Supreme Court ने बुधवार को बुलडोजर एक्शन पर बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन को कानून का उल्लंघन बताया।
Supreme Court ने कहा कि किसी भी मामले में आरोपी होने या दोषी ठहराए जाने पर भी घर तोड़ना सही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अफसर जज नहीं बन सकते। वे तय नहीं करें कि दोषी कौन है? ताकत के गलत इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने बुल्डोजर एक्शन के लिए 15 गाइडलाइन जारी की है।
बुलडोजर एक्शन पक्षपातपूर्ण नहीं हो सकता- Supreme Court
जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथ की बेंच ने मामले पर फैसला सुनाया है। 1 अक्टूबर को सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। आपको बता दें कि बुलडोजर एक्शन के खिलाफ जमीत उलेमा-ए-हिंद समेत अन्य लोगों ने याचिका दी थी। मामले की सुनवाई करते हुए Supreme Court ने 17 सितंबर को बुलडोजर एक्शन पर रोक लगा दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान यूपी सरकार को जमकर फटकार लगाई थी। Supreme Court ने कहा कि हमने विशेषज्ञों के सुझावों पर विचार किया है। हमने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि कानून का राज होना चाहिए। बुलडोजर एक्शन पक्षपातपूर्ण नहीं हो सकता है। गलत तरीके से घर तोड़ने पर पीड़ितों को मुआवजा मिलना चाहिए।
सरकार शक्तियों का दुरुपयोग नहीं कर सकती- Supreme Court
Supreme Court ने अपने फैसले में कहा कि बुलडोजर एक्शन का मनमाना रवैया बर्दाश्त नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि आरोपी एक है तो घर तोड़कर पूरे परिवार को सजा क्यों दी जाए? परिवार से उनका घर नहीं छीना जा सकता है। फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बुलडोजर एक्शन दिखाता है कि लोगों के बीच कानून का भय नहीं है।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि घर एक सपने की तरह होता है। किसी का घर उसकी अंतिम सुरक्षा होती है। कोर्ट ने कहा कि सरकारी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। अपराध की सजा घर तोड़ना नहीं है। सरकार किसी भी आरोपी का घर नहीं गिरा सकती है।
DM नोडल अधिकारी नियुक्त करें
Supreme Court ने बुल्डोजर एक्शन पर गाइडलाइन जारी करते हुए कहा कि बुलडोजर एक्शन को लेकर कम से कम 15 दिन की मोहलत दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि नोडल अधिकारी को 15 दिन पहले नोटिस भेजना होगा। नोटिस विधिवत तरीके से भेजा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह नोटिस निर्माण स्थल पर चस्पा नहीं कर सकते है।
इस नोटिस को डिजिटल पोर्टल पर डालना होगा। कोर्ट ने इसके लिए तीन महीने के भीतर पोर्टल बनाने को कहा है। पोर्टल पर इन नोटिसों का जिक्र करना जरूरी होगा। कोर्ट ने कहा कि हर जिले का डीएम अपने क्षेत्राधिकार में किसी भी संरचना के विध्वंस को लेकर एक नोडल अधिकारी को नियुक्त करेगा। यह नोडल अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया को सुनिश्चित करेगा।
बुल्डोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी की 15 गाइडलाइंस
- अगर बुलडोजर एक्शन का ऑर्डर दिया जाता है तो इसके खिलाफ अपील करने के लिए वक्त दिया जाना चाहिए।
- रातोंरात घर गिरा दिए जाने पर महिलाएं-बच्चे सड़कों पर आ जाते हैं। ये सही नहीं है। उन्हें अपील का वक्त नहीं मिलता।
- हमारी गाइडलाइन अवैध अतिक्रमण जैसे सड़कों या नदी के किनारे पर किए गए अवैध निर्माण के लिए नहीं है।
- शो कॉज नोटिस के बिना कोई निर्माण नहीं गिराया जाएगा।
- रजिस्टर्ड पोस्ट के जरिए कंस्ट्रक्शन के मालिक को नोटिस भेजा जाएगा। साथ ही इसे दीवार पर भी चिपकाया जाए।
- नोटिस भेजे जाने के बाद 15 दिन का समय दिया जाए।
- कलेक्टर और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को भी जानकारी दी जाए।
- डीएम और कलेक्टर ऐसी कार्रवाई पर नजर रखने के लिए नोडल अफसर की नियुक्ति करें।
- नोटिस में बताया जाए कि निर्माण क्यों गिराया जा रहा है? इसकी सुनवाई कब होगी? किसके सामने होगी। एक डिजिटल पोर्टल हो, जहां नोटिस और ऑर्डर की पूरी जानकारी हो।
- अधिकारी पर्सनल हायरिंग करें और इसकी रिकॉर्डिंग की जाए। फाइनल ऑर्डर पास किए जाएं और इसमें बताया जाए कि निर्माण गिराने की जरूरत है कि नहीं। साथ ही यह भी बताए कि निर्माण को गिराया जाना आखिरी रास्ता है।
- ऑर्डर को डिजिटल पोर्टल पर भी दिखाया जाए।
- अवैध निर्माण गिराने का ऑर्डर दिए जाने के बाद व्यक्ति को 15 दिन का मौका दिया जाए, ताकि वह खुद अवैध निर्माण को गिरा सके या हटा सके।
- निर्माण गिराए जाने की कार्रवाई की वीडियोग्राफी की जाए। इसे सुरक्षित रखा जाए और कार्रवाई की रिपोर्ट म्युनिसिपल कमिश्नर को भेजी जाए।
- गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर कोर्ट की अवमानना मानी जाएगी। इसका जिम्मेदार अधिकारी को माना जाएगा और उसे गिराए गए निर्माण को दोबारा अपने खर्च पर बनाना होगा और मुआवजा भी देना होगा।
- कोर्ट ने कहा कि हमारे डायरेक्शन सभी मुख्य सचिवों को भेज दिए जाएं।


