि के लिए दिल्ली में मेडिकल जांच के लिए कई बार अपॉइंटमेंट लिया था, लेकिन बाद में उन्होंने एक प्राइवेट हॉस्पिटल में बनी रिपोर्ट को UPSC में जमा कर दिया।
यशवंत राव चह्वाण मेमोरियल (YCM) अस्पताल ने साफ कर दिया है कि पूजा खेडकर का लोकोमीटर सर्टिफिकेट बनाने में कोई गलती नहीं हुई। सर्टिफिकेट में पूजा को 7% लोकोमीटर डिसेबिलिटी बताई गई थी। अस्पताल को पिंपरी चिंचवाड नगर निगम संचालित करता है।
पूजा ने UPSC को दिए एक हलफनामे में दावा किया था कि वह मानसिक रूप से अक्षम हैं और उन्हें देखने में भी दिक्कत होती है।
पूजा ने मेडिकल टेस्ट देने से 6 बार मना किया था, जबकि मेडिकल टेस्ट देना जरूरी होता है।
कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूजा का पहला मेडिकल टेस्ट दिल्ली AIIMS में अप्रैल 2022 में शेड्यूल हुआ था। उन्होंने कोविड पॉजिटिव होने का हवाला देकर इसमें शामिल होने से मना कर दिया था।
पूजा खेडकर के पिता दिलीप खेडकर महाराष्ट्र सरकार के रिटायर्ड अफसर हैं। भ्रष्टाचार के आरोप में दो बार सस्पेन्ड हुए थे।


