बुलडोजर एक्शन (Bulldozer Action) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सख्त कदम उठाया है। देश की सर्वोच्च न्यायालय ने पूरे देश में बुलडोजर एक्शन पर रोक लगाई है। ये रोक 1 अक्टूबर तक लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने ये साफ किया है कि ये रोक सार्वजनिक रास्तों, रेलवे ट्रैक और फुटपाथ पर अवैध निर्माण के खिलाफ होने वाली कार्यवाई पर लागू नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा है कि किसी की संपत्ति को बुलडोजर (Bulldozer Action) द्वारा जमींदोज किए जाने से पहले कोर्ट से परमिशन लेनी होगी। ये रोक 1 अक्टूबर तक लागू रहेगी। उस दिन अदालत में सुनवाई होगी, जिसके बाद भविष्य को लेकर फैसला दिया जाएगा।
अब से पहले 2 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुलडोजर एक्शन पर सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि कानून की नजर में अगर कोई इंसा दोषी हो, तो भी उसके घर को नहीं गिराया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी बुलडोजर न्याय (Bulldozer Action) के खिलाफ दायर याचिका पर की थी। ये याचिका जमीयत-उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulema-e-Hind) की ओर से दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि बीजेपी (BJP) शासित राज्यों में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है और बुलडोजर एक्शन (Bulldozer Action) लिया जा रहा है।
जस्टिस के वी विश्वनाथन (Justice K.V. Viswanathan) और जस्टिस बीआर गवई (Justice B R Gavai) की बेंच ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा था- “किसी पिता का बेटा उद्दंड हो सकता है, लेकिन इस आधार पर घर गिरा देना! यह कार्रवाई का सही तरीका नहीं है। अगर कोई दोषी भी हो, तब भी ऐसी कार्रवाई नहीं की जा सकती है।”


