कांग्रेस के अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष Mallikarjun Kharge ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ पर आरोप लगाए है।
Mallikarjun Kharge ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभापति पर निशाना साधा है। खड़गे ने कहा कि सदन में सभापति का व्यवहार विपक्षी सदस्यों के प्रति पक्षपातपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमें मजबूरी में अविश्वास प्रस्ताव लाना पड़ा है।
धनखड़ सरकार के प्रवक्ता बन गए हैं- Mallikarjun Kharge
Mallikarjun Kharge ने कहा कि विपक्षी नेताओं को बोलने से रोका जाता है। सभापति ने चलते सदन में गतिरोध बना हुआ है। सभापति के आचरण से देश की गरिमा को नुकसान पहुंचता है। हमारी सभापति से निजी दुश्मनी नहीं है। आज सदन में राजनीति ज्यादा हो रही है। सभापति जगदीप धनखड़ को निष्पक्ष होना चाहिए। धनखड़ सरकार के प्रवक्ता बन गए हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सभापति का काम नियम से सदन को संचालित करने का है। सभापति राजनीति से परे रहते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में सभापति कभी खुद को RSS का एकलव्य बताते हैं तो कभी सरकार की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे होते हैं। खड़गे ने कहा कि सदन में बहुत ही सीनियर बुद्धिजीवी, वरिष्ठ पत्रकार, 30-40 सालों का राजनीतिक इतिहास वाले लोग बैठे हैं। लेकिन सभापति जगदीप धनखड़ हेडमास्टर की तरह लेक्चर देते हैं।
संविधान के किस अनुच्छेद के तहत लाया गया है अविश्वास प्रस्ताव?
आपको बता दें कि जगदीप धनखड़ को हटाने के लिए इंडिया गठबंधन ने अविश्वास प्रस्ताव लाया है। सभापति धनखड़ के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 67 के तहत अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। संविधान के अनुच्छेद 67 (बी) में कहा गया है कि उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के एक प्रस्ताव के जरिए उनके पद से हटाया जा सकता है। नियम के तहत प्रस्ताव तब तक पेश नहीं किया जाएगा, जब तक कम से कम 14 दिनों का नोटिस नहीं दिया गया हो। साथ ही प्रस्ताव लाने का इरादा भी बताना होता है।
आपको बता दें कि देश ने संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि राज्यसभा के सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस नोटिस पर विचार किया जाए या नहीं इसमें सरकार की भी प्रमुख भूमिका होगी।


