More
    HomeNationalBPSC Protest में आएंगे Kanhaiya Kumar? छात्रों कर दी ये सारी मांग

    BPSC Protest में आएंगे Kanhaiya Kumar? छात्रों कर दी ये सारी मांग

    Published on

    spot_img

    Kanhaiya Kumar: बिहार में BPSC का आंदोलन को 45 दिन से ज़्यादा बीत चुके हैं। छात्र अभी भी पन्नी,टेंट और तंबू में कंबल ओढ़ कर अपने हक और समानता की लड़ाई लड़ रहे हैं। मगर बिहार सरकार मतसून हो चुकी है। आंदोलन के गाहे-बगाने राजनीति के बड़े चेहरे का संबल मिल जाता है तो छात्रों में नया जुनून आ जाता है। सबसे पहले पप्पू यादव, फिर प्रशांत किशोर और फिर राहुल गांधी के आंदोलन में आने से आंदोलन की आवाज़ और बलिष्ट हुई है। इसी बीच आंदलोलन और सियासत के जानकारों के बीच एक बहस तेज हो गई है कि क्या कन्हैया कुमार BPSC आंदोलन में शामिल होंगे? कन्हैया युवा हैं। पढे लिखे हैं, खुद लंबे समय तक छात्र नेता रहे हैं। बिहार से ही है। और इन दिनों दिल्ली के चुनावी दंगल में दिखाई पड़ने शुरू हो गए हैं। जिसके बाद लंबे समय से लापता चल रहे कन्हैया के लिए ये कयास तेज हो गए हैं कि क्या वो बिहार के बच्चों के हक में खड़े होंगे? आइए जानते हैं पूरी बात, जानते हैं कि कन्हैया के लिए ये पूरा आंदोलन किन मायनों में ज़रूरी है, और कन्हैया के आने से BPSC आंदोलन को क्या दशा और दिशा मिल सकती है?

    इन दिनों बिहार के छात्रों और राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है। BPSC का छात्र आंदोलन इसका कारण है। वही BPSC जिसके सपने सजाए बिहार के गांव-गांव से बच्चे गठरी में सतुआ, मूढ़ी, चंद पैसे और कुछ कपड़े और पिता का दिया हुआ एक बलेजर लेकर शहर आते हैं। इस उम्मीद में की बो बलेजर पहन कर शायद किसी सरकारी परीक्षा के इंटरव्यू में बैठे। मगर पेपर लीक हो जाता है। धरना देने पर पुलिस मारती है और सरकार नहीं अनसुना कर देती है। बिहार में BPSC के तहत होने वाली सरकारी नौकरियों के लिए हजारों की संख्या में उम्मीदवार हर साल परीक्षा देते हैं। लेकिन हाल के सालों में, इस परीक्षा के परिणामों में देरी, गड़बड़ियों और उम्मीदवारों की मांगों को लेकर आंदोलन बढ़ते जा रहे हैं। उम्मीदवारों का आरोप है कि BPSC प्रशासन परीक्षा में पारदर्शिता नहीं बरत रहा और कई बार नियुक्तियों में लापरवाही देखी गई हैं।

    यह आंदोलन छात्रों और बेरोजगार युवाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है, और अब यह आंदोलन राजनीतिक रूप भी लेने लगा है। छात्र संगठन, स्थानीय नेता और राजनीतिक दल इस आंदोलन को अपना समर्थन दे रहे हैं। इस मुद्दे पर अब एक नया सवाल उठ रहा है – क्या कन्हैया कुमार इस आंदोलन में भाग लेंगे?

    कन्हैया कुमार,एक युवा नेता और जेएनयू के छात्र नेता रहे हैं। वे अपने छात्र जीवन में छात्र मुद्दों पर आक्रामक रूप से आवाज उठाते रहे हैं। 2016 में जेएनयू में हुए विवादित मुद्दे के बाद वे एक राष्ट्रीय नेता के रूप में उभर कर सामने आए। कन्हैया ने बिहार की राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई, और अभी कांग्रेस नेता हो गए हैं। उनकी राजनीतिक विचारधारा, युवाओं के प्रति उनकी भागीदारी, लगातार आवाज उठाने का उनका अंदाज़ और बिहार में उनके प्रभाव के कारण, यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वे BPSC आंदोलन में भाग लेंगे?

    आइए परत दर परत समझते हैं –
    कन्हैया कुमार हमेशा से युवाओं के मुद्दों पर मुखर रहे हैं। शिक्षा, बेरोजगारी और सरकारी नियुक्तियों में गड़बड़ी जैसे विषय उनके राजनीतिक जीवन का अहम हिस्सा रहे हैं। बिहार में बेरोजगारी और सरकारी नौकरी के लिए हो रहे आंदोलनों के संदर्भ में कन्हैया का रुख अक्सर छात्रों के पक्ष में देखा गया है। इस संदर्भ में, अगर BPSC आंदोलन तेज होता है तो कन्हैया कुमार इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए आगे आ सकते हैं, क्योंकि यह आंदोलन बिहार के युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है, और कन्हैया ने हमेशा युवा अधिकारों के लिए संघर्ष किया है।

    राजनीतिक के परिपेक्ष्य से समझें तो कन्हैया कुमार का राजनीतिक कैरियर बिहार में खासा चर्चित रहा है। उनकी पार्टी और उनके समर्थक इसे एक अच्छा अवसर मान सकते हैं, ताकि वे BPSC आंदोलन के जरिए बिहार के छात्रों के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर सकें। कन्हैया कुमार के लिए यह एक मौका हो सकता है, ताकि वे सरकार पर दबाव बना सकें और बिहार के युवाओं की समस्याओं को सुलझाने की दिशा में कदम उठा सकें। फिलहाल कन्हैया एक लंबे अंतराल के बाद दिल्ली की सियासत में कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने की पुरजोर कोशिश में हैं। दिल्ली में कन्हैया एक्टिव हुए तो बिहार की राजनीतिक हवाओं में ये कयाल घुलने लगा कि क्या कन्हैया को कांग्रेस बिहार से चुनाव लड़ा सकती है। अगर हां तो BPSC का आंदोलन कन्हैया और छात्र दोनों के लिए आपसी सहयोग का विषय बन सकता है।

    कन्हैया कुमार और कांग्रेस इस समय बिहार में अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश करेंगे। यदि यह आंदोलन और ताकत से उभरता है, तो कन्हैया के लिए इसे समर्थन देना राजनीतिक दृष्टिकोण से फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, यह भी देखा जा सकता है कि वे इस मुद्दे को अपने व्यक्तिगत या पार्टीगत फायदे के लिए उपयोग करें। परंतु, कन्हैया का लंबा राजनीतिक इतिहास यह बताता है कि वे हमेशा छात्रों और आम जनता के लिए आवाज उठाने में विश्वास करते हैं।

    बिहार पटना में अपने हक के लिए BPSC आंदोलन पर बैठे छात्रों से जब पूछा गया कि क्या वो इस आंदोलन में कन्हैया कुमार को एक्सपेक्ट कर रहे हैं तो छात्रों ने मीडिया से कहा कि – कन्हैया के आने से आंदोलन बल मिलेगा। हौसला अफजाई भी होगा। राहुल गांधी आए थे। कन्हैया कुमार भी आएंगे को हिम्मत मिलेगा। वो खुद भी छात्र नेता रहे हैं। छात्रों के आंदोलन में शामिल होंगे तो आंदोलन को नई ऊर्जा मिलेगी। छात्रों ने बताया कि जब उनके बड़े राहुल गांधी यहां आ गए। हमारी बातें सुनी, संघर्ष के वीडियो देख कर राहुल गांधी ने कहा कि सड़क से लेकर संसद तक वो छात्रों की आवाज को उठाएंगे। छात्रों ने एक गाढ़ी बात बताई, बोले कि बिहार पेपर लीक का केन्द्र बना हुआ है। अपने एक दोस्त का हवाला दिया जो नीतीश कुमार का सुरक्षा गार्ड है। उसने बताया कि बिहार को लूट का गढ़ बना दिया गया है, दो चार ब्योरोक्रेर्ट्स और नेता-मंत्री मिलकर नीतीश कुमार के सिस्टम को पूरी तरह हाईजैक कर चुके हैं। यहां तेजस्वी यादव की बात भी याद आती है। जब वो मीडिया के सामने और बिहार विधानसभा में दावा करते हैं कि नीतीश कुमार के मंत्रियों ने उन्हें वश में कर रखा है।

    बहरहाल, कन्हैया के इटरव्यू के हवाले से बोलें तो कन्हैया कुमार का खुद भी ये मानना है कि आंदोलनों से ही बदलाव संभव है। वे हमेशा से ऐसे आंदोलनों में शामिल होने का समर्थन करते आए हैं, जो समाज के कमजोर तबकों और छात्रों की समस्याओं को उजागर करते हैं। इसलिए, अगर BPSC आंदोलन में कन्हैया कुमार शामिल होते हैं, तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। वे छात्रों के बीच अपनी पहचान बनाए रखने और उन्हें उचित समर्थन देने के लिए इस आंदोलन का हिस्सा बन सकते हैं।

    अब सवाल यह उठता है कि कन्हैया कुमार का समर्थन इस आंदोलन को कितनी ताकत दे सकता है। कन्हैया का बिहार में अच्छा खासा जनाधार है। उनके समर्थकों के लिए उनका शामिल होना एक बड़ा संकेत होगा कि यह आंदोलन अब राजनीतिक स्तर पर उठ चुका है। साथ ही, कन्हैया की लोकप्रियता और उनके बोलने का अंदाज, आंदोलन को एक नई दिशा देने में मदद कर सकते हैं।

    हालांकि, यह भी जरूरी है कि आंदोलन में केवल राजनीतिक हस्तक्षेप न हो, बल्कि इसकी प्राथमिकता छात्र और बेरोजगार युवाओं के मुद्दों पर बनी रहे। आंदोलन को सही दिशा में ले जाना और बिहार सरकार पर दबाव डालना कन्हैया कुमार के लिए एक बड़ा काम होगा।

    फिलहाल इस सवाल का कोई साफ़ जवाब नहीं है कि कन्हैया कुमार BPSC आंदोलन में भाग लेंगे या नहीं। लेकिन उनके राजनीतिक इतिहास, युवाओं के प्रति उनके झुकाव और बिहार के छात्रों की समस्याओं पर उनके विचार यह संकेत करते हैं कि अगर आंदोलन और तेज़ हुआ, तो कन्हैया कुमार इसमें एक्टिव तौर पर से शामिल हो सकते हैं।
    आंदोलन बिहार के युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है, और कन्हैया कुमार जैसे नेता हमेशा छात्रों के मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहे हैं। मगर अबकी यह देखना होगा कि क्या वे इस बार भी छात्रों के साथ खड़े होंगे या नहीं।

    Latest articles

    Bandi Sanjay Kumar के बेटे पर POCSO मामला दर्ज, परिवार पर वसूली के आरोप भी

    Hyderabad में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री Bandi Sanjay Kumar के बेटे बंदी भागीरथ साई...

    Abhishek Banerjee ने पश्चिम बंगाल चुनाव प्रक्रिया और हिंसा को लेकर उठाए गंभीर सवाल

    All India Trinamool Congress के वरिष्ठ नेता Abhishek Banerjee ने हाल ही में संपन्न...

    Shivpuri Kidnapping: 22 साल की मां और मासूम बच्ची का अपहरण

    Shivpuri Kidnapping: Shivpuri से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। 22 वर्षीय...

    ‘उल्टा लटका दूँगा’: टीएमसी सांसद Kalyan Banerjee का Amit Shah के खिलाफ विवादित बयान, गृहमंत्री को ‘गुंडा-जल्लाद’ कहा

    नई दिल्ली: एक बड़े राजनीतिक विवाद में, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कल्याण बनर्जी...

    More like this

    Bandi Sanjay Kumar के बेटे पर POCSO मामला दर्ज, परिवार पर वसूली के आरोप भी

    Hyderabad में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री Bandi Sanjay Kumar के बेटे बंदी भागीरथ साई...

    Abhishek Banerjee ने पश्चिम बंगाल चुनाव प्रक्रिया और हिंसा को लेकर उठाए गंभीर सवाल

    All India Trinamool Congress के वरिष्ठ नेता Abhishek Banerjee ने हाल ही में संपन्न...

    Shivpuri Kidnapping: 22 साल की मां और मासूम बच्ची का अपहरण

    Shivpuri Kidnapping: Shivpuri से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। 22 वर्षीय...