साइबर क्राइम की दुनिया में एक नए तरह के फ्रॉड का जन्म हुआ है, इसका नाम है डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) या डिजिटल हाउस अरेस्ट (Digital House Arrest)। डिजिटल अरेस्ट के केस लगातार बढ़ रहे है। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि डिजिटल अरेस्ट क्या है, अपराधी किस तरह से इसे अंजाम दे रहे है और अपराधियों के बनाए गए इस जाल में फंसने से कैसे बचा जा सकता है। डिजिटल अरेस्ट की तह तक जाने से पहले हम आपको दिल्ली से सटे नोएडा का एक मामला बताते हैं।
रिटायर्ड मेजर जनरल को किया डिजिटल हाउस अरेस्ट
नोएडा के सेक्टर 31 में रहने वाले रिटायर्ड मेजर जनरल एनके धीर को डिजिटल हाउस अरेस्ट किया गया था। उन्हें 10 अगस्त को एक अंजान नंबर से कॉल आया। फोन पर बताया गया कि उनके नाम से एक पार्सल ताइवान जा रहा है। उस पार्सल को जब खोला गया तो उसमें से ड्रग्स बरामद हुई। फोन पर ये इन्फॉर्मेशन देने के बाद एनके धीर को एक Whatsapp call आया। इस बार फोन करने वालों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच (Mumbai Crime Branch) से बताया। एनके धीर को बताया गया कि उनकी इंवेस्टिगेशन हो रही है। एनके धीर से कहा गया कि जब तक जांच पूरी नहीं होती तब तक वो घर में ही रहेंगे। पूछताछ के दौरान पीड़ित से बैंक डिटेल, म्यूचुअल फंड और एफडी की जानकारी ली गई। इसके बाद 14 अगस्त को पीड़ित के एकाउंट से 2 करोड़ रुपये एक दूसरे एकाउंट में ट्रांसफर करा लिए गए। जब तक एनके धीर को ठगी का एहसास हुआ, तब तक देर हो चुकी थी। फिलहाल नोएडा पुलिस ने मामला दर्ज कर मामले की जांच शुरु कर दी है।
क्या होता है Digital Arrest?
ब्लैकमेलिंग के इस नए तरीके में साइबर अपराधी, सीबीआई ऑफिसर, ईडी अधिकारी, कस्टम ऑफिसर या पुलिस बनकर कॉल करते हैं। फोन पर बताया जाता है कि आपके आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोन नंबर से कोई गैरकानूनी काम हुआ है। जिसके लिए जेल की सजा होगी। गिरफ्तारी का डर दिखा कर आदमी को उसी के घर में कैदी बना दिया जाता है। यहां सारा खेल विजुअल का होता है। साइबर अपराधी जब अपने शिकार को वीडियो कॉल करते हैं, तो उस वक्त उनके आस पास का नजारा किसी पुलिस स्टेशन की तरह होता है। वर्दी पहने लोगों को देखकर पीड़ित उन पर विश्वास कर लेता है। इसी का फायदा उठाकर अपराधी पीड़ित पर हावी हो जाते हैं। पीड़ित को उसी के घर में कैद कर लिया जाता है। पीड़ित पर इस तरह का दबाव बनाया जाता है कि वो अपने परिवार से भी कुछ शेयर नहीं करता है। इस मानसिक तनाव के बीच पीड़ित से बैंक डिटेल मांगी जाती है, और फिर उसका अकाउंट खाली कर दिया जाता है।
Digital Arrest के दौरान क्या होता है
- आपको सीबीआई, ईडी, क्राइम ब्रांच, पुलिस के नाम से फोन आता है।
- आपकी वो गलती बताई जाती है जो आपको पता ना हो।
- जांच पूरी होने तक डिजिटल अरेस्ट किया जाता है।
- डिजिटल अरेस्ट के दौरान आपको हर समय कैमरे के सामने रहने के लिए कहा जाता है।
- किसी से भी बात करने पर पाबंदी लगाई जाती है।
Digital Arrest से बचने के लिए क्या करें
साइबर एक्सपर्ट का मानना है कि साइबर क्राइम में वॉट्सएप के वीडियो कॉल का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। सोशल मीडिया और वॉट्सऐप पर हमें सतर्क रहना चाहिए। अनजान वीडियो कॉल को रिसीव ना करें। अगर वीडियो कॉल आए तो अपने कैमरे को हाथ से ढक कर बात करें। फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रोफाइल को प्राइवेट रखें। कई मामले में पाया गया है कि अपराधी सोशल मीडिया से आपके बारे में जानकारी जुटाते हैं। उसी जानकारी को आपके खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है।
इस बात का ध्यान रखें कि कोई भी जांच एजेंसी या उसके अधिकारी आपको Whatsapp कॉल नहीं करेंगे। अगर आपको ऐसी कॉल आती है तो अपने परिवार को बताएं और पुलिस से संपर्क करें या साइबर क्राइम सेल में कंप्लेंट करें।


