उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब केंद्र सरकार नहीं, बल्कि राज्य सरकार ही DGP तय करेगी।
सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य कैबिनेट ने DGP की नियुक्ति से जुड़े नियमों को हरी झंडी दी।
नए नियमों के मुताबिक, उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति राज्य के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का चुनाव करेगी।
अब राज्य सरकार को DGP की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) पैनल को नाम भेजने की जरूरत नहीं होगी।
यूपी सरकार का दावा है कि DGP की नियुक्ति की यह प्रक्रिया स्वतंत्र और पारदर्शी है। सोमवार को लखनऊ में हुई कैबिनेट बैठक में नियुक्ति नियम, 2024 को मंजूरी दी गई।
उत्तर प्रदेश में चयन समिति के जरिए डीजीपी की नियुक्ति के लिए नए नियमों की मंजूरी पर विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है।
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ट्वीट किया है- “सुना है किसी बड़े अधिकारी को स्थायी पद देने और उसका कार्यकाल 2 साल बढ़ाने की व्यवस्था बनायी जा रही है…”
अखिलेश ने आगे लिखा- “सवाल ये है कि व्यवस्था बनानेवाले ख़ुद 2 साल रहेंगे या नहीं। कहीं ये दिल्ली के हाथ से लगाम अपने हाथ में लेने की कोशिश तो नहीं है।”
अखिलेश यादव ने अपने ट्वीट के आखिर में लिखा है – दिल्ली बनाम लखनऊ 2.0
AAP सांसद संजय सिंह का कहना है- “मैंने आज तक नहीं सुना कि उत्तर प्रदेश सरकार ने कैबिनेट में पास किया हो कि DGP का कार्यकाल 2 साल का होगा और राज्य सरकार उसे नियुक्त करेगी।”
उन्होंने आगे कहा- “दरअसल अमित शाह अपना DGP लगाना चाहते हैं और योगी आदित्यनाथ अपना DGP रखना चाहते हैं झगड़ा इसी बात का है।”


