संसद (Parliament) का शीतकालीन सत्र चल रहा है। संसद का शीतकालीन सत्र कभी अडानी, कभी जॉर्ज सोरोस, कभी हिंदू – मुसलमान के धार्मिक संघर्ष के भेंट चढ़ जा रहा है।
संसद (Parliament) के इस शीतकालीन सत्र में दोनों सदनों में भारी हंगामा देखने को मिल रहा है। शीतकालीन सत्र में अब तक एक भी दिन सही तरीके से सदन नहीं चल पाया है। कांग्रेस समर्थित इंडिया गठबंधन संसद में बिजनेसमैन गौतम अडानी और नरेंद्र मोदी के बीच सांठगांठ होने को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही है।
दो अरबपतियों के विवाद में संसद की कार्यवाही ठप
वहीं सत्तारूढ़ एनडीए भी कांग्रेस पर अरबपति जॉर्ज सोरोस के साथ संबंध होने का आरोप लगा रही है। दोनों पार्टियां दो अरबपतियों के विवाद में संसद की कार्यवाही ठप करके रखी हुई है। हर दिन संसद ठप होने से टैक्स भरने वाले लोगों का करोड़ों रूपया बर्बाद हो रहे हैं। आम जनता की गाढ़ी कमाई, पानी की तरह बह रही है।
संसद (Parliament) में चल रहे है इस खींच तान में सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता का हो रहा है। जिनके कमाई से देश चलता है, संसद भवन भी चलता है। आम आदमी के मुद्दों को उठाने के लिए बनाया गए संसद भवन में आम आदमी के मुद्दे ही नदारद है। पूरा का पूरा दिन सांसद हंगामा करते हुए निकाल दे रहे हैं। सांसद सुबह संसद भवन आते है थोड़ी देर प्रदर्शन करते है, इसके बाद पूरे दिन के लिए सदन की कार्यवाही ठप हो जाती है। सांसद कैंटीन में खाना खाकर सरकारी कार में बैठकर आलीशान सरकारी कोठी पर उतर जाते हैं। इन सब में आम जनता का मुद्दा ऐसे छिप जा रहा है जैसे सर्दी के मौसम में सूरज।
शीतकालीन सत्र में संसद सिर्फ 41 घंटे ही चल पाई
सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष संसद नहीं चलने दे रहा है। वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार जानबूझकर संसद को मुद्दे से भटका रही है। भारतीय संसद के अब तक के इतिहास में 2024 का शीतकालीन सत्र सबसे विफल सत्रों में से एक है। आंकड़ों की मानें तो इस साल शीतकालीन सत्र दोनों सदनों को मिलाकर सिर्फ 41 घंटे ही चली है। जिसमें लोकसभा 18.6 घंटे वहीं राज्यसभा 22.5 घंटे चली है।
आपको बताते चले कि शीतकालीन सत्र 25 नवंबर से शुरू हुआ है और 20 दिसंबर तक चलेगा। पिछले 12 दिन में सिर्फ 41 घंटे ही संसद में कार्यवाही हो सकी है। बाकी का समय हंगामे के कारण बर्बाद हो गया है। अगर हम लोकसभा के परफॉर्मेंस की बात करे तो अभी तक सिर्फ 31 फीसदी ही काम हुआ है। वहीं, राज्यसभा में सिर्फ 32 फीसदी काम हुआ है। शीतकालीन सत्र में केवल 8 दिन बचे हुए हैं और इन दिनों में भी कोई महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं उठाया जा रहा है। इस दौरान जनता को महंगाई, प्रदूषण और अन्य समस्याओं से जूझना पड़ रहा है, लेकिन संसद से ये मुद्दे नदारद हैं।
एक घंटा संसद चलने में आता है 1.5 करोड़ का खर्च
आपको बता दें कि संसद अगर एक घंटा चलता है तो करीब 1.5 करोड़ रुपया खर्च होता है। यानी हर मिनट की कार्यवाही पर 2.5 लाख रुपया खर्च होता है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि टैक्स पेयर का पैसा बर्बाद हो रहा है। क्योंकि संसद में कोई कामकाज नहीं हो रही है। यह न सिर्फ पैसे की बर्बादी है, बल्कि समय का भी नुकसान है। जो संसद में महत्वपूर्ण कानूनों की चर्चा और सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए जरूरी था।
साल 2012 में उस वक्त के पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर पवन बंसल ने आधिकारिक तौर पर बयान दिया था कि सदन चलाने के प्रत्येक मिनट में 2.5 लाख रुपए खर्च होते हैं। साल 2024 में तो महंगाई कई गुना बढ़ गई है। जाहिर है सदन को चलाने का खर्चे भी बढ़ गया है। इसके बावजूद भारतीय संसद के इतिहास में 2024 का शीतकालीन सत्र विफल रहा है।
हंगामे के कारण क्षेत्रीय पार्टियों को हो रही है समस्या
इस राजनीतिक गतिरोध ने न केवल संसद (Parliament) के कामकाज को ठप किया है। बल्कि यह क्षेत्रीय पार्टियों के लिए भी समस्याएं उत्पन्न कर रहा है। सदन में क्षेत्रीय पार्टियों को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल पा रहा है। इस कारण कई क्षेत्रीय पार्टियों ने खुद को इस हंगामे से दूर कर लिया है। समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों ने कांग्रेस के अडाणी विरोध से खुद को अलग कर लिया है। इन सभी पार्टियों ने कहा है कि सदन का संचालन होना चाहिए। अगर संसद ऐसे ही ठप रहा या यही हाल रहा तो यह मतदाताओं में भी नकारात्मक संदेश जाएगा।


