सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को बिहार के पूर्व मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की 1998 की हत्या के मामले में पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला सहित दो लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के बहुचर्चित बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड में फैसला सुना दिया है।
अदालत ने गुरुवार को इस मामले में पूर्व विधायक विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला सहित दो लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
कोर्ट (Supreme Court) ने हत्या के सभी आरोपियों को बरी करने के पटना हाईकोर्ट के आदेश को आंशिक रूप से खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति आर महादेवन की बेंच ने इस मामले में दोषी मंटू तिवारी और पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला को 15 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने को कहा है।
हालांकि, शीर्ष अदालत (Supreme Court) ने पूर्व सांसद सूरजभान सिंह सहित छह अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ दिया और मामले में पटना हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार उन्हें बरी कर दिया।
3 जून, 1998 को पटना के आईजीआईएमएस अस्पताल परिसर में बिहार के पूर्व मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या कर दी गई थी। 2009 में पटना सिविल कोर्ट ने सूरजभान सिंह और मुन्ना शुक्ला समेत 8 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 2014 में पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए सभी आठ आरोपियों को बरी कर दिया था।
बृज बिहारी प्रसाद लालू प्रसाद की पार्टी आरजेडी के बड़े नेता थे। उनकी हत्या मामले में श्रीप्रकाश शुक्ला का भी नाम सामने आया था।
शिवहर की पूर्व सांसद और बीजेपी नेता रमा देवी ने सीबीआई के साथ मिलकर हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती दी थी, जिसमें उनके पति बृज बिहारी प्रसाद की हत्या के मामले में आठ लोगों को बरी कर दिया गया था।


